श्रीगंगानगर के मिनी बैंकों में 11.5 करोड़ से ज्यादा की गड़बड़ी, 150 करोड़ की ग्रामीण बचत पर मंडराया संकट

The CSR Journal Magazine
राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में ग्राम सेवा सहकारी समितियों के तहत संचालित मिनी बैंकों में करोड़ों रुपये के गबन और वित्तीय अनियमितताओं के मामले सामने आने से ग्रामीण बचतकर्ताओं की चिंता बढ़ गई है। जिले के 127 मिनी बैंकों में करीब 150 करोड़ रुपये जमा हैं, लेकिन अब तक 11.5 करोड़ रुपये से अधिक की अनियमितताएं उजागर हो चुकी हैं। किसान, मजदूर और छोटे जमाकर्ता अपनी जमा पूंजी वापस मिलने का इंतजार कर रहे हैं, जबकि सहकारी व्यवस्था की निगरानी और जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

कई समितियों में करोड़ों की गड़बड़ी, 11.5 करोड़ से ज्यादा राशि प्रभावित

श्रीगंगानगर जिले में संचालित मिनी बैंकों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कई वित्तीय अनियमितताएं सामने आई हैं। सबसे बड़ा मामला जैतसर क्षेत्र के 2 जीबी-ए मिनी बैंक का है, जहां करीब 8.92 करोड़ रुपये की गड़बड़ी उजागर हुई। इसके अलावा जानकीदासवाला और डूंगरसिंहपुरा ग्राम सेवा सहकारी समितियों में लगभग एक-एक करोड़ रुपये की अनियमितता सामने आई है। 4-ओ ग्राम सेवा सहकारी समिति में 50 लाख रुपये से अधिक और 10 जैड समिति में करीब 16 लाख रुपये की वित्तीय गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। जांच में रिकॉर्ड में हेरफेर, फर्जी प्रविष्टियां और जमा राशि के दुरुपयोग जैसे मामले सामने आए हैं।

किसान और मजदूर अपनी जमा पूंजी के लिए कर रहे इंतजार

इन मिनी बैंकों में जमा राशि का बड़ा हिस्सा किसानों, मजदूरों और छोटे बचतकर्ताओं का है। कई मामलों में शिकायतों के बाद जांच, निलंबन, नोटिस और एफआईआर जैसी कार्रवाई शुरू हुई, लेकिन प्रभावित जमाकर्ताओं को अब तक पूरी राहत नहीं मिल पाई है। न्यायिक और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण कई मामलों में वसूली की प्रक्रिया लंबी खिंच रही है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में सहकारी संस्थाओं के प्रति लोगों का भरोसा कमजोर होता दिखाई दे रहा है।

निगरानी और ऑडिट व्यवस्था पर उठे सवाल

इन मामलों के सामने आने के बाद सहकारी समितियों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। समितियों के संचालन, वित्तीय सत्यापन और ऑडिट की जिम्मेदारी विभिन्न स्तरों पर तय होने के बावजूद करोड़ों रुपये की अनियमितताएं वर्षों तक सामने नहीं आ सकीं। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित ऑडिट, आकस्मिक निरीक्षण और डिजिटल लेखांकन प्रणाली को मजबूत किए बिना ऐसी घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं है। पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना अब समय की सबसे बड़ी जरूरत बन गई है।

बड़ी जमा राशि से बचने की सलाह, भरोसा बहाल करना चुनौती

दी गंगानगर केंद्रीय सहकारी बैंक के प्रबंध निदेशक संजय गर्ग ने कहा कि जिन स्थानों पर शिकायतें और अनियमितताएं सामने आई हैं, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि मिनी बैंक सीमित बैंकिंग सुविधाओं के लिए बनाए गए हैं, इसलिए इनमें बड़ी राशि जमा करने से बचना चाहिए और हर लेन-देन की रसीद अवश्य लेनी चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और मजबूत निगरानी व्यवस्था के जरिए ही ग्रामीण बचतकर्ताओं का भरोसा दोबारा कायम किया जा सकता है।

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