इको-फ्रेंडली सफर: गाजीपुर के कचरे का वैज्ञानिक अंत, अब दिल्ली-देहरादून एक्स्प्रेस-वे बनेगा विकास का मंत्र

The CSR Journal Magazine

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे… गाजीपुर के कचरे से कैसे बना पर्यावरण संरक्षण का मॉडल?

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा परियोजना है, जो दिल्ली से देहरादून के बीच यात्रा के समय को 6.5 घंटे से घटाकर मात्र 2.5 घंटे करने का लक्ष्य रखती है। 210 किलोमीटर लंबी यह परियोजना ‘वेस्ट टू वेल्थ’ (कचरे से कंचन) के सिद्धांत पर आधारित है। इसमें केवल आधुनिक तकनीक का ही उपयोग नहीं किया गया है, बल्कि शहरी कचरे की समस्या से निपटने के लिए एक नया मॉडल भी पेश किया गया है, जो बुनियादी ढांचे के साथ-साथ सतत विकास (Sustainable Development) को प्राथमिकता देता है।

भाजपा अध्यक्ष का प्रधानमंत्री को धन्यवाद

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे के उद्घाटन पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने बताया कि गाजीपुर लैंडफिल से करीब 10 लाख मीट्रिक टन कचरे को वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करके इस एक्सप्रेस-वे के निर्माण में शामिल किया गया। यह बात सचदेवा ने एक कार्यक्रम में साझा की।

एक्सप्रेस-वे: विकास की नई दिशा

सचदेवा ने कहा कि यह एक्सप्रेस-वे सिर्फ एक सड़क परियोजना नहीं है, बल्कि यह विकसित भारत के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। महावीर स्वामी पार्क में एक जनसभा को संबोधित करते हुए, उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में चल रहे विकास के कार्यों को सराहा।

कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण और उपयोग

गाजीपुर लैंडफिल साइट, जो दशकों से दिल्ली के लिए एक बड़े सिरदर्द और “कचरे के पहाड़” के रूप में जानी जाती है, के बोझ को कम करने के लिए इस एक्सप्रेस-वे का निर्माण एक समाधान बनकर उभरा है। परियोजना के तहत, लैंडफिल से लगभग 10 लाख मीट्रिक टन कचरे को निकाला गया और उसे वैज्ञानिक रूप से प्रोसेस किया गया। इस उपचारित कचरे को एक्सप्रेस-वे के तटबंधों (Embankments) के लिए भराव सामग्री के रूप में सफलतापूर्वक उपयोग किया गया है, जिससे प्राकृतिक मिट्टी की आवश्यकता कम हुई और खनन से होने वाले नुकसान को भी रोका जा सका।

एक्सप्रेस-वे की प्रमुख विशेषताएँ और लाभ

यह एक्सप्रेस-वे दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर से शुरू होकर बागपत, शामली और सहारनपुर होते हुए देहरादून तक पहुँचता है। इसमें एशिया का सबसे लंबा 12 किलोमीटर का वन्यजीव गलियारा (Elevated Wildlife Corridor) भी शामिल है, जिससे राजाजी नेशनल पार्क के वन्यजीवों को सुरक्षित रास्ता मिलता है。 इस परियोजना से न केवल दिल्ली में जाम की समस्या से राहत मिलेगी, बल्कि गाजीपुर जैसी लैंडफिल साइटों से कचरा कम होने के कारण आस-पास के क्षेत्रों की हवा और पर्यावरण में भी सुधार होगा।

210 किलोमीटर लंबा और 12,000 करोड़ का निवेश

इस परियोजना की लागत लगभग 12,000 करोड़ रुपये है और यह 210 किलोमीटर लंबा है। इससे दिल्ली का यातायात ढांचा मजबूत होगा और जाम की समस्या में काफी हद तक राहत मिलेगी। सचदेवा ने इसे राष्ट्र निर्माण के बड़े विजन का हिस्सा बताया। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की अगुवाई में देशभर में आधुनिक और विश्वस्तरीय एक्सप्रेस-वे का निर्माण तेज गति से हो रहा है। वर्तमान में दिल्ली में 65,000 करोड़ रुपये के इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर काम जारी है। इनमें से 33,000 करोड़ रुपये की परियोजनाएँ पूरी हो चुकी हैं।

गाजीपुर से कचरे का इस्तेमाल

दिल्ली में ईस्टर्न और वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे के निर्माण से यातायात का दबाव कम हुआ है। लगभग 73,000 वाहन अब बिना राजधानी में प्रवेश किए अपने गंतव्य तक पहुँचते हैं। इससे ना केवल यातायात सुगम हुआ है, बल्कि प्रदूषण में भी कमी आई है।

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम

गाजीपुर लैंडफिल से निकाले गए 10 लाख मीट्रिक टन कचरे का उपयोग इस परियोजना में किया गया है, जो वेस्ट टू वेल्थ के सिद्धांत का एक अच्छा उदाहरण है। सचदेवा ने इसे सतत विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता के रूप में देखा। उन्होंने अंत में प्रधानमंत्री मोदी और संविधान के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की।

निर्माण और पर्यावरण संरक्षण के बीच तालमेल

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे सड़क निर्माण और पर्यावरण संरक्षण के बीच एक अनूठे तालमेल का प्रमाण है। गाजीपुर के लाखों टन कचरे का निस्तारण यह दर्शाता है कि भविष्य की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में आधुनिक इंजीनियरिंग का उपयोग पारिस्थितिक चुनौतियों को हल करने के लिए कैसे किया जा सकता है। यह परियोजना न केवल उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के साथ दिल्ली की कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी, बल्कि देश के अन्य शहरों के लिए ‘जीरो डंपसाइट’ लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी।

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