West Bengal विधानसभा में एंटी-गुंडा और OBC आरक्षण बिल पास, अगस्त में UCC बिल पेश होगा

The CSR Journal Magazine
पश्चिम बंगाल विधानसभा ने सोमवार को कानून-व्यवस्था और OBC आरक्षण से जुड़े चार महत्वपूर्ण बिल पास किए हैं। इन बिलों में एंटी-गुंडा कानून शामिल है, जिसके तहत पुलिस अब कुछ मामलों में बिना ट्रायल के आरोपी को 12 महीने तक हिरासत में रख सकती है। यह कदम राज्य में बढ़ते अपराध को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया है।

इसे कहते हैं असरदार बदलाव

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने बताया कि OBC आरक्षण से जुड़े दो संशोधन बिलों को भी मंजूरी मिल गई है। राज्य सरकार का मानना है कि पुराने कानूनों ने संगठित अपराध और हिंसा से जुड़े मामलों को प्रभावी तरीके से नियंत्रित नहीं किया है। इसलिए, नए कानून के माध्यम से पुलिस और प्रशासन को ज्यादा अधिकार दिए गए हैं।

UCC का ड्राफ्ट तैयार करने वाली समिति

सुवेंदु अधिकारी ने जानकारी दी है कि समान नागरिक संहिता (UCC) का ड्राफ्ट 2 जुलाई को कैबिनेट के सामने पेश किया जाएगा और इसे अगस्त में विधानसभा में रखा जाएगा। UCC का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए पूर्व सुप्रीम कोर्ट की जज रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई है। इस समिति में कानून, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल हैं।

दंगों की भरपाई और संपत्ति जब्ती

एंटी-गुंडा कानून के तहत न केवल दंगों से हुए नुकसान की भरपाई की जाएगी, बल्कि अगर किसी आरोपी ने गंभीर अपराध किया है, तो उसकी संपत्ति भी जब्त की जा सकी जाएगी। यह नियम विशेष रूप से उन मामलों में लागू होगा जहां दंगों या हिंसा के कारण गंभीर नुकसान हुआ है।

ओबीसी समुदाय में बदलाव

OBC लिस्ट में 113 समुदायों को हटाया गया है और सर्वे के बाद 66 नए समुदायों को जोड़ा गया है। इस बदलाव के पीछे सरकार का तर्क है कि इससे समाज में बेहतर संतुलन स्थापित होगा और वंचित वर्ग को उचित हिस्सेदारी मिल सकेगी।

गंभीरता से लिया गया यह कदम

राज्य सरकार का कहना है कि मौजूदा कानून संगठित अपराध से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। कई आरोपी जल्दी जमानत पर बाहर आ जाते थे और फिर से अपराध में शामिल हो जाते थे। नए कानून का उद्देश्य इन्हीं खामियों को दूर करना है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इसे एक सख्त कदम बताया है जिसका उद्देश्य राज्य में कानून व्यवस्था को सुधारना है।

कार्यवाही के लिए नए अधिकार

नए एंटी-गुंडा कानून के तहत पुलिस को और अधिक अधिकार दिए गए हैं ताकि वे दंगे और हिंसा के मामलों में प्रभावी कार्रवाई कर सकें। केवल अपराधियों को जेल भेजना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि नुकसान पहुँचाने वालों से मुआवजा वसूला जाएगा। इससे राज्य में कानून व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।

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