RTO के चक्कर हुए कम: स्मार्ट परिवहन सेवाओं से कैसे बदला सिस्टम?

The CSR Journal Magazine
उत्तर प्रदेश के परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन ने कहा है कि सरकारी सेवाओं का लक्ष्य नागरिकों को कम समय में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। अब लोगों को कार्यालयों में आने की जरूरत नहीं है, वे ऑनलाइन ही विभिन्न सेवाओं का लाभ ले सकते हैं। यह डिजिटल गवर्नेंस का एक बड़ा कदम है जिसने परिवहन सेवाओं को स्मार्ट और सुलभ बना दिया है।

उत्तर प्रदेश में परिवहन विभाग की क्रांति

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में परिवहन विभाग ने तकनीक का व्यापक उपयोग किया है। इससे सेवाएं अधिक पारदर्शी, सरल और नागरिकों के लिए सुलभ हो गई हैं। वाहन पंजीकरण, ड्राइविंग लाइसेंस, कर भुगतान जैसी प्रक्रियाएं पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान और तेज हो गई हैं।

आंकड़ों की बात

उत्तर प्रदेश में परिवहन विभाग के आंकड़े इस बदलाव की पुष्टि करते हैं। वर्तमान में यहां कुल 5 करोड़ 30 लाख 25 हजार 689 वाहन पंजीकृत हैं। इनमें से लगभग 34 लाख 76 हजार 928 वाणिज्यिक और 4 करोड़ 95 लाख 48 हजार 761 निजी वाहन हैं। अब डिजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से इन वाहनों का प्रबंधन बेहद प्रभावी हो गया है।

लखनऊ आरटीओ बनी लीडर

वाहन पंजीकरण में लखनऊ का ट्रांसपोर्ट नगर आरटीओ प्रदेश का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है। यहां कुल 32 लाख 49 हजार 911 वाहन पंजीकृत हैं। इसके बाद प्रयागराज, कानपुर नगर, आगरा और वाराणसी आते हैं, जो क्रमशः हाई पंजीकरण आंकड़े रखते हैं। यह दर्शाता है कि डिजिटल प्रणाली ने कार्यों के निष्पादन में तेजी लाई है।

ड्राइविंग लाइसेंस में उल्लेखनीय सुधार

उत्तर प्रदेश ने ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने में भी महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। प्रदेश में अब तक 2.99 लाख से अधिक नए लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं। लखनऊ, गाजियाबाद, मेरठ, कानपुर नगर और प्रयागराज शीर्ष पांच ऐसे आरटीओ हैं जिन्होंने सबसे अधिक लाइसेंस जारी किए हैं।

ट्रांसपोर्ट ड्राइविंग लाइसेंस की उपलब्धि

व्यावसायिक ड्राइविंग लाइसेंस (ट्रांसपोर्ट डीएल) के क्षेत्र में भी प्रदेश ने महत्वपूर्ण प्रगति की है। अब तक 29 लाख 5 हजार 937 ट्रांसपोर्ट ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं। प्रयागराज, कानपुर नगर, गोरखपुर, जौनपुर और आजमगढ़ के कार्यालय इसमें अग्रणी हैं।

फेसलेस और कॉन्टैक्टलेस सेवाएं

योगी सरकार ने तकनीक आधारित सुधारों को प्राथमिकता देकर भ्रष्टाचार की संभावनाओं को कम किया है। परिवहन विभाग ने डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देते हुए अब 49 सेवाएं फेसलेस और कॉन्टैक्टलेस मोड में उपलब्ध कराई हैं। इसमें नागरिकों को अब परिवहन कार्यालय के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं है। वे घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

पारदर्शिता और समय की बचत

फेसलेस प्रणाली से समय की बचत और पारदर्शिता बढ़ाई गई है। मानव हस्तक्षेप कम होने से सेवाएं तेज, सरल और प्रभावी हो गई हैं। यह सब मिलकर उत्तर प्रदेश के नागरिकों के लिए एक नया युग लेकर आया है, जहां परिवहन सेवाएं स्मार्ट और त्वरित हैं।

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