उज्ज्वला योजना में कथित गैस घोटाला रिकॉर्ड में सिलेंडर सप्लाई, लेकिन गरीबों तक नहीं पहुंचा लाभ गरीबों के नाम पर कनेक्शन, घरों में अब भी चूल्हे का धुआं

The CSR Journal Magazine
राजस्थान में भरतपुर के डीग जिले के बृज नगर कस्बे में संचालित तेज भारत गैस एजेंसी पर प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत गंभीर अनियमितताओं और कथित गैस घोटाले के आरोप लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उनके नाम पर गैस कनेक्शन जारी कर दिए गए और रिकॉर्ड में सिलेंडर सप्लाई तक दिखा दी गई, लेकिन उन्हें आज तक गैस सिलेंडर, चूल्हा, पाइप, रेगुलेटर या पासबुक नहीं मिली। मामला सामने आने के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

दस्तावेज लिए, लेकिन गैस सामग्री नहीं दी

ग्रामीणों के अनुसार एजेंसी के डिलीवरी मैन गांवों में पहुंचे और लोगों से कहा कि सरकार की ओर से मुफ्त गैस कनेक्शन दिए जा रहे हैं। गरीब और अशिक्षित परिवार सरकारी योजना का लाभ मिलने की उम्मीद में अपने आधार कार्ड, मोबाइल नंबर और अन्य दस्तावेज जमा करा बैठे। आरोप है कि इसके बाद उनके नाम पर गैस कनेक्शन चालू कर दिए गए, लेकिन लाभार्थियों को कोई सामग्री नहीं दी गई। जब ग्रामीणों ने ऑनलाइन रिकॉर्ड निकलवाए तो पता चला कि उनके नाम पर गैस सप्लाई और सिलेंडर उठान तक दर्ज है।

उपभोक्ताओं ने खोली पूरी पोल

उड़की मोहम्मदा निवासी दीनू ने बताया कि उनकी पत्नी जमसीदा के नाम पर उपभोक्ता संख्या 101500999 और एसवी नंबर 4105918531 पर कनेक्शन सक्रिय दिखाया गया है। रिकॉर्ड में सिलेंडर सप्लाई भी दर्ज है, लेकिन उन्हें आज तक कोई गैस सामग्री नहीं मिली।
इसी तरह ईसनाका निवासी सुलेमान ने बताया कि उनकी पत्नी फजरी के नाम पर उपभोक्ता संख्या 85399620 पर 13 फरवरी 2026 को गैस सप्लाई दर्ज दिखाई गई, जबकि उनके घर कोई सिलेंडर नहीं पहुंचा। काबान का बास निवासी फज्जर ने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी मौसमीना के नाम पर 13 सितंबर 2024 को सप्लाई दिख रही है, लेकिन उन्हें कभी चूल्हा या रेगुलेटर नहीं मिला।
वहीं सुबदीन ने कहा कि उनकी पत्नी हफीजन के नाम पर रिकॉर्ड में सिलेंडर उठान दर्ज है, लेकिन परिवार आज भी लकड़ी और उपलों से खाना बनाने को मजबूर है।

अधिकारियों की चुप्पी से बढ़े सवाल, जांच की मांग तेज

मामले को लेकर जब तेज भारत गैस एजेंसी संचालक से संपर्क करने की कोशिश की गई तो उन्होंने कोई जवाब देने से इनकार कर दिया। वहीं जिला रसद विभाग के अधिकारियों ने भी स्पष्ट जानकारी देने से बचते हुए चुप्पी साध ली। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सब कुछ नियमों के अनुसार हुआ है तो संबंधित अधिकारी और एजेंसी जवाब देने से क्यों बच रहे हैं। अब ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, रसद विभाग और तेल कंपनी से पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। लोगों ने गैस सप्लाई रिकॉर्ड, डिलीवरी एंट्री, ओटीपी लॉग और वितरण व्यवस्था की तकनीकी जांच कराने की मांग उठाई है। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला गरीबों के नाम पर सरकारी योजना में बड़े फर्जीवाड़े के रूप में सामने आ सकता है। अब हर किसी की जुबान पर एक ही सवाल है, जब गरीबों को गैस मिली ही नहीं, तो उनके नाम पर उठे सिलेंडर आखिर गए कहां?

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