Bengal में TMC के लिए नया संकट: ‘फर्जी सिग्नेचर’ के मामले में विधायक जांच के घेरे में

The CSR Journal Magazine
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) एक नई मुसीबत में फंस गई है। पार्टी के कुछ विधायकों के हस्ताक्षरों में असमानता की शिकायतों के चलते सीआईडी ने जांच शुरू कर दी है। यह मामला तब सामने आया जब ‘शोभनदेब चटर्जी’ को विपक्ष का नेता बनाने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया गया, जिसमें कई सिग्नेचर ‘फर्जी’ पाए गए। CID की टीम अब विधायकों के घर जाकर हैंडराइटिंग एक्सपर्ट की मदद से सिग्नेचर की जांच कर रही है।

कुछ विधायकों के सिग्नेचर पर उठे सवाल

इस खोजबीन के दौरान, एक ओर चौरंगी की विधायक ‘नयना बनर्जी’, बेलेघाटा के विधायक ‘कुणाल घोष’ और कैनिंग पूर्व के विधायक ‘बहारुल इस्लाम’ के साथ पूर्व मंत्री और बोलपुर के विधायक ‘चंद्रनाथ सिन्हा’ के घर पर भी जांच की गई। सीआईडी अपने साथ हैंडराइटिंग एक्सपर्ट ले गई ताकि असली और नकली सिग्नेचर का पता लगाया जा सके। पार्टी में इस संकट के चलते माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया है।

क्या है ‘फर्जी सिग्नेचर’ की कहानी?

कथित तौर पर, तृणमूल कांग्रेस को शोभनदेब चटर्जी को विपक्ष का नेता बनाने के लिए 70 विधायकों के सिग्नेचर की जरूरत थी। जैसे ही यह प्रस्ताव खड़ा हुआ, कई विधायकों ने यह दावा किया कि उन्होंने उस पर साइन नहीं किया था। 6 मई को चुनाव परिणाम आने के बाद, ममता बनर्जी ने जीते हुए विधायकों की एक बैठक बुलाई थी। इस बैठक में विधायकों ने ममता को यह तय करने की जिम्मेदारी दी कि किसे विधायक दल का नेता और अन्य पदों पर नियुक्त किया जाएगा।

सीआईडी जांच में उठ रहे नए सवाल

हालांकि, कुछ विधायकों के सिग्नेचर से जुड़ी समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। विशेषकर, कैनिंग पूर्व के विधायक बहारुल इस्लाम के मामले में विवाद गहराता जा रहा है। उन्होंने कहा है कि 19 मई को मीटिंग में साइन किए गए थे, लेकिन विधानसभा में जमा पत्र पर 6 मई की तारीख है। वे उस दिन ममता के घर पर मौजूद नहीं थे। उनके मुताबिक, वे चुनाव के बाद की हिंसा के कारण घर पर थे।

पार्टी में बढ़ती तंगी

नयना बनर्जी ने भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए कहा है कि उन्होंने कोई साइन नहीं किया। वे दावा कर रही हैं कि यह कोई असेंबली पेपर नहीं था, बल्कि पार्टी का एक दस्तावेज था। जबकि टीएमसी ने इन आरोपों से साफ इनकार किया है। विधायक शोभनदेब चटर्जी ने कहा कि यह सब परेशान करने की एक राजनीतिक साजिश है। इसके विपरीत, मंत्री दिलीप घोष ने कहा कि पूरी सरकार ही नकली थी। यह कहना सही है कि इस दौर में TMC के लिए एक नई चुनौती उत्पन्न हो गई है।

किसकी होगी जीत?

जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, पार्टी के भीतर और बाहरी दुनिया में भी इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है। क्या TMC इस संकट से उबर पाएगी? यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन फिलहाल, पार्टी के लिए यह वाकई एक बड़ी टेंशन का समय है।

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