स्पेन में महा-संकट: सेना की तैनाती, समंदर में लाशें और 3000 प्रवासियों का सैलाब

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स्पेन में प्रवासी संकट: सीमा तोड़कर पहुंचे हजारों लोग, नौ की हुई मौत

स्पेन के सेउटा बॉर्डर पर सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई है, जहां मोरक्को की सीमा तोड़कर 2,000 से 3,000 से अधिक अवैध प्रवासी जबरन घुस गए हैं। समुद्र के रास्ते तैरकर और कंटीली बाड़ों को काटकर दाखिल होने की इस खतरनाक कोशिश में कम से कम 9 प्रवासियों की दर्दनाक मौत हो चुकी है और कई लोग लापता हैं। स्थिति इस कदर अनियंत्रित और अराजक हो गई है कि स्थानीय प्रशासन की आपातकालीन मांग पर स्पेन सरकार ने सीमा पर सशस्त्र सेना (Armed Forces) और टैंक तैनात कर दिए हैं। वर्ष 2021 के बाद यूरोप के इस प्रवेश द्वार पर यह अब तक का सबसे भीषण मानवीय और सुरक्षा संकट माना जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा घेरा तोड़ स्पेन में घुसा प्रवासियों का सैलाब

उत्तरी अफ्रीका के तट पर स्थित स्पेन के स्वायत्त क्षेत्र ‘सेउटा’ (Ceuta) में इस समय अफरा-तफरी का माहौल है। प्रत्यक्षदर्शियों और सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, गुरुवार तड़के अचानक हजारों की संख्या में मोरक्कन और अन्य अफ्रीकी मूल के प्रवासियों ने स्पेनिश सीमा की ओर कूच कर दिया। सीमा पर तैनात सिविल गार्ड (Guardia Civil) के अधिकारियों को धक्का देते हुए और कड़े सुरक्षा घेरे को चकमा देकर यह हुजूम शहर की सड़कों पर फैल गया। सेउटा में सिविल गार्ड अधिकारियों के संघ के प्रमुख राशिद सिबीही ने बताया, “सीमा पर स्थिति पूरी तरह से अराजक और अनियंत्रित है। सटीक आंकड़े देना फिलहाल असंभव है, लेकिन हजारों प्रवासी सीमा पार कर चुके हैं। हमारा बॉर्डर इन्फ्रास्ट्रक्चर इस दबाव के आगे पूरी तरह ढह चुका है।”

स्पेन पहुंचा प्रवासी सैलाब

सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया चैनलों पर प्रसारित हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि प्रवासियों का एक बड़ा समूह हवा भरे रबर के छल्लों (Flotation Devices) और छोटे टायरों के सहारे उफनते समुद्र में तैरकर ताराजाल (Tarajal) बीच के रास्ते स्पेन की धरती पर पहुंच रहा है। वहीं दूसरी ओर, सैकड़ों युवा सीमा पर लगी ऊंची और कंटीली बाड़ों के गेट को जबरन तोड़कर भागते नजर आ रहे हैं। इस भीड़ में मुख्य रूप से युवा पुरुष शामिल हैं, लेकिन कई जगहों पर महिलाओं और छोटे बच्चों वाले परिवार भी बदहवास हालत में सीमा पार करते दिखे। स्पेन की सरजमीं पर कदम रखते ही कई प्रवासी खुशी से ‘विवा एस्पाना’ (स्पेन अमर रहे) के नारे लगा रहे थे।

मौत का तांडव: समंदर में तैरती लाशें

इस दुस्साहसिक घुसपैठ का सबसे दर्दनाक पहलू वह मानवीय त्रासदी है, जिसने पूरे यूरोप को झकझोर दिया है। स्पेनिश सरकार के स्थानीय प्रतिनिधिमंडल ने पुष्टि की है कि गुरुवार को मची इस भगदड़ और समुद्र पार करने की होड़ में कम से कम 9 प्रवासियों की डूबने व चोटों के कारण मौत हो गई। समुद्र की लहरों पर प्रवासियों के छोड़े गए कपड़े, जूते और कई शव तैरते हुए देखे गए, जिन्हें स्पेनिश तटरक्षक बल बाहर निकाल रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह आंकड़ा और बढ़ सकता है क्योंकि कई लोग अभी भी लापता हैं। हाल के महीनों में इस बेहद खतरनाक समुद्री मार्ग से सेउटा पहुंचने की कोशिश में कुल 60 से अधिक प्रवासियों की जान जा चुकी है, जिससे यह साफ होता है कि यूरोप में प्रवेश के लिए लोग अपनी जान दांव पर लगाने से भी पीछे नहीं हट रहे हैं।

सेना की तैनाती: सड़कों पर मार्च करते दिखे टैंक

स्थानीय पुलिस और सिविल गार्ड जब भीड़ को रोकने में पूरी तरह लाचार साबित हुए, तो सेउटा के क्षेत्रीय सरकार के प्रमुख जुआन जीसस विवास (Juan Jesús Vivas) ने मैड्रिड स्थित केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करने और ‘राष्ट्रीय सुरक्षा आपातकाल’ घोषित करने की गुहार लगाई। उन्होंने कहा कि यह अब केवल प्रवासन का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि देश की संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा पर सीधा संकट है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ (Pedro Sánchez) ने आपात बैठक बुलाई और सीमा पर व्यवस्था बहाल करने के लिए स्पेनिश सशस्त्र बलों (Army) को तैनात करने का आदेश दिया।

सेना ने संभाली कमान

आदेश मिलते ही मोरक्को से लगी सीमा और ताराजाल समुद्र तट की ओर जाने वाली सड़कों पर स्पेनिश सेना के बख्तरबंद वाहन, टैंक और जवानों ने कमान संभाल ली है। सेना के जवान अब सिविल गार्ड्स के साथ मिलकर प्रवासियों को हिरासत में लेने और सीमा को फिर से सील करने के काम में जुटे हैं। सरकार ने साफ किया है कि कानून-व्यवस्था से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। स्पेन के गृह मंत्री फर्नांडो ग्रांडे-मार्लास्का (Fernando Grande-Marlaska) भी जमीनी हालात का जायजा लेने और राहत कार्यों की समीक्षा के लिए सेउटा पहुंच रहे हैं।

मानवीय संकट: क्षमता से 2,400% ऊपर पहुंचे राहत केंद्र

इस भारी इनफ्लक्स (आगमन) ने सेउटा की बुनियादी सुविधाओं और मानवीय सहायता तंत्र की कमर तोड़ दी है। शहर में प्रवासियों के ठहरने के लिए बने अस्थायी स्वागत केंद्र (CETI) अपनी तय क्षमता से कई गुना अधिक भर चुके हैं। स्थिति यह है कि सैकड़ों प्रवासियों, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं, को खुले आसमान के नीचे सड़कों और पार्कों में सोने पर मजबूर होना पड़ रहा है। क्षेत्रीय नेता जुआन विवास ने स्थानीय रेडियो स्टेशनों (Cadena SER) को दिए इंटरव्यू में चेतावनी देते हुए कहा, “हम इस समय पूर्ण रूप से मानवीय और सामाजिक आपातकाल का सामना कर रहे हैं। सबसे भयावह स्थिति बिना अभिभावक वाले नाबालिग बच्चों (Unaccompanied Minors) की है। उनके लिए बनाए गए विशेष केंद्र अपनी निर्धारित क्षमता से 2,400% अधिक क्षमता पर काम कर रहे हैं। हमारे पास उन्हें खिलाने और छत देने के संसाधन खत्म हो रहे हैं।”

अचानक क्यों भड़का यह संकट? सुप्रीम कोर्ट का वह फैसला

विशेषज्ञ और नीति विश्लेषक इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि आखिर रातों-रात इतनी बड़ी संख्या में लोग सीमा पार करने के लिए क्यों उमड़ पड़े। स्पेन के गृह मंत्रालय और स्थानीय प्रशासन का मानना है कि इस अप्रत्याशित भीड़ के पीछे स्पेन की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) का हालिया फैसला है। इस महीने की शुरुआत में अदालत ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा था कि समुद्र या जमीनी रास्ते से सेउटा या मेलिला पहुंचने वाले किसी भी प्रवासी को बिना किसी उचित कानूनी प्रक्रिया या जांच के सीधे मोरक्को वापस (Pushback) नहीं भेजा जा सकता। गृह मंत्रालय के अनुसार, मानव तस्करी और प्रवासियों की स्मगलिंग में शामिल आपराधिक नेटवर्क ने इस अदालती फैसले का गलत फायदा उठाया। उन्होंने अफ्रीका के गरीब और संकटग्रस्त इलाकों के युवाओं को यह कहकर उकसाया कि ‘अब स्पेन पहुंचने पर उन्हें तुरंत वापस नहीं निकाला जाएगा और उन्हें यूरोप की नागरिकता मिल जाएगी’। हालांकि, मानव अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि जमीनी स्तर पर गरीब प्रवासियों को ऐसे कानूनी फैसलों की इतनी बारीक जानकारी नहीं होती; असली वजह मोरक्को की ओर से सीमा नियंत्रण में आई ढील और अफ्रीका में बढ़ती आर्थिक तंगी है।

मोरक्को का रुख और सीमा पर हिंसक झड़पें

स्पेन में मचे इस बवाल के बीच पड़ोसी देश मोरक्को की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, मोरक्को के अधिकारियों ने इस बात से साफ इनकार किया है कि उन्होंने जानबूझकर सीमा ढीली की है। मैड्रिड में मोरक्को के दूतावास ने बयान जारी कर इस पूरी त्रासदी के लिए अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी सिंडिकेट को जिम्मेदार ठहराया है। जमीनी सूत्रों के मुताबिक, मोरक्को की सीमा के भीतर स्थित कस्बे ‘फनीदेक’ (Fnideq) में मोरक्कन सुरक्षा बलों ने प्रवासियों को रोकने के लिए वाटर कैनन (पानी की बौछारों) और आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया, जिसके बाद प्रवासियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पें भी हुईं। इसके बावजूद प्रवासियों का रेला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। स्पेन और मोरक्को के गृह मंत्रालयों ने आपस में संपर्क साधा है और दोनों देश इस बात पर सहमत हुए हैं कि सेउटा में अवैध रूप से प्रवेश करने वाले सभी लोगों की पहचान कर उन्हें जल्द से जल्द वापस मोरक्को डिपोर्ट (सौंपा) किया जाएगा।

यूरोप में राजनीतिक उबाल: इटली की सख्त चेतावनी

सेउटा से आई इन तस्वीरों ने पूरे यूरोपीय संघ (EU) के भीतर शरणार्थी और प्रवासन नीति पर चल रही बहस को फिर से गरमा दिया है। यूरोप के अन्य देश, जो पहले से ही अवैध प्रवासन से परेशान हैं, इस घटनाक्रम पर बेहद सख्त रुख अपना रहे हैं। इस संकट पर सबसे तीखी प्रतिक्रिया इटली की दक्षिणपंथी प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी (Giorgia Meloni) की ओर से आई है। मेलोनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर सेउटा के दृश्यों को ‘चौंकाने वाला’ बताते हुए स्पेन को यूरोपीय संघ के ‘शेंगेन क्षेत्र’ (Schengen Area – बिना वीजा और पासपोर्ट के मुक्त आवाजाही वाला क्षेत्र) से निलंबित करने तक की मांग कर दी है। मेलोनी ने कहा, “यह घटना साबित करती है कि अनियंत्रित और अवैध प्रवासन यूरोप की बाहरी सीमाओं की सुरक्षा के लिए एक वास्तविक और बड़ा खतरा है। हम अपने नागरिकों और अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए किसी भी हद तक असाधारण कदम उठाने को तैयार हैं।”
क्या 2021 का इतिहास दोहरा रहा है?
सेउटा की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यह और इसका जुड़वां शहर ‘मेलिला’ (Melilla) पूरे अफ्रीका महाद्वीप और यूरोपीय संघ के बीच एकमात्र जमीनी सीमा साझा करते हैं। यही कारण है कि गरीबी, भुखमरी और युद्ध से त्रस्त अफ्रीकी नागरिकों के लिए यह यूरोप का ‘सपनों का दरवाजा’ है।मौजूदा हालात की तुलना मई 2021 के उस भयानक संकट से की जा रही है जब स्पेन और मोरक्को के बीच राजनयिक विवाद के बाद मोरक्को ने सीमा से नजर हटा ली थी और महज दो दिनों में 8,000 से अधिक प्रवासी सेउटा में घुस आए थे। आज एक बार फिर वही स्थिति खड़ी हो गई है। जब तक स्पेन की सेना सीमा पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं पा लेती और मोरक्को के साथ मिलकर मानव तस्करों के नेटवर्क को ध्वस्त नहीं किया जाता, तब तक भूमध्य सागर के इस कोने पर मची यह मानवीय और सुरक्षा की अफ़रा-तफ़री थमने वाली नहीं है।

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