अमेरिका-ईरान की जंग में कितने भारतीयों की हुई मौत? सरकार ने संसद में बताया आंकड़ा

The CSR Journal Magazine
अमेरिका और ईरान के बीच मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध ने कई भारतीय परिवारों को गहरा दुख दिया है। संसद में इस संबंध में जानकारी देते हुए विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि इस संघर्ष में अब तक 16 भारतीयों की जान जा चुकी है। इनमें 10 नाविक और अन्य नागरिक शामिल हैं। यह जानकारी संसद में CPI(M) सांसद जॉन ब्रिटास के सवाल के जवाब में दी गई।

कहाँ हुईं मौतें?

मृतकों की संख्या का आंकड़ा बताते हुए मंत्री ने कहा कि इनमें से एक भारतीय नागरिक सऊदी अरब, दो कुवैत, आठ ओमान, एक इराक और चार यूएई में मारे गए हैं। इसके साथ ही सरकार ने 75 भारतीय नागरिकों के घायल होने की भी जानकारी दी है। ये लोग विभिन्न देशों में घायल हुए, जिनमें 32 यूएई, 24 ओमान, और अन्य मुल्क शामिल हैं।

कतर में हुई दर्दनाक घटना

इसके अलावा, एक अलग घटना में कतर के रास लाफान गैस प्लांट में 12 भारतीयों की मौत हो गई। यह घटना भी संघर्ष की पृष्ठभूमि में हुई। सरकारी मंत्री ने कहा कि हमलों के कारण प्रभावित भारतीय नागरिकों के परिवारों को हर संभव मदद दी गई है ताकि मृतकों के शव जल्द से जल्द भारत लाए जा सकें।

सरकार की मदद का जिक्र

सरकार की ओर से यह भी बताया गया है कि घायल भारतियों का इलाज स्थानीय हॉस्पिटल्स में किया गया। विदेश मंत्रालय ने भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास के कामों का जिक्र करते हुए कहा कि इन संस्थानों ने स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर परिवारों से संपर्क किया और सहारा दिया। समय पर यात्रा के विकल्प और सुरक्षित वापसी की जानकारी भी दी गई।

मुआवजा और सरकारी योजनाएँ

इस संकट के बीच, सरकार ने कहा है कि युद्ध-क्षेत्र की घटनाओं में मारे गए नागरिकों के निकटतम परिवारजनों को 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। DGMA वेलफेयर स्कीम के तहत यह राशि जारी की जाएगी। इस प्रावधान के तहत आवश्यक जांच-पड़ताल के बाद यह मुआवजा जल्द ही वितरित होगा।

भारतीय नागरिकों की संख्या

विदेश मंत्रालय का अनुमान है कि ईरान में लगभग 7000 भारतीय नागरिक हो सकते हैं, जिनमें विद्यार्थी, कामगार और समुद्री कर्मी शामिल हैं। विभिन्न धर्मों के शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों की भी यहाँ एक बड़ी संख्या है। इस स्थिति को देखते हुए सरकार ने अपने संसाधनों का प्रयोग कर हर संभव मदद का आश्वासन दिया है।

जानें आगे क्या होगा?

अब महत्वपूर्ण यह है कि सरकार इस संकट को लेकर क्या कदम उठाएगी और कैसे मिडिल ईस्ट में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। यह गंभीर मुद्दा ना केवल भारत के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है।

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