पाकिस्तान में भी गूंजा ‘Gen Z आंदोलन’: इमरान खान की बहन अलीमा खान ने भारत का दिया उदाहरण, कहा- ‘वहां बच्चों की आवाज़ पर मंत्री ने दिया इस्तीफा’
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री Imran Khan की बहन Aleema Khan ने एक सार्वजनिक रैली के दौरान ऐसा बयान दिया है, जिसकी चर्चा पाकिस्तान के साथ-साथ भारत में भी हो रही है। अलीमा खान ने पाकिस्तान के युवाओं और छात्रों से अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठाने की अपील करते हुए भारत का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि भारत में युवाओं और छात्रों ने अपने अधिकारों के लिए आंदोलन किया, जिसके बाद सरकार को कदम उठाने पड़े और संबंधित मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा, जबकि पाकिस्तान में सत्ता पक्ष जवाबदेही से बच रहा है। अलीमा खान का यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान में राजनीतिक तनाव लगातार बना हुआ है। एक ओर पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान जेल में बंद हैं, वहीं दूसरी ओर उनकी पार्टी के नेताओं और समर्थकों का आरोप है कि सरकार विपक्ष की आवाज़ दबाने का प्रयास कर रही है।
रैली में क्या बोलीं अलीमा खान?
रैली को संबोधित करते हुए अलीमा खान ने कहा, “हिंदुस्तान में देखें कैसे निकले हैं बच्चे। आपके हमसाया मुल्कों में बच्चे अपने हक के लिए सड़कों पर उतरे। उन्होंने अपना अधिकार मांगा और मोदी को उन बच्चों का हक देना पड़ा।” उन्होंने आगे कहा, “भारत में बच्चे खड़े हो गए और अपना हक मांगने लगे। उन पर भी लाठीचार्ज हुआ, लेकिन बाद में माफी मांगी गई कि हमें उन्हें नहीं मारना चाहिए था। वहां मंत्री ने इस्तीफा दिया। यहां इतनी बेशर्मी है कि कोई इस्तीफा तक नहीं देता। यहां चोरी से सरकार बनाई गई है।” अलीमा खान ने यह भी कहा कि इमरान खान पिछले एक वर्ष से जिन मुद्दों को उठा रहे थे, वे अब पाकिस्तान में सच साबित हो रहे हैं।
किस आंदोलन का दिया संदर्भ?
अलीमा खान के बयान में भारत में हाल के छात्र और युवा आंदोलनों का उल्लेख किया गया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता, विशेषकर युवाओं की आवाज़ को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उनके अनुसार यदि सरकार जनता की मांगों को नज़रअंदाज़ करती है तो लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर होती है। हालांकि, उन्होंने जिस घटनाक्रम का उल्लेख किया, उसके संबंध में उन्होंने रैली में कोई विस्तृत विवरण नहीं दिया। उनका मुख्य संदेश यह था कि लोकतंत्र में जनदबाव के कारण सरकारों को जवाबदेह होना पड़ता है।
पाकिस्तान की राजनीति में बढ़ती सक्रियता
इमरान खान के जेल जाने के बाद अलीमा खान लगातार राजनीतिक रूप से सक्रिय दिखाई दे रही हैं। वे देश के अलग-अलग शहरों में सभाएं और रैलियां कर रही हैं तथा पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) समर्थकों से संवाद कर रही हैं। उनके भाषणों में मुख्य रूप से निम्न मुद्दे शामिल रहते हैं—
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इमरान खान की रिहाई
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स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव
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लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली
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न्यायपालिका की स्वतंत्रता
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राजनीतिक कैदियों की रिहाई
इमरान खान की गिरफ्तारी और राजनीतिक संकट
पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान कई मामलों में जेल में बंद हैं। उनके समर्थकों का आरोप है कि उनके खिलाफ दर्ज अधिकांश मामले राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा हैं। दूसरी ओर पाकिस्तान सरकार और जांच एजेंसियों का कहना है कि सभी कार्रवाई कानून के तहत की जा रही है। इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद पाकिस्तान में कई बार बड़े विरोध प्रदर्शन हुए। कई स्थानों पर हिंसा भी देखने को मिली, जिसके बाद बड़ी संख्या में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।
युवाओं को संदेश देने की कोशिश
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अलीमा खान का हालिया भाषण मुख्य रूप से पाकिस्तान के युवाओं और पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं को संबोधित था। उन्होंने अपने भाषण में यह संदेश देने का प्रयास किया कि यदि युवा संगठित होकर लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों की मांग करें तो सरकारों पर दबाव बनाया जा सकता है। भारत का उदाहरण देकर उन्होंने पाकिस्तान के युवाओं से सक्रिय राजनीतिक भागीदारी की अपील की।
सरकार पर तीखा हमला
अपने भाषण में अलीमा खान ने पाकिस्तान की वर्तमान सरकार पर कई आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान सत्ता जनता के जनादेश का प्रतिनिधित्व नहीं करती और इसलिए जनता की समस्याओं के प्रति जवाबदेह भी नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष की आवाज़ दबाने के लिए प्रशासनिक और कानूनी संस्थाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
अलीमा खान के भाषण का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेजी से साझा किया जा रहा है। समर्थक इसे लोकतांत्रिक अधिकारों की आवाज़ बता रहे हैं, जबकि विरोधी इसे राजनीतिक बयानबाज़ी करार दे रहे हैं। भारत का उल्लेख किए जाने के कारण यह वीडियो भारतीय सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
पाकिस्तान में बदलती राजनीति
पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान की राजनीति में युवाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ी है। सोशल मीडिया के विस्तार ने राजनीतिक अभियानों को नई दिशा दी है। इमरान खान की पार्टी ने भी डिजिटल प्लेटफॉर्म का व्यापक उपयोग किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में पाकिस्तान की राजनीति में युवा मतदाता निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे में अलीमा खान का यह बयान केवल सरकार की आलोचना नहीं, बल्कि युवाओं को राजनीतिक रूप से सक्रिय करने की रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है।
क्या पड़ सकता है असर?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार अलीमा खान के इस बयान के कई संभावित प्रभाव हो सकते हैं—
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पाकिस्तान में विपक्ष को नया राजनीतिक मुद्दा मिल सकता है।
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युवाओं के बीच राजनीतिक बहस तेज हो सकती है।
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सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और बढ़ सकता है।
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भारत का उदाहरण दिए जाने से इस बयान की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा हो सकती है।
इमरान खान की बहन ने पाकिस्तान में छेड़ी नई बहस
अलीमा खान का यह बयान पाकिस्तान की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों के बीच आया है और इसे विपक्ष के आक्रामक अभियान का हिस्सा माना जा रहा है। उन्होंने भारत के हालिया छात्र आंदोलनों का उदाहरण देते हुए पाकिस्तान सरकार से जवाबदेही और लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन करने की अपील की। हालांकि, उनके भाषण में किए गए राजनीतिक दावे विपक्ष के आरोप हैं और इन पर सरकार का दृष्टिकोण अलग है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह बयान पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति और युवा वर्ग के बीच किस प्रकार का प्रभाव छोड़ता है।
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