UP ATS की FIR पर ED का देशव्यापी प्रहार, रोहिंग्या सिंडिकेट में हड़कंप

The CSR Journal Magazine

यूपी में ED का बड़ा एक्शन, टेरर फंडिंग और अवैध घुसपैठ के मामले में छापेमारी

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और पश्चिम बंगाल में लगभग 13 परिसरों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों के नेटवर्क से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई है। लखनऊ जोनल ऑफिस ने गुरुवार को चार राज्यों में यह बड़ा अभियान चलाया।

सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई में तेजी

प्रवर्तन निदेशालय (ED) के लखनऊ जोनल ऑफिस ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत उत्तर प्रदेश सहित 5 राज्यों के 13 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर कथित टेरर फंडिंग और रोहिंग्या-बांग्लादेशी नागरिकों के अवैध घुसपैठ सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। केंद्रीय जांच एजेंसी की इस त्वरित कार्रवाई से देश विरोधी नेटवर्क और फर्जी दस्तावेज बनाने वाले गिरोहों में हड़कंप मच गया है। यह मामला पूरी तरह से उत्तर प्रदेश आतंकवाद रोधी दस्ते (UP ATS) द्वारा दर्ज की गई एक प्राथमिकी (FIR) पर आधारित है, जिसमें विदेशी फंडिंग के जरिए भारतीय जनसांख्यिकी (Demography) को बदलने और देश की सुरक्षा को खतरे में डालने का गंभीर ताना-बाना सामने आया था।

देशव्यापी नेटवर्क पर तड़के प्रहार

गुरुवार सुबह लगभग 5:00 बजे ED की टीमों ने स्थानीय पुलिस और सुरक्षा बलों के समन्वय में एक साथ पांच राज्यों उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में छापेमारी शुरू की। लखनऊ जोनल कार्यालय के अधिकारियों के नेतृत्व में चली इस कार्रवाई के दायरे में कई संदिग्ध व्यक्ति, संस्थाएं और तथाकथित चैरिटेबल ट्रस्ट आए हैं। ED के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इस तलाशी अभियान (मामला संख्या ECIR/LKZO/14/2024) का मुख्य उद्देश्य उस वित्तीय चैनल को पूरी तरह से ध्वस्त करना है, जो भारत में अवैध नागरिकों को न सिर्फ प्रवेश करा रहा था बल्कि उन्हें स्थायी रूप से पुनर्वासित करने के लिए अवैध रूप से धन मुहैया करा रहा था।

इन प्रमुख ठिकानों पर हुई छापेमारी

जांच एजेंसी ने उन संवेदनशील ठिकानों को लक्षित किया, जहां इस सिंडिकेट के मुख्य संचालक और डमी बैंक खाते संचालित हो रहे थे।
नई दिल्ली: राजधानी के बाटला हाउस और मदनपुर खादर इलाकों में सघन तलाशी ली गई, जहां ‘सन शाइन हेल्थ एंड सोशल वेल्फेयर सोसाइटी’ जैसी संस्थाएं जांच के दायरे में हैं।
उत्तर प्रदेश: राज्य के सहारनपुर और लखनऊ से जुड़े संदिग्धों के परिसरों पर रेड की गई।
पश्चिम बंगाल: कोलकाता, मुर्शिदाबाद, साउथ 24 परगना और नॉर्थ 24 परगना जिलों में ‘कबीरबाग मिल्लत एकेडमी’ सहित कई ठिकानों पर टीमें पहुंचीं।
महाराष्ट्र व हरियाणा: महाराष्ट्र के रायगढ़ और हरियाणा के संदिग्ध क्षेत्रों में सिंडिकेट के वित्तीय लिंक खंगाले गए।

कैसे काम करता था यह सिंडिकेट

UP ATS और ED की अब तक की संयुक्त पड़ताल में यह तथ्य सामने आया है कि यह एक बेहद संगठित और गहराई तक फैला हुआ सिंडिकेट है। घुसपैठ और मनी लॉन्ड्रिंग के इस पूरे खेल को तीन मुख्य चरणों में अंजाम दिया जाता था।

सीमा पार से अवैध घुसपैठ

यह गिरोह मुख्य रूप से म्यांमार के रोहिंग्या शरणार्थियों और बांग्लादेशी नागरिकों को भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से अवैध रूप से देश की सीमा के भीतर प्रवेश कराता था। इसके लिए सीमावर्ती इलाकों के स्थानीय एजेंटों को मोटी रकम दी जाती थी।

फर्जी भारतीय पहचान पत्र तैयार करना

भारत में घुसपैठ कराने के तुरंत बाद इन विदेशी नागरिकों को देश के विभिन्न राज्यों में छिपाया जाता था। इसके बाद गिरोह के सदस्य उनके फर्जी नाम-पते का उपयोग कर जाली आधार कार्ड, वोटर आईडी, पैन कार्ड और यहां तक कि भारतीय पासपोर्ट भी तैयार करवा देते थे, ताकि वे कानूनी सुरक्षा कवच हासिल कर सकें।

देश के विभिन्न हिस्सों में पुनर्वास

जाली दस्तावेज तैयार होने के बाद इस नेटवर्क से जुड़े लोग इन अवैध प्रवासियों को उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर, महाराष्ट्र और हरियाणा जैसे औद्योगिक व घनी आबादी वाले राज्यों में झुग्गियों या किराए के मकानों में बसा देते थे। इन्हें रोजगार दिलाने और स्थानीय स्तर पर स्थापित करने में भी यह सिंडिकेट मदद करता था।

विदेशी योगदान और चैरिटेबल ट्रस्टों का संदिग्ध खेल

ED की जांच का मुख्य बिंदु इस नेटवर्क में इस्तेमाल होने वाला पैसा है। जांचकर्ताओं को पता चला है कि इस सिंडिकेट को चलाने के लिए कुछ तथाकथित धार्मिक और सामाजिक चैरिटेबल ट्रस्टों को विदेशों से भारी मात्रा में चंदा (Foreign Contribution) मिल रहा था। विदेशी संस्थाओं से मिलने वाले इस चंदे को वैध दिखाने के लिए सामाजिक कल्याण, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का मुखौटा लगाया गया था। वास्तव में यह पैसा भारत विरोधी गतिविधियों और अवैध घुसपैठ को बढ़ावा देने के लिए डायवर्ट किया जा रहा था।

अलग-अलग अकाउंट्स में ट्रांसफर

जांच एजेंसी ने वित्तीय लेन-देन की परतों को खोलने पर पाया कि इस अवैध धन को सीधे मुख्य खातों में न रखकर कई चरणों में ट्रांसफर (Layered Transactions) किया जाता था। इसके लिए बड़े पैमाने पर म्यूल अकाउंट्स (दूसरों के नाम पर या गरीब लोगों को बरगलाकर खोले गए बैंक खाते) का इस्तेमाल किया जा रहा था। इन खातों से छोटी-छोटी रकम डिजिटल माध्यम से संदिग्ध लाभार्थियों को भेजी जाती थी या फिर भारी मात्रा में कैश विड्रॉल (नकद निकासी) कर सीधे एजेंटों तक पहुंचाया जाता था ताकि किसी भी एजेंसी की नजर में कोई बड़ा ट्रांजैक्शन न आए।

राष्ट्रीय सुरक्षा पर गहरा आघात

सुरक्षा विशेषज्ञों और केंद्रीय अधिकारियों के मुताबिक, यह सिर्फ अवैध अप्रवासन का मामला नहीं है, बल्कि देश की संप्रभुता और सुरक्षा के साथ सीधा खिलवाड़ है। भारत के सीमावर्ती जिलों और बड़े शहरों की जनसांख्यिकी को सोची-समझी साजिश के तहत बदला जा रहा है। फर्जी दस्तावेजों के सहारे भारतीय नागरिक बने इन संदिग्धों का इस्तेमाल भविष्य में किसी भी प्रकार की राष्ट्रविरोधी या स्लीपर सेल गतिविधियों के लिए किए जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता, यही कारण है कि इसे टेरर फंडिंग के कोण से जोड़कर इतनी बड़ी कार्रवाई की गई है।

आगामी कदम और जांच का दायरा

गुरुवार को हुई इस छापामारी के दौरान ED ने संदिग्ध परिसरों से भारी मात्रा में आपत्तिजनक दस्तावेज, जाली सरकारी मुहरें, फर्जी पहचान पत्र बनाने वाले उपकरण, डिजिटल डिवाइस (मोबाइल, लैपटॉप, हार्ड डिस्क) और वित्तीय डायरियां जब्त की हैं। इसके अलावा कई संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। एजेंसी अब इन डिजिटल उपकरणों के फॉरेंसिक विश्लेषण और जब्त दस्तावेजों के मिलान के जरिए मुख्य सरगनाओं और विदेशों में बैठे उनके आकाओं तक पहुंचने की तैयारी में है।

अवैध नेटवर्क पर ED की मार

आने वाले दिनों में इस सिंडिकेट से जुड़े कई सफेदपोशों और ट्रस्ट के संचालकों की गिरफ्तारी होना तय माना जा रहा है। प्रवर्तन निदेशालय की इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि देश की सुरक्षा को ताक पर रखकर चलाए जा रहे किसी भी अवैध वित्तीय नेटवर्क को बख्शा नहीं जाएगा और मनी लॉन्ड्रिंग के इस गहरे जाल की आखिरी कड़ी को कानून के शिकंजे में लाया जाएगा।

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