स्वच्छ तटों से सुरक्षित समुद्र तक: स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर 5.0 अभियान का नया अध्याय

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स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर 5.0’ की शुरुआत जल्द: स्वच्छ तट, स्वस्थ महासागर और सशक्त भविष्य की दिशा में देशव्यापी अभियान

भारत सरकार समुद्री पर्यावरण संरक्षण और तटीय क्षेत्रों की स्वच्छता को जनआंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से ‘स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर 5.0’ (Swachh Sagar Surakshit Sagar 5.0) अभियान का नया चरण शुरू करने जा रही है। अभियान का संदेश है—“A Cleaner Coastline. A Healthier Ocean. A Stronger Future.” यानी स्वच्छ तट, स्वस्थ महासागर और मजबूत भविष्य। केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) ने इस अभियान की घोषणा करते हुए देशवासियों से इसमें बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की है। सोशल मीडिया पर जारी संदेश में कहा गया है कि यह केवल सफाई अभियान नहीं, बल्कि समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र (Marine Ecosystem) के संरक्षण, तटीय जैव विविधता की रक्षा और सामूहिक जनभागीदारी का राष्ट्रीय आंदोलन है।

क्या है ‘स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर’ अभियान?

‘स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर’ अभियान भारत सरकार की एक राष्ट्रीय पहल है, जिसकी शुरुआत समुद्री तटों पर प्लास्टिक और अन्य कचरे को हटाने, समुद्री प्रदूषण कम करने तथा नागरिकों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से की गई थी। यह अभियान पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) के नेतृत्व में विभिन्न मंत्रालयों, राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, भारतीय तटरक्षक बल, नौसेना, एनसीसी, एनएसएस, नेहरू युवा केंद्र, शैक्षणिक संस्थानों, स्वयंसेवी संगठनों, स्थानीय निकायों तथा लाखों स्वयंसेवकों के सहयोग से संचालित होता है।

5.0 अभियान में क्या होगा खास?

‘स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर 5.0’ के तहत केवल समुद्र तटों की सफाई ही नहीं, बल्कि समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को दीर्घकालिक रूप से सुरक्षित बनाने पर विशेष जोर दिया जाएगा। अभियान के प्रमुख उद्देश्य होंगे—
  • समुद्र तटों पर प्लास्टिक एवं अन्य ठोस कचरे की सफाई।
  • सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग को कम करने के लिए जनजागरूकता।
  • समुद्री जीव-जंतुओं एवं जैव विविधता का संरक्षण।
  • मैंग्रोव, कोरल रीफ और तटीय वनस्पतियों की सुरक्षा।
  • स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाना।
  • युवाओं, विद्यार्थियों और स्वयंसेवी संस्थाओं को अभियान से जोड़ना।
  • समुद्री प्रदूषण के प्रति वैज्ञानिक जागरूकता बढ़ाना।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं समुद्री तट?

भारत की लगभग 7,500 किलोमीटर लंबी तटीय रेखा देश की आर्थिक, पर्यावरणीय और सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत के तटीय क्षेत्रों में 9 समुद्री राज्य, 4 केंद्र शासित प्रदेश, सैकड़ों मछुआरा समुदाय, अनेक बंदरगाह, पर्यटन स्थल, मैंग्रोव वन और समुद्री जीवों के प्राकृतिक आवास मौजूद हैं। यदि समुद्र तट प्रदूषित होते हैं तो इसका सीधा असर समुद्री जैव विविधता, मत्स्य उद्योग, पर्यटन, जलवायु संतुलन और स्थानीय आजीविका पर पड़ता है।

समुद्री प्रदूषण क्यों बन रहा है बड़ी चुनौती?

विशेषज्ञों के अनुसार समुद्र में पहुंचने वाले कचरे का बड़ा हिस्सा प्लास्टिक का होता है। प्लास्टिक की बोतलें, थैलियां, पैकेजिंग सामग्री, मछली पकड़ने के जाल, थर्मोकोल और अन्य अपशिष्ट समुद्री जीवों के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं। समुद्री कछुए, डॉल्फिन, व्हेल, समुद्री पक्षी और अनेक मछलियां प्लास्टिक निगलने या उसमें फंसने के कारण प्रभावित होती हैं। इसके अलावा माइक्रोप्लास्टिक अब खाद्य श्रृंखला (Food Chain) तक पहुंच चुका है, जिससे मानव स्वास्थ्य पर भी दीर्घकालिक प्रभाव पड़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है।

जनभागीदारी होगी अभियान की सबसे बड़ी ताकत

सरकार का मानना है कि केवल सरकारी प्रयासों से समुद्री प्रदूषण की समस्या का समाधान संभव नहीं है। इसीलिए इस अभियान में आम नागरिकों की भागीदारी को सबसे अधिक महत्व दिया गया है। अभियान के दौरान स्कूल एवं कॉलेज, NCC, NSS, युवा संगठन, स्वयंसेवी संस्थाएं, मछुआरा समुदाय, उद्योग जगत, पर्यावरण प्रेमी और स्थानीय प्रशासन, सभी मिलकर समुद्र तटों की सफाई करेंगे।

स्वच्छ भारत मिशन से भी जुड़ा है अभियान

‘स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर’ अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए स्वच्छ भारत मिशन की भावना को समुद्री क्षेत्रों तक विस्तार देता है। इसका उद्देश्य केवल सफाई करना नहीं बल्कि लोगों की जीवनशैली में ऐसा बदलाव लाना है जिससे समुद्र में कचरा पहुंचने की समस्या ही कम हो जाए।

जलवायु परिवर्तन से मुकाबले में भी महत्वपूर्ण पहल

विशेषज्ञों का कहना है कि स्वस्थ समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मैंग्रोव वन कार्बन अवशोषित करते हैं, समुद्री घास (Seagrass) जलवायु संतुलन बनाए रखने में मदद करती है तथा कोरल रीफ समुद्री जैव विविधता की रक्षा करती हैं। यदि समुद्री प्रदूषण कम होगा तो समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र अधिक मजबूत होगा।

‘हर सफाई महत्वपूर्ण है’-यही है अभियान का संदेश

अभियान का प्रमुख संदेश है- “Every Clean-Up Counts” यानी हर छोटी सफाई भी बड़ा बदलाव लासकती है। सरकार चाहती है कि नागरिक केवल अभियान के दौरान ही नहीं बल्कि पूरे वर्ष समुद्र तटों को स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी निभाएं।

सोशल मीडिया के माध्यम से भी बढ़ेगी जागरूकता

अभियान के दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
लोगों से अपील की जाएगी कि वे—
  • प्लास्टिक का कम उपयोग करें,
  • समुद्र तटों पर कचरा न फैलाएं,
  • सफाई अभियानों में स्वयंसेवक बनें,
  • पर्यावरण संरक्षण का संदेश दूसरों तक पहुंचाएं।

विशेषज्ञों की राय

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार समुद्री प्रदूषण आज पूरी दुनिया के सामने सबसे बड़ी पर्यावरणीय चुनौतियों में से एक है। भारत जैसे विशाल समुद्री तट वाले देश के लिए ऐसे अभियान केवल सफाई कार्यक्रम नहीं बल्कि समुद्री संसाधनों, जैव विविधता, मत्स्य उद्योग और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

पर्यावरण संरक्षण का राष्ट्रीय संकल्प

‘स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर 5.0’ केवल एक सरकारी अभियान नहीं बल्कि नागरिक जिम्मेदारी और पर्यावरण संरक्षण का राष्ट्रीय संकल्प है। यदि सरकार, स्थानीय प्रशासन, वैज्ञानिक संस्थान, स्वयंसेवी संगठन और आम नागरिक मिलकर इस पहल को जनआंदोलन का रूप दें, तो भारत के समुद्री तट अधिक स्वच्छ, समुद्री पारिस्थितिकी अधिक सुरक्षित और आने वाली पीढ़ियों के लिए महासागर अधिक स्वस्थ बन सकते हैं। अभियान का संदेश स्पष्ट है—“स्वच्छ तट, सुरक्षित सागर और सशक्त भविष्य की शुरुआत हर नागरिक की छोटी-सी भागीदारी से होती है।”
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