स्वच्छ भारत मिशन-शहरी, आंकड़े कह रहे बदलाव की कहानी 

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‘तब और अब’ के आंकड़े बता रहे हैं बदलाव की नई कहानी, कचरे से संसाधन बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा भारत

भारत के शहरों में स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट (Solid Waste) प्रबंधन के क्षेत्र में पिछले एक दशक में उल्लेखनीय परिवर्तन देखने को मिला है। वर्ष 2014 में जहां अधिकांश शहर खुले में कचरे के ढेर, अपर्याप्त सार्वजनिक शौचालयों, अव्यवस्थित कचरा संग्रहण और वैज्ञानिक प्रसंस्करण की कमी जैसी समस्याओं से जूझ रहे थे, वहीं आज स्थिति तेजी से बदल रही है। स्वच्छ भारत मिशन-शहरी (Swachh Bharat Mission-Urban) और स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के माध्यम से आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) देश को “गार्बेज फ्री सिटी” (Garbage Free City) बनाने के लक्ष्य की दिशा में कार्य कर रहा है। सरकार द्वारा जारी आंकड़े बताते हैं कि स्वच्छता अब केवल सरकारी अभियान नहीं रह गई है, बल्कि इसे जनभागीदारी और जीवनशैली का हिस्सा बनाने का प्रयास किया जा रहा है। यही कारण है कि “स्वच्छता ही सेवा” जैसे अभियान नागरिकों को सीधे इस मिशन से जोड़ रहे हैं।

2014 से पहले की स्थिति

स्वच्छ भारत मिशन शुरू होने से पहले देश के अनेक शहरों में घर-घर कचरा संग्रहण की व्यवस्था सीमित थी। अधिकांश नगर निकायों में कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण नहीं हो पाता था और बड़ी मात्रा में मिश्रित कचरा सीधे डंपिंग ग्राउंड में पहुंच जाता था। सार्वजनिक शौचालयों की कमी के कारण स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित होती थी तथा कई क्षेत्रों में खुले में शौच की समस्या भी बनी हुई थी। कचरे का पृथक्करण (Segregation) लगभग नगण्य था, जिसके कारण पुनर्चक्रण (Recycling) और कम्पोस्टिंग की संभावनाएं भी सीमित थीं।

स्वच्छ भारत मिशन-शहरी से आया बड़ा बदलाव

2 अक्टूबर 2014 को शुरू हुए स्वच्छ भारत मिशन ने शहरी भारत में स्वच्छता को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया। पहले चरण में व्यक्तिगत घरेलू शौचालयों, सामुदायिक शौचालयों तथा सार्वजनिक शौचालयों के निर्माण पर विशेष बल दिया गया। इसके साथ ही नगर निकायों को घर-घर कचरा संग्रहण, स्रोत पर कचरे के पृथक्करण और वैज्ञानिक प्रसंस्करण की दिशा में कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार मिशन के तहत निर्धारित लक्ष्य से अधिक 63 लाख से अधिक व्यक्तिगत घरेलू शौचालयों का निर्माण किया गया, जिससे शहरी क्षेत्रों में खुले में शौच की समस्या में उल्लेखनीय कमी आई।

स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 का नया लक्ष्य

वर्ष 2021 से प्रारंभ हुए स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 का उद्देश्य केवल स्वच्छ शहर बनाना नहीं, बल्कि पूरी तरह “गार्बेज फ्री सिटी” तैयार करना है। इसके अंतर्गत प्रमुख लक्ष्य हैं—
  • प्रत्येक घर से स्रोत पर कचरे का पृथक्करण।
  • 100 प्रतिशत डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण।
  • गीले और सूखे कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन।
  • सिंगल यूज प्लास्टिक में कमी।
  • निर्माण एवं विध्वंस (C&D) कचरे का पुनर्चक्रण।
  • सीवेज और फीकल स्लज का सुरक्षित प्रबंधन।
  • शहरों को ODF+, ODF++ और Water+ मानकों तक पहुंचाना।

कचरे के प्रबंधन में आई बड़ी प्रगति

पिछले वर्षों में नगर निकायों ने घर-घर कचरा संग्रहण व्यवस्था का व्यापक विस्तार किया है। अब अधिकांश शहरों में नियमित रूप से कचरा एकत्र किया जा रहा है। साथ ही कचरे के वैज्ञानिक प्रसंस्करण में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जहां वर्ष 2014 में शहरी कचरे का सीमित हिस्सा ही प्रोसेस किया जाता था, वहीं अब प्रसंस्करण क्षमता कई गुना बढ़ चुकी है। कई शहर कम्पोस्ट, बायोगैस, रीसाइक्लिंग तथा वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजनाओं के माध्यम से कचरे को संसाधन में बदल रहे हैं।

तकनीक का बढ़ा उपयोग

आज अधिकांश नगर निकाय डिजिटल तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं। GPS आधारित कचरा संग्रहण वाहन, QR कोड आधारित निगरानी, ऑनलाइन शिकायत निवारण, मोबाइल ऐप तथा रियल टाइम मॉनिटरिंग जैसी व्यवस्थाओं ने पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाई है। कई शहरों में नागरिक मोबाइल ऐप के माध्यम से गंदगी की शिकायत दर्ज करा सकते हैं और उसकी निगरानी भी कर सकते हैं।

स्वच्छ सर्वेक्षण से बढ़ी प्रतिस्पर्धा

स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत आयोजित स्वच्छ सर्वेक्षण ने शहरों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दिया है। अब नगर निकाय केवल सफाई तक सीमित नहीं हैं, बल्कि नागरिक सहभागिता, नवाचार, अपशिष्ट प्रबंधन, हरित क्षेत्रों के विकास और सार्वजनिक सुविधाओं के आधार पर भी मूल्यांकन किया जाता है। इसी प्रतिस्पर्धा के कारण अनेक शहरों ने अपनी सफाई व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार किए हैं।

जनभागीदारी बनी सबसे बड़ी ताकत

सरकार का मानना है कि केवल सरकारी प्रयासों से शहरों को स्वच्छ नहीं बनाया जा सकता। इसलिए नागरिकों की भागीदारी पर विशेष जोर दिया जा रहा है। स्कूलों, कॉलेजों, स्वयंसेवी संस्थाओं, महिला समूहों, आवासीय समितियों तथा युवाओं को स्वच्छता अभियानों से जोड़ा जा रहा है। “स्वच्छता ही सेवा”, प्लास्टिक मुक्त अभियान, स्वच्छ बाजार अभियान, जलाशयों की सफाई और वृक्षारोपण जैसी गतिविधियों में नागरिकों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है।

नई चुनौतियां भी सामने

हालांकि उल्लेखनीय प्रगति के बावजूद कई चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। तेजी से बढ़ती शहरी आबादी, प्रतिदिन बढ़ता ठोस कचरा, प्लास्टिक अपशिष्ट, ई-कचरा तथा निर्माण एवं विध्वंस कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन अभी भी नगर निकायों के लिए बड़ी चुनौती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रत्येक नागरिक घर पर ही गीले और सूखे कचरे को अलग करना शुरू कर दे तो कचरा प्रबंधन की लागत कम होगी और पुनर्चक्रण की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।

भविष्य की दिशा

सरकार अब सर्कुलर इकोनॉमी (Circular Economy), जीरो वेस्ट मॉडल, कार्बन उत्सर्जन में कमी तथा सतत शहरी विकास को ध्यान में रखते हुए स्वच्छ भारत मिशन को आगे बढ़ा रही है। वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन, आधुनिक प्रसंस्करण संयंत्र, डिजिटल निगरानी और जनभागीदारी के माध्यम से भारत के शहरों को स्वच्छ, स्वस्थ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

स्वच्छ भारत मिशन में बढ़ाएं हाथ

स्वच्छ भारत मिशन-शहरी ने भारत के शहरी स्वच्छता परिदृश्य में महत्वपूर्ण परिवर्तन लाया है। खुले में शौच से मुक्ति, सार्वजनिक शौचालयों का विस्तार, घर-घर कचरा संग्रहण, वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन और नागरिक सहभागिता ने शहरों को नई दिशा दी है। अब अगला लक्ष्य केवल स्वच्छ शहर नहीं, बल्कि ऐसे शहर बनाना है जहां कचरा भी संसाधन बने और स्वच्छता प्रत्येक नागरिक की आदत एवं संस्कृति का हिस्सा बन जाए।
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