जूस के पैक में वोदका! क्या बच्चों की पहुंच में आ गई शराब? सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने 20 मई 2026 को एक अहम याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के आबकारी विभागों से जवाब मांगा है। इस याचिका में टेट्रा पैक (Tetra Pack), सैशे और पाउच जैसे आसानी से न पहचाने जाने वाले कंटेनरों में शराब की बिक्री पर तुरंत देशव्यापी रोक लगाने की मांग की गई है।यह आदेश चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने गैर-सरकारी संगठन (NGO) ‘कम्युनिटी अगेंस्ट ड्रंकन ड्राइविंग’ (CADD) द्वारा दायर जनहित याचिका पर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट में शुरू हुई कानूनी लड़ाई
सुप्रीम कोर्ट में शराब की टेट्रा पैक और पाउच पैकेजिंग पर प्रतिबंध की मांग को लेकर जनहित याचिका दाखिल की गई है। याचिका में जूस जैसी पैकेजिंग से होने वाले भ्रम और युवाओं पर खतरे का जिक्र किया गया है। चीफ जस्टिस की बेंच ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।
क्या वाकई टेट्रा पैक में शराब की बिक्री बंद होगी?
इस मामले में चौकाने वाली बात यह है कि टेट्रा पैक में बिकने वाली शराब को लेकर अब देश की शीर्ष अदालत में कानूनी लड़ाई चल रही है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की बेंच ने इस मुद्दे पर सुनवाई के लिए सहमति दी है और केंद्र सरकार को नोटिस जारी करके जवाब मांगा है।
जूस और शराब का खतरनाक भ्रम
इस समस्या की शुरुआत एक सामाजिक संगठन ‘कम्युनिटी अगेंस्ट ड्रंकन ड्राइविंग’ की याचिका से हुई है। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में आरोप लगाया कि कंपनिया intentionally फलों के जूस और शराब की पैकेजिंग में एक खतरनाक confusion पैदा कर रही हैं। याचिकाकर्ता के वकील विपिन नायर ने कोर्ट को बताया कि कुछ ब्रांड “चिली मैंगो वोदका” या “एप्पल थ्रिल” जैसे नामों से शराब बेच रहे हैं। इनके पैकेट पर सेब और आम जैसे फलों की रंग-बिरंगी तस्वीरें होती हैं, जो बिल्कुल बच्चों के फ्रूट जूस बॉक्स जैसी दिखती हैं।
नाबालिगों के लिए आसान पहुंच
कोर्ट में दलील दी गई कि इस तरह के हल्के और छोटे पैक को स्कूल बैग या जेबों में आसानी से छुपाया जा सकता है। इससे कम उम्र के बच्चों (नाबालिगों) द्वारा शराब का सेवन करने का खतरा काफी बढ़ गया है। आसानी से ले जाने योग्य (Portable) होने के कारण लोग इसे चलती गाड़ियों, पार्कों और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास छिपाकर पी रहे हैं। साथ ही, इसके टूटने का डर न होने से राज्यों की सीमाओं के पार तस्करी भी आसान हो गई है।
कंपनियों की चालाकी और दुष्प्रभाव
याचिकाकर्ता ने बताया कि कंपनियां टेट्रा पैक पर सेब जैसी तस्वीरें लगा रही हैं, जबकि भीतर वोदका जैसी शराब भरी होती है। इससे बच्चे आसानी से धोखे में आ सकते हैं। वकील विपिन नायर ने कहा कि यह बेजा पैकेजिंग बच्चों को भ्रमित कर रही है।
आबकारी नियमों में खामियां
अब सवाल यह उठता है कि शराब कंपनियां ऐसा कैसे कर पा रही हैं? याचिका में कहा गया है कि भारत के एक्साइज कानूनों में ‘बोतल’ शब्द की कोई स्पष्ट परिभाषा नहीं है, जिसका फायदा उठाकर कंपनियां टेट्रा पैक और छोटे पाउच में शराब भर रही हैं। इस स्थिति में कानून में सुधार की जरुरत है। याचिका में कहा गया कि सिगरेट या तंबाकू के पैकेटों की तरह इन भ्रामक टेट्रा पैकों पर कोई स्पष्ट स्वास्थ्य चेतावनी भी नहीं छपी होती है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि राज्य सरकारें जनता और युवाओं के स्वास्थ्य की कीमत पर सिर्फ अपना राजस्व (Excise Revenue) बढ़ाने के लिए ऐसी भ्रामक पैकेजिंग को मंजूरी दे रही हैं।
सख्त कदम उठाने की मांग
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि टेट्रा पैक और छोटे पाउचों में शराब की बिक्री पर तुरंत प्रतिबंध लगाया जाए। साथ ही, सभी राज्यों के लिए एक समान नीति बनाने की भी मांग की गई है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि शराब केवल पारंपरिक कांच की बोतलों में बेची जाए। याचिककर्ता ने मांग की, कि केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाए कि वह सभी राज्यों के लिए एक समान नीति बनाए और टेट्रा पैक/पाउच में शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाए। सभी राज्यों के आबकारी कानूनों में संशोधन करके ‘बॉटलिंग’ (Bottling) की परिभाषा को केवल कांच की बोतलों या स्पष्ट रूप से अलग दिखने वाले पारदर्शी कंटेनरों तक ही सीमित किया जाए। डिस्पोजेबल मल्टी-लेयर प्लास्टिक और टेट्रा पैक से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान पर भी रोक लगाई जाए क्योंकि इन्हें रीसायकल करना बेहद मुश्किल होता है
कानूनी लड़ाई का भविष्य
सुप्रीम कोर्ट का इस मामले में सुनवाई के लिए तैयार होना यह दर्शाता है कि न्यायपालिका इस खतरे को गंभीरता से ले रही है। इससे पहले नवंबर 2025 में भी एक अन्य मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने टेट्रा पैक में बिकने वाली शराब को लेकर गहरी चिंता जताई थी। अब इस मामले में केंद्र और राज्यों के जवाब दाखिल होने के बाद आगे की रूपरेखा तय होगी। यह देखा जाना बाकी है कि केंद्र सरकार इस पर क्या जवाब देती है और देश में टेट्रा पैक वाले शराब ब्रांडों पर आगे क्या कार्रवाई होती है।
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