NCRB रिपोर्ट का खुलासा: भारत में पत्नियों के हाथों पतियों की हत्या के चौंकाने वाले आंकड़े

The CSR Journal Magazine

हर साल 200 से ज्यादा पत्नियों के हाथों होती हैं हत्याएं, प्रेम संबंध बनता है मुख्य वजह

भारत में हर साल 200 से अधिक पतियों की हत्या उनकी पत्नियों द्वारा की जाती है, और इन मामलों में प्रेम संबंध (अवैध संबंध) एक प्रमुख वजह बनकर सामने आते हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) और विभिन्न सामाजिक अध्ययनों के आंकड़े इस गंभीर सामाजिक समस्या की पुष्टि करते हैं।

पुणे में केतन अग्रवाल का हत्याकांड ने बढ़ाई चिंताएं

पुणे का केतन अग्रवाल हत्याकांड समाज में एक बड़ी चर्चा का विषय बन गया है। इस घटना ने लोगों को आईने के सामने लाकर खड़ा कर दिया है, जहाँ प्रेम संबंध और धोखा सीधा हत्या का रूप ले रहे हैं। केतन अग्रवाल की हत्या 18 जून को लोहागढ़ किले से गिरने के कारण हुई, जिसे पुलिस ने एक सुनियोजित साजिश मान लिया है। जांच में पता चला है कि केतन की मंगेतर सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी ने इस हत्या को अंजाम दिया। ऐसे मामले जो पहले भी हमारे सामने आए हैं, अब फिर से चर्चा का विषय बन रहे हैं।

प्रेम संबंध में छुपे खतरनाक खेल

केतन अग्रवाल की पहले से ही सगाई हो चुकी थी, और शादी की तैयारियाँ चल रही थीं। लेकिन सिया ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर केतन को मारने का पक्का इरादा बना लिया था। सिया ने इस काम के लिए कई बार योजना बनाई लेकिन हर बार असफल रही। अंततः, उसने अपने जन्मदिन की पार्टी को एक बहाने के रूप में इस्तेमाल किया और पूरे मामले को अंजाम दिया।

बहन को हुआ शक, खुला मामला

केतन की बहन को सिया पर शक हुआ, जब सिया के कुछ जवाब संदिग्ध लगे। जिसके चलते उसने पुलिस से शिकायत की और जांच की दिशा बदल गई। पुलिस ने सिया की कॉल डिटेल और लोहागढ़ किले का सीसीटीवी फुटेज खंगाला, जिसमें सब कुछ सामने आ गया।

हत्याओं का डेटा, एक खतरनाक सच

रिसर्च में सामने आया है कि 2022 से 2025 के बीच भारत में लगभग 270 से 300 पतियों की हत्या हुई है, जिसका मुख्य कारण एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर, प्रेमियों के साथ साजिश, और घरेलू झगड़े रहे हैं। इन आंकड़ों को लेकर अभी कोई सरकारी पुष्टि नहीं है, लेकिन मीडिया के माध्यम से यह जानकारी आई है।

कब-कब हुई सजा?

राजा रघुवंशी का मामला इस प्रकार के हत्याओं का एक उदाहरण है, जिसमें उसकी पत्नी ने प्रेमी के साथ मिलकर हत्या करवाई। इसी तरह मेरठ का नीला ड्रम केस, मुंबई का रईस शेख मर्डर केस और धार मर्डर केस जैसे कई मामले हैं, जहाँ प्रेमी-प्रेमिकाओं ने अपने जीवनसाथियों की हत्या की। इन मामलों में से कई की सुनवाई चल रही है, जबकि कई आरोपियों को जमानत मिली है।

मुख्य तथ्य और हत्याओं का आंकड़ा

मीडिया रिपोर्ट्स के विश्लेषण के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में हर साल औसतन 220 से 275 पतियों की हत्या उनकी पत्नियों द्वारा की गई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 5 वर्षों में ऐसी 785 घटनाएं सामने आई हैं। भारत में होने वाली कुल हत्याओं में ‘प्रेम संबंध या अवैध संबंध’ तीसरा सबसे बड़ा कारण है। देश में होने वाले कुल मर्डर में से लगभग 10% मामलों की वजह यही होती है। साल 2010 के आसपास प्रेम संबंधों के कारण होने वाली हत्याएं कुल मामलों का 7% से 8% थीं, जो हाल के वर्षों में बढ़कर 10% से 11% तक पहुंच गई हैं।

हत्याओं के मुख्य कारण

पत्नियों या उनके साथियों द्वारा पतियों की हत्या के पीछे केवल प्रेम संबंध ही नहीं, बल्कि कुछ अन्य जटिल कारण भी होते हैं।
अवैध संबंध (Extramarital Affairs): विवाह के बाद किसी अन्य व्यक्ति से प्रेम संबंध होने पर, रास्ते से हटाने के इरादे से प्रेमी के साथ मिलकर पति की हत्या की साजिश रची जाती है।
घरेलू हिंसा का प्रतिशोध: कई कानूनी और समाजशास्त्रीय अध्ययनों (SSRN Legal Analysis) से पता चलता है कि कुछ मामलों में पत्नियां लंबे समय से हो रहे शारीरिक, मानसिक या गंभीर घरेलू शोषण से तंग आकर आत्मरक्षा या गुस्से में ऐसा कदम उठाती हैं।
वित्तीय और संपत्ति विवाद: पति की संपत्ति, बीमा राशि या पारिवारिक विरासत पर नियंत्रण पाने की चाहत भी कई बार सुनियोजित हत्या (Premeditated Murder) की वजह बनती है।

घटनाएं और साजिशें

इन सभी मामलों को जोड़कर देखने पर एक ही बात सामने आती है कि प्रेम संबंधों में विश्वास और धोखे का खेल इतना खतरनाक हो सकता है कि जीवन का अंत हो सकता है। समाज में ऐसे मुद्दों पर अब खुलकर चर्चा होने लगी है, जिससे ख़तरे और बढ़ गए हैं।

कैसे बदलेंगे हालात

हालांकि अब कुछ मामलों में आरोपियों को सजा का सामना करना पड़ रहा है, लेक‍िन मुख्य सवाल यह है कि ऐसी घटनाओं को कैसे रोका जा सकता है? क्या समाज में जागरूकता बढ़ाने और रिश्तों में सम्मान लाने की आवश्यकता है? ये सभी सवाल वर्तमान में अत्यंत प्रासंगिक हैं। आने वाले समय में क्या बदलाव होंगे, यह देखना दिलचस्प होगा। यह स्थिति दर्शाती है कि वैवाहिक जीवन में बढ़ता अविश्वास, संवाद की कमी और नैतिक मूल्यों का ह्रास गंभीर अपराधों को जन्म दे रहा है। समाजशास्त्रियों का मानना है कि टूटते रिश्तों को हिंसा के बजाय कानूनी अलगाव (तलाक) या काउंसिलिंग के जरिए सुलझाया जाना चाहिए।

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