सिद्धिविनायक मंदिर में QR कोड से लेकर फंड ट्रांसफर तक; एकनाथ शिंदे ने खोला MNS की पुरानी शिकायतों का पन्ना

The CSR Journal Magazine

सिद्धिविनायक दानपेटी लूट की जांच क्यों नहीं? एकनाथ शिंदे का विपक्ष पर हमला

महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र में अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में हुई कथित वित्तीय हेराफेरी का मुद्दा गरमाने के बाद उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे (UBT) गुट पर तीखा और सनसनीखेज पलटवार किया है। विपक्ष द्वारा राम मंदिर के चंदे की चोरी को लेकर महायुति सरकार पर लगातार किए जा रहे हमलों के बीच, शिंदे ने सदन के पटल पर खड़े होकर देश के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक, मुंबई के श्री सिद्धिविनायक मंदिर की दानपेटी से जुड़े पुराने कुप्रबंधन का पन्ना खोल दिया है। शिंदे ने सीधे शब्दों में आरोप लगाया कि जब राज्य में महाविकास अघाड़ी (MVA) की सरकार थी, तब बप्पा की दानपेटी पर डल्ला मारने का पाप किया गया था, लेकिन उस दौरान विपक्ष ने कोई जांच क्यों नहीं बैठाई?

सदन में शिंदे का आक्रामक रुख और सबूतों की फाइल

मानसून सत्र की कार्यवाही के दौरान विपक्ष ने राम मंदिर के पैसों की सुरक्षा पर सवाल उठाए थे, जिसके जवाब में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने आक्रामक मुद्रा अपना ली। शिंदे ने हाथों में दस्तावेजों की फाइल लहराते हुए विपक्ष को ‘चयनात्मक आक्रोश’ (सिलेक्टिव आउटरेज) बंद करने की चेतावनी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अयोध्या राम मंदिर में जो भी घटना हुई है, वह बेहद निंदनीय है और देश के करोड़ों राम भक्तों की आस्था को ठेस पहुंची है। हालांकि, उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विशेष जांच दल (SIT) निष्पक्ष काम कर रहा है और आरोपियों के बैंक खाते फ्रीज कर उन्हें सलाखों के पीछे भेजा जा रहा है। लेकिन इसी के साथ उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और संजय राउत का नाम लिए बिना उन पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया।

सिद्धिविनायक मंदिर की दानपेटी लूट का आरोप

डिप्टी सीएम ने साल 2019 से 2022 के बीच रही महाविकास अघाड़ी सरकार के कार्यकाल को आड़े हाथों लिया। शिंदे ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के नेताओं द्वारा पूर्व में की गई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस और शिकायतों का संदर्भ दिया। शिंदे के अनुसार, तत्कालीन सरकार के समय सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के चढ़ावे और दानपेटी के पैसों के आवंटन में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं और कुप्रबंधन देखने को मिला था। उन्होंने सवाल दागा, “जब सिद्धिविनायक मंदिर की दानपेटी में हेराफेरी की बातें सामने आई थीं, तब आपने उसके लिए कोई जांच समिति क्यों नहीं गठित की? बप्पा के खजाने के साथ हुए उस खिलवाड़ पर आपकी बोलती क्यों बंद थी?”

असली हिंदुत्व पर गरमाई महाराष्ट्र की राजनीति

इस तीखी बहस के बाद महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में एक बार फिर ‘असली हिंदुत्व‘ और मंदिरों के पैसों के रख-रखाव को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। शिंदे गुट और भाजपा (महायुति) का दावा है कि विपक्ष केवल राजनीतिक लाभ के लिए राम मंदिर के मुद्दे को तूल दे रहा है, जबकि उनके अपने शासनकाल में स्थानीय हिंदू मंदिरों के कोष सुरक्षित नहीं थे। दूसरी ओर, उद्धव गुट (UBT) ने इन आरोपों को मुख्य मुद्दे से ध्यान भटकाने की साजिश करार दिया है। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आस्था और भ्रष्टाचार के इन मुद्दों ने पूरे सूबे की राजनीति में भूचाल ला दिया है।

शिंदे ने उखड़े गड़े मुर्दे

मुंबई के सुप्रसिद्ध श्री सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट में कुप्रबंधन और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) समय-समय पर काफी आक्रामक रही है। हाल ही में विधानसभा में एकनाथ शिंदे ने मनसे नेता नितिन सरदेसाई और नितिन किलेदार की पुरानी प्रेस कॉन्फ्रेंस और मोर्चों का जो हवाला दिया, वह मुख्य रूप से साल 2020 से 2022 के बीच महाविकास अघाड़ी (MVA) सरकार के दौरान उठाए गए मुद्दों से जुड़ा है।
सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट से जुड़ी प्रमुख पुरानी शिकायतों, मनसे के आरोपों और हालिया प्रशासनिक विवादों की विस्तृत रिपोर्ट इस प्रकार है।

QR कोड प्रणाली में कथित घोटाला (QR Code System Controversy)

महाविकास अघाड़ी सरकार के समय, विशेष रूप से कोविड-19 महामारी के बाद जब 2021 में धार्मिक स्थलों को दोबारा खोला गया, तब मंदिर ट्रस्ट ने दर्शन के लिए एक क्यूआर कोड आधारित डिजिटल पास प्रणाली शुरू की थी। मनसे समर्थित विंग और स्थानीय विधायकों (जैसे सदा सरवणकर) ने आरोप लगाया कि इस सॉफ्टवेयर को विकसित करने और संचालित करने का ठेका एक ऐसी कंपनी को दिया गया जिसके संबंध सीधे तौर पर मंदिर के कुछ ट्रस्टियों से थे।

वित्तीय हेराफेरी का दावा

शिकायतकर्ताओं के अनुसार, जिस डिजिटल पास या क्यूआर कोड सिस्टम के काम की वास्तविक लागत करीब 40 से 50 लाख रुपये होनी चाहिए थी, उसके लिए ट्रस्ट ने 3.5 करोड़ रुपये का भारी-भरकम कॉन्ट्रैक्ट आवंटित कर दिया। मनसे ने इसे सीधे तौर पर भक्तों के पैसे की लूट और तकनीकी घोटाला करार दिया था।

मंदिर मरम्मत और सौंदर्यीकरण में धांधली

प्रभादेवी स्थित मुख्य मंदिर परिसर के बुनियादी ढांचे, नवीनीकरण और मरम्मत कार्यों को लेकर भी मनसे ने बड़े सवाल उठाए थे। मनसे नेताओं का आरोप था कि तत्कालीन MVA सरकार के करीबी चेहरों को फायदा पहुंचाने के लिए मंदिर के भीतर कई कंस्ट्रक्शन और रेनोवेशन प्रोजेक्ट्स बिना पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया (निविदा प्रक्रिया) के या नियमों को ताक पर रखकर सौंपे गए।

मनसे का मोर्चा

दिसंबर 2022 में इन वित्तीय अनियमितताओं और ‘अनागोंदी कारभार’ (कुप्रबंधन) के खिलाफ मनसे कार्यकर्ताओं ने मुंबई के आगर बाजार से लेकर सिद्धिविनायक मंदिर तक एक बड़ा विरोध मोर्चा निकाला था और जांच की मांग की थी।

सरकारी योजनाओं में मंदिर के कोष का डायवर्जन

साल 2020 में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान एक और बड़ा नीतिगत विवाद सामने आया, जिसे लेकर हिंदू संगठनों और विपक्षी धड़ों ने भारी विरोध दर्ज कराया था। सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट द्वारा राज्य सरकार की सहुलियत वाली कैंटीन योजना ‘शिव भोजन योजना’ और मुख्यमंत्री सहायता कोष के लिए 10 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने का निर्णय लिया गया था।

न्यायालय में चुनौती

इस फंड ट्रांसफर को बॉम्बे हाई कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) के जरिए चुनौती दी गई। विरोध करने वालों का तर्क था कि भक्तों द्वारा भगवान गणेश के चरणों में चढ़ाया गया धन केवल धार्मिक कार्यों, मंदिर के रखरखाव और पारंपरिक धर्मार्थ गतिविधियों के लिए इस्तेमाल होना चाहिए, न कि सरकार की राजनीतिक व लोक-लुभावन योजनाओं के वित्तपोषण के लिए।

हालिया प्रशासनिक शिकायतें और सरकारी एक्शन

यह विवाद सिर्फ पुराना नहीं है, बल्कि हाल के महीनों में मंदिर के प्रशासनिक ढांचे के भीतर भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण यह फिर से सतह पर आ गया है। अप्रैल 2026 में, सिद्धिविनायक मंदिर के ही दो ट्रस्टियों और तीन अन्य शिकायतकर्ताओं ने मंदिर की कार्यकारी अधिकारी (CEO) वीणा मोरे-पाटिल और उपकार्यकारी अधिकारी संदीप राठौड़ के खिलाफ वित्तीय अपारदर्शिता और अधिकारों के दुरुपयोग की शिकायत दर्ज कराई।

विभागीय नोटिस और तख्तापलट

राज्य के विधि एवं न्याय विभाग ने इन शिकायतों का संज्ञान लेते हुए दोनों अधिकारियों को नोटिस जारी कर टेंडर, महाप्रसाद ठेके और बैठकों के मूल दस्तावेज तलब किए। इसके बाद, मई-जून 2026 में सरकार ने कार्रवाई करते हुए वीणा पाटिल को पद से हटाने और मंत्रालय स्तर के प्रशासनिक सचिव को नया कार्यकारी अधिकारी नियुक्त करने का आदेश जारी किया है।

दानपेटी से चोरी का मामला

मार्च 2026 में ही मुंबई पुलिस ने मंदिर के 8 अंदरूनी कर्मचारियों को गिरफ्तार किया था, जो दानपेटियों को एक कमरे से दूसरे कमरे में ले जाते समय उंगलियों की चालाकी से धीरे-धीरे पैसे निकालते थे और आपस में बांट लेते थे। इन्हीं तमाम कड़ियों को जोड़ते हुए एकनाथ शिंदे ने विधानसभा में विपक्ष पर हमला बोला कि जब सिद्धिविनायक में इतने स्तरों पर कुप्रबंधन की शिकायतें खुद ट्रस्टियों और मनसे द्वारा की जा रही थीं, तब तत्कालीन महाविकास अघाड़ी सरकार ने इस पर चुप्पी क्यों साधे रखी।

तुष्टिकरण की राजनीति का अंत

उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि धार्मिक स्थलों और लोगों की सुरक्षा का मामला तुष्टिकरण से ऊपर है। उन्होंने सभी से एकजुटता की अपील की और कहा कि ऐसे मामलों में अब और समय बर्बाद नहीं होना चाहिए। यह आवाज़ हिंदुत्व की सच्चाई के लिए उठी है, और इसे आगे बढ़ाना सभी की जिम्मेदारी है।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540 

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos