मन की बात में गूंजेगी आपकी बात, प्रधानमंत्री की बातों में शामिल हो सकती है आपकी सोच

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‘मन की बात’ के लिए देशवासियों से सुझाव आमंत्रित: आपके विचार बन सकते हैं राष्ट्र निर्माण की आवाज़

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के आगामी 26 जुलाई 2026 को प्रसारित होने वाले 136वें संस्करण के लिए देशभर के नागरिकों से सुझाव और विचार आमंत्रित किए गए हैं। केंद्र सरकार के नागरिक सहभागिता मंच MyGov के माध्यम से शुरू किए गए इस अभियान का उद्देश्य देशवासियों को शासन प्रक्रिया का सक्रिय भागीदार बनाना और समाज के प्रेरणादायक प्रयासों को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाना है। प्रधानमंत्री स्वयं देशवासियों के सुझावों, अनुभवों और नवाचारों को सुनने तथा उनमें से चुनिंदा विषयों को अपने संबोधन में शामिल करने की परंपरा निभाते रहे हैं। सुझाव 24 जुलाई 2026 तक भेजे जा सकते हैं।

 आपका विचार, देश की प्रेरणा

‘मन की बात’ केवल एक रेडियो कार्यक्रम नहीं, बल्कि सरकार और नागरिकों के बीच संवाद का ऐसा माध्यम बन चुका है जिसने पिछले कई वर्षों में जनभागीदारी को नई दिशा दी है। इसमें प्रधानमंत्री देशभर से प्राप्त सुझावों, सकारात्मक पहलों, सामाजिक अभियानों, नवाचारों, पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा, खेल, महिला सशक्तिकरण, विज्ञान, कृषि, स्वच्छता और युवाओं की उपलब्धियों जैसे विषयों पर चर्चा करते हैं। यही कारण है कि हर नए एपिसोड से पहले नागरिकों को अपने विचार साझा करने का अवसर दिया जाता है।

कैसे भेज सकते हैं अपने सुझाव?

सरकार ने नागरिकों के लिए सुझाव भेजने के कई सरल माध्यम उपलब्ध कराए हैं—
  • MyGov Open Forum पर जाकर अपने विचार लिख सकते हैं।
  • NaMo App के माध्यम से भी सुझाव भेजे जा सकते हैं।
  • टोल-फ्री नंबर 1800-11-7800 पर हिंदी या अंग्रेज़ी में अपना संदेश रिकॉर्ड किया जा सकता है।
  • 1922 पर मिस्ड कॉल देने के बाद प्राप्त लिंक के माध्यम से भी सुझाव सीधे भेजे जा सकते हैं।
  • आगामी कार्यक्रम के लिए सुझाव 24 जुलाई 2026 तक स्वीकार किए जाएंगे।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के दूर-दराज़ क्षेत्रों में रहने वाला नागरिक भी बिना किसी कठिनाई के अपनी बात प्रधानमंत्री तक पहुँचा सके।

किन विषयों पर दिए जा सकते हैं सुझाव?

MyGov ने नागरिकों से ऐसे विषय साझा करने का आग्रह किया है जो समाज और राष्ट्र के विकास से जुड़े हों। नागरिक निम्नलिखित विषयों पर अपने सुझाव दे सकते हैं—
  • विकसित भारत 2047 का विजन
  • महिला एवं युवा सशक्तिकरण
  • डिजिटल इंडिया और नवाचार
  • पर्यावरण संरक्षण और जल संरक्षण
  • स्वच्छता अभियान
  • कृषि और ग्रामीण विकास
  • शिक्षा एवं कौशल विकास
  • स्टार्टअप और उद्यमिता
  • स्थानीय प्रेरणादायक कहानियाँ
  • सामाजिक समरसता और जनभागीदारी
यदि किसी व्यक्ति ने अपने गांव, शहर या समाज में कोई उल्लेखनीय कार्य किया है, तो उसकी जानकारी भी साझा की जा सकती है ताकि पूरे देश को उससे प्रेरणा मिल सके।

नागरिकों की भागीदारी से मजबूत हुआ कार्यक्रम

‘मन की बात’ की सबसे बड़ी विशेषता यह रही है कि इसमें केवल सरकारी योजनाओं की जानकारी नहीं दी जाती, बल्कि आम नागरिकों की प्रेरक कहानियों को भी राष्ट्रीय पहचान मिलती है। अनेक अवसरों पर प्रधानमंत्री ने उन लोगों का उल्लेख किया है जिन्होंने पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा, जल बचत, जैविक खेती, स्वच्छता, महिला सशक्तिकरण या सामाजिक सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। इस प्रकार कार्यक्रम लाखों लोगों को सकारात्मक कार्यों के लिए प्रेरित करता है और समाज में अच्छे कार्यों को सम्मान दिलाने का माध्यम बनता है।

MyGov की भूमिका

MyGov भारत सरकार का नागरिक सहभागिता मंच है जिसकी शुरुआत वर्ष 2014 में इस उद्देश्य से की गई थी कि आम नागरिक नीति निर्माण और शासन प्रक्रिया में अपनी भागीदारी निभा सकें। यहां विभिन्न मंत्रालयों और विभागों से जुड़े विषयों पर सुझाव, प्रतियोगिताएं, सर्वेक्षण और जनभागीदारी अभियान संचालित किए जाते हैं। ‘मन की बात’ के लिए सुझाव आमंत्रित करना भी इसी मंच की एक महत्वपूर्ण पहल है। MyGov के माध्यम से प्राप्त सुझावों में से कई विचार समय-समय पर प्रधानमंत्री के संबोधन का हिस्सा बन चुके हैं। इससे नागरिकों में यह विश्वास मजबूत हुआ है कि उनकी आवाज़ वास्तव में सरकार तक पहुँच रही है।

सकारात्मक कहानियों को मिलता है राष्ट्रीय मंच

देश के विभिन्न राज्यों में कई ऐसे लोग कार्य कर रहे हैं जो बिना किसी प्रचार के समाज की सेवा में लगे हुए हैं। कोई जल संरक्षण का अभियान चला रहा है, कोई बच्चों की शिक्षा के लिए प्रयास कर रहा है, तो कोई जैविक खेती या स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा दे रहा है। ऐसे प्रयास अक्सर स्थानीय स्तर तक ही सीमित रह जाते हैं। लेकिन ‘मन की बात’ के माध्यम से इन्हें राष्ट्रीय पहचान मिलती है। परिणामस्वरूप अन्य लोग भी ऐसे अभियानों से प्रेरित होकर अपने क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए आगे आते हैं।

लोकतांत्रिक संवाद का सशक्त माध्यम

विशेषज्ञों का मानना है कि लोकतंत्र केवल चुनावों तक सीमित नहीं होता, बल्कि नागरिकों और सरकार के बीच निरंतर संवाद भी उसकी महत्वपूर्ण विशेषता है। ‘मन की बात’ इसी संवाद की एक कड़ी है, जिसमें जनता अपने विचार सीधे साझा कर सकती है। सरकार के अनुसार, यह कार्यक्रम केवल समस्याओं पर चर्चा नहीं करता बल्कि समाधान, नवाचार और प्रेरणादायक प्रयासों को भी सामने लाता है। इससे सकारात्मक सोच को बढ़ावा मिलता है और समाज में अच्छे कार्यों की श्रृंखला मजबूत होती है।

युवाओं के लिए विशेष अवसर

युवा वर्ग इस अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यदि किसी छात्र, शोधकर्ता, स्टार्टअप उद्यमी, सामाजिक कार्यकर्ता या नवप्रवर्तक ने कोई नया प्रयोग किया है, तो वह अपने अनुभव साझा कर सकता है। डिजिटल तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, कौशल विकास, स्टार्टअप संस्कृति, जलवायु परिवर्तन, हरित ऊर्जा और स्थानीय नवाचार जैसे विषयों पर युवाओं के सुझाव भविष्य की नीतियों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकते हैं।

जनभागीदारी से विकसित भारत की दिशा

भारत सरकार लगातार इस बात पर जोर देती रही है कि विकसित भारत का लक्ष्य केवल सरकारी योजनाओं से नहीं बल्कि जनभागीदारी से ही पूरा होगा। जब नागरिक अपने विचार, अनुभव और सुझाव साझा करते हैं, तो शासन व्यवस्था अधिक सहभागी और प्रभावी बनती है। ‘मन की बात’ के माध्यम से लाखों नागरिकों को अपनी बात रखने का अवसर मिलता है। यह कार्यक्रम नागरिकों और सरकार के बीच विश्वास का सेतु भी बन चुका है, जहाँ समाज के सकारात्मक प्रयासों को राष्ट्रीय पहचान मिलती है।

आपके सुझाव से बनेगा विकसित भारत का भविष्य

26 जुलाई 2026 को प्रसारित होने वाले ‘मन की बात’ के 136वें एपिसोड के लिए सुझाव आमंत्रित करना केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। यदि आपके पास कोई प्रेरणादायक अनुभव, समाजहित में किया गया कार्य, नवाचार, पर्यावरण संरक्षण का मॉडल, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, युवा विकास या राष्ट्र निर्माण से जुड़ा कोई सार्थक विचार है, तो उसे MyGov, NaMo App, टोल-फ्री नंबर 1800-11-7800 या 1922 मिस्ड कॉल सेवा के माध्यम से साझा किया जा सकता है। हो सकता है आपका विचार न केवल प्रधानमंत्री के संबोधन का हिस्सा बने, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन जाए।
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