महिला शोषण और भ्रष्टाचार के आरोप
राज्यसभा सांसद संदीप पाठक, जिन्होंने हाल ही में आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने का निर्णय लिया, के खिलाफ पंजाब में दो गैर-जमानती FIR दर्ज की गई हैं। ये मामले महिला शोषण और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों पर आधारित हैं। सूत्रों का कहना है कि पंजाब पुलिस उनके पंडारा पार्क स्थित आवास पर पहुंची, लेकिन पाठक वहां नहीं मिले। उनकी अनुपस्थिति ने मामले को और संगीन बना दिया है, और अब दिल्ली पुलिस भी उनकी गिरफ्तारी की संभावनाओं पर नजर रख रही है।
संदीप पाठक का पक्ष
संदीप पाठक ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनकी जिंदगी में ऐसा पल आएगा। उन्होंने AAP से अलग होने के निर्णय के पीछे पार्टी के हितों को प्राथमिकता देने की बात कही। पाठक ने उल्लेख किया कि वे 10 सालों से इस पार्टी का हिस्सा थे और उन्होंने राजनीति में नई विचारधारा को अपनाने की कोशिश की।
पार्टी चुनावी रणनीति पर ध्यान केंद्रित
AAP के नेतृत्व ने संदीप पाठक के इस अचानक फैसले को लेकर चिंता जताई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पार्टी के लिए एक बड़ा झटका हो सकता है, खासकर 2027 के पंजाब चुनावों से पहले। AAP मौजूदा स्थिति को लेकर अपनी रणनीति को स्पष्ट करने में जुट गई है। पार्टी अब यह निर्धारित करने की कोशिश कर रही है कि इस घटनाक्रम का असर उनके आगामी चुनावों पर कैसे पड़ेगा।
मुख्यमंत्री भगवंत मान की राष्ट्रपति से मुलाकात
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 5 मई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करने का निर्णय लिया है। उनका उद्देश्य उन राज्यसभा सांसदों को वापस लाने की मांग करना है, जो बीजेपी में शामिल हो गए हैं। यह कदम AAP के लिए उनके पार्टी सदस्यों को पुनः हासिल करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
दिल्ली पुलिस भी सक्रिय
दिल्ली पुलिस ने भी संदीप पाठक के घर पर एक टीम भेजी है। SHO तिलक मार्ग और उनके कांस्टेबल पाठक के निवास के बाहर मौजूद हैं। यह स्पष्ट है कि पुलिस उनके खिलाफ चल रहे मामलों को गंभीरता से ले रही है और इस दिशा में आगे की कार्रवाई करने का मन बना रही है।
राजनीतिक गलियारों में हलचल
संदीप पाठक का AAP से BJP में जाना पंजाब की राजनीतिक स्थिति में नई हलचल पैदा कर रहा है। इस घटनाक्रम ने कई सियासी समीक्षकों का ध्यान आकर्षित किया है और पार्टी के भविष्य पर कई सवाल उठाए हैं। पाठक के खिलाफ दर्ज FIR ने ना केवल उनकी राजनीति बल्कि राज्य की राजनीति को भी प्रभावित करने का काम किया है। ऐसे में देखने वाली बात यह होगी कि AAP इस स्थिति का सामना कैसे करती है।
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