मोहन भागवत बोले: Gen Z बहुत भावुक है, लेकिन शांत दिमाग से विचार नहीं करता

The CSR Journal Magazine

‘Gen Z को ठंडी सोच नहीं, भावुकता की जरूरत है’: RSS प्रमुख मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने हैदराबाद और दिल्ली में आयोजित कार्यक्रमों में आज की युवा पीढ़ी (Gen Z) की सोच, व्यवहार और जीवनशैली को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें कहीं। मोहन भागवत ने कहा कि Gen Z के युवा स्वभाव से बहुत अच्छे, अनुकरणशील और भावुक होते हैं, लेकिन वे बहुत शांत दिमाग से विचार नहीं करते हैं। वे दूसरों की देखा-देखी चीजें करते हैं और जो बात उन्हें सही लगती है, उसकी तरफ बहुत जल्दी आकर्षित हो जाते हैं।

मोहन भागवत का बयान

तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान RSS के प्रमुख मोहन भागवत ने अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि जनरेशन Z, जो आज के युवा हैं, स्वभाव से काफी भावुक होते हैं। वे घटनाओं को तुरंत महसूस करते हैं और यह उनका सबसे बड़ा गुण भी है। भागवत ने कहा कि यह पीढ़ी आसानी से बदलाव में ढल जाती है, लेकिन कभी-कभी इसे ठंडे दिमाग से सोचने की जरूरत होती है।

भावुकता का असर

RSS प्रमुख ने यह भी कहा कि जब Gen Z किसी मुद्दे को सही और सच्चा मानते हैं, तो वे उसके साथ तुरंत जुड़ जाते हैं। यह जुड़ाव कई बार सकारात्मक होता है, लेकिन बिना विचार किए उठाए गए कदम कई बार समस्या भी खड़ी कर सकते हैं। भागवत ने इस बारे में आशंका व्यक्त की कि वर्तमान घटनाओं में उनकी भावुकता कहीं नकारात्मक प्रभाव न डाले।

समाज में बदलाव की बात

मोहन भागवत ने कहा कि जब स्त्री मुक्ति आंदोलन की शुरुआत हुई थी, तो उस समय समाज की सोच भी धीरे-धीरे बदली। उन्होंने यह बताया कि जनरेशन Z में बदलाव की क्षमता है और यदि उनका सही दिशा में मार्गदर्शन किया जाए, तो वे समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। संघ प्रमुख ने कहा कि नई पीढ़ी को ‘डिक्टेशन’ (आदेश) नहीं बल्कि ‘डिस्कशन’ (चर्चा) चाहिए। माता-पिता को उनके सवालों के तर्कपूर्ण जवाब देने चाहिए।

संभावनाएं और चुनौती

विशेषज्ञों का मानना है कि Gen Z की भावुकता उन्हें रचनात्मकता की ओर भी ले जा सकती है। लेकिन अगर ये भावनाएं सही दिशा में नहीं जाएं, तो समाज के लिए चुनौती बन सकती हैं। भागवत ने इस बात पर जोर दिया कि युवाओं को सोच-समझकर कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि वे अपने आसपास के परिवेश को सही रूप में समझ सकें।

आंदोलन और सहभागिता

भागवत ने यह भी कहा कि युवाओं की भागीदारी समाज के विभिन्न आंदोलनों में आवश्यक है, लेकिन उन्हें अपने विचारों को ठंडे शांत मन से व्यक्त करने की आवश्यकता है। इस समय देश में जो आंदोलन चल रहे हैं, उनमें युवाओं की आवाज़ बहुत महत्वपूर्ण है। सही मार्गदर्शन और सोच के साथ, Gen Z अपने अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ सकती है।

सह-जीवन पर टिप्पणी

उन्होंने ‘लिव-इन रिलेशनशिप’ (Co-living) को पश्चिमी संस्कृति की अंधी नकल बताया। उन्होंने कहा कि विवाह एक अनुशासन है जो धर्म को स्थापित करता है, जबकि लिव-इन में लोग बिना जिम्मेदारी के सिर्फ खुशी ढूंढते हैं।

मोबाइल और समावेशी सोच

उन्होंने माता-पिता को भी मोबाइल के इस्तेमाल में अनुशासन अपनाने की सलाह दी, ताकि बच्चे उनका सही अनुकरण कर सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिकता का स्वागत होना चाहिए और LGBTQ+ समुदाय भी हमारे समाज का हिस्सा है, इसलिए उन्हें हीन भावना से नहीं देखना चाहिए।

समाज के प्रति जिम्मेदारी

भागवत ने बताया कि समाज की जिम्मेदारी है कि वह युवा पीढ़ी को सही दिशा में मार्गदर्शन करे। उनके लिए सही शिक्षा और अवसर प्रदान करना आवश्यक है, ताकि वे अपनी भावनाओं को सही तरीके से व्यक्त कर सकें। इसके साथ ही, मौजूदा समस्याओं के समाधान के लिए ठंडे दिमाग से सोचने की भी आवश्यकता है।

युवाओं से संवाद

मोहन भागवत ने युवा वर्ग से संवाद स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि समाज के सभी वर्गों का यह कर्तव्य है कि वे युवा पीढ़ी के विचारों को समझें और उनकी भावनाओं को सम्मान दें। इस तरह एक सकारात्मक संवाद से देश में और बेहतर बदलाव लाने की संभावना बनती है।

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