जैश JeM के जाल में फंसे Gen-Z युवा, गुजरात ATS ने 13 संदिग्धों को किया गिरफ्तार

The CSR Journal Magazine

गुजरात में जैश का बहावलपुर मॉड्यूल: Gen-Z युवाओं का ब्रेनवॉश कैसे कर रहा है?

गुजरात आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के एक खतरनाक घरेलू स्लीपर सेल का भंडाफोड़ किया है, जिसमें कुल 13 संदिग्धों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पाकिस्तान के बहावलपुर में स्थित जैश मुख्यालय से संचालित इस मॉड्यूल ने मुख्य रूप से Gen-Z युवाओं (20 से 24 वर्ष की उम्र के लड़कों) को निशाना बनाया और उनका गंभीर रूप से ब्रेनवॉश किया। गुजरात ATS की जांच और पूछताछ में यह खुलासा हुआ है कि यह बहावलपुर मॉड्यूल युवा पीढ़ी को कट्टरपंथी बनाने और हमलों के लिए तैयार करने के लिए ऑनलाइन तरीकों का इस्तेमाल कर रहा था।

जिला दर जिला गिरफ्तारियां

गुजरात ATS ने जैश-ए-मोहम्मद के एक बड़े स्लीपर सेल का भंडाफोड़ करते हुए 13 आतंकियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारियां राज्य के विभिन्न जिलों से की गई हैं। जांच में यह बात सामने आई है कि इस मॉड्यूल के तार पाकिस्तान के बहावलपुर स्थित जैश के हेडक्वार्टर ‘मरकज सुभान अल्लाह’ और सरगना मसूद अजहर से जुड़ते हैं। यहीं से Gen-Z और मदरसा छात्रों को ऑनलाइन ब्रेनवॉश किया जा रहा था। 2 जुलाई 2026 को UAPA तथा बीएनएस के तहत दर्ज इस मामले ने सभी को चौंका दिया है।

ऑनलाइन ब्रेनवॉश का भयंकर तरीका

आज का आतंकवाद केवल सीमा पार से नहीं, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी फैल रहा है। इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की जांच में पता चला कि पाकिस्तान के आका इंटरनेट के जरिए स्थानीय युवाओं के संपर्क में थे। गिरफ्तार आरोपी मोहम्मद अमीन शेरा इस मॉड्यूल का मुख्य ‘रेडिकलाइजर’ था। उसका जिम्मा था कि वह अन्य सदस्यों को मसूद अजहर के भड़काऊ भाषण और जिहादी साहित्य भेजे। आरोपियों के पास से 43 ई-बुक्स और एक खतरनाक किताब ‘अकेला मुजाहिद जेहाद कैसे करे’ बरामद हुई है।

युवाओं को बरगलाने के मुख्य तरीके-डिजिटल प्रोपेगैंडा

जांच में यह बात सामने आई है कि मुख्य आरोपियों ने स्थानीय युवाओं को डिजिटल माध्यमों और स्टोरेज डिवाइस के जरिए प्रतिबंधित संगठन की विचारधारा से जुड़ी सामग्री, कट्टरपंथी भाषण और वीडियो उपलब्ध कराए थे। इन सामग्रियों का उद्देश्य युवाओं का वैचारिक ब्रेनवॉश करना था।

कट्टरपंथी साहित्य का प्रचार

गिरफ्तार संदिग्धों को कट्टरपंथी विचारधारा पर आधारित साहित्य पढ़ने के लिए प्रेरित किया जाता था, जिसमें हिंसा और उग्रवाद को बढ़ावा देने वाली बातें शामिल थीं। इस साहित्य के माध्यम से युवाओं के मन में अकेले या छोटे समूहों में हिंसक गतिविधियों को अंजाम देने का विचार डाला गया।

स्थानीय नेटवर्क ‘दारुल इस्लाम गुजरात’

आरोपियों ने नेटवर्क के विस्तार के लिए ‘दारुल इस्लाम गुजरात जैश-ए-मोहम्मद’ नाम से एक स्थानीय मोर्चा बनाया था। इसके तहत बाहरी हैंडलर्स के निर्देश पर कट्टरपंथी सामग्री का स्थानीय गुजराती भाषा में अनुवाद किया जा रहा था ताकि क्षेत्रीय युवाओं को प्रभावित किया जा सके।

धार्मिक स्थलों का अनुचित उपयोग

जांच के अनुसार, गिरफ्तार किए गए कुछ युवा गुजरात के विभिन्न मदरसों और मस्जिदों से जुड़े हुए थे। एटीएस का आरोप है कि इन स्थानों का उपयोग गुप्त बैठकों और संदिग्ध गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। एटीएस के अनुसार, इन युवाओं ने इंटरनेट और सोशल मीडिया के माध्यम से विस्फोटक बनाने से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने की कोशिश की थी। उन्होंने इसके लिए आवश्यक कुछ कच्चा माल ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म और स्थानीय बाजारों से जुटाया था।

विस्फोटक परीक्षण (ट्रायल)

एटीएस की जांच में खुलासा हुआ है कि इस मॉड्यूल के सदस्यों ने 2023 से 2026 के बीच पाटन और सिद्धपुर के सुनसान इलाकों में कई बार विस्फोटक उपकरणों के परीक्षण करने के प्रयास किए थे।

बाहरी हैंडलर्स से संपर्क और फंडिंग

एटीएस के अनुसार, मॉड्यूल के सदस्य एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के माध्यम से सीमा पार बैठे हैंडलर्स के संपर्क में थे। उन्हें नेटवर्क विस्तार, वाहन खरीदने और सुरक्षित ठिकानों के इंतजाम के लिए करीब ₹3 लाख की फंडिंग भी मिली थी। गुजरात एटीएस ने समय रहते इस नेटवर्क को ध्वस्त कर कई संभावित सुरक्षा खतरों को टाल दिया है। सभी आरोपियों को UAPA और BNS की सख्त धाराओं के तहत हिरासत में लेकर आगे की जांच की जा रही है।

गुजरात: खतरा क्यों?

भारतीय एजेंसियों द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के बाद जैश ने अपनी रणनीति बदली और गुजरात को टारगेट किया। गुजरात की आर्थिक स्थिति और तटीय इलाकों की संवेदनशीलता ने इसे आतंकवादियों के लिए आकर्षक बना दिया है। खादियासन और नंदासन जैसे क्षेत्रों में अंदर ही अंदर इस नेटवर्क ने जड़े जमा ली थीं। यहाँ अशांति फैलाने का अर्थ पूरे देश की अर्थव्यवस्था को चुनौती देना है।

क्या है Gen-Z का लक्षित समूह?

जैश का पूरा फोकस अब 18 से 25 साल के युवाओं पर है। गुजरात में पकड़े गए 13 आतंकियों में से 10 की उम्र इसी श्रेणी में थी। एजेंसी के अनुसार, जैश अगले कुछ वर्षों में भारत में लोन वुल्फ आतंकियों की एक फौज खड़ी करना चाहता है। इसी रणनीति का एक हिस्सा है ‘अकेला मुजाहिद’ जैसी किताबें, जो युवाओं को अकेले हमले के लिए प्रेरित करती हैं।

अन्य राज्यों का भी ध्यान

हालांकि यह मॉड्यूल गुजरात में ही सक्रिय था, इसके तार जम्मू-कश्मीर तक फैले हुए हैं। गिरफ्तार किए गए आतंकियों में से कुछ ने जम्मू-कश्मीर जाकर AK-47 चलाने की ट्रेनिंग भी ली थी। उन्हें कार्बन मोनोऑक्साइड बनाने की भी ट्रेनिंग दी गई थी, जो कि बड़े शहरों में हमलों के लिए इस्तेमाल हो सकती है। इससे स्पष्ट है कि ये नेटवर्क कश्मीर से गुजरात तक फैला हुआ है।

ATS की कार्रवाई और सबूत

गुजरात ATS की विभिन्न टीमों ने इस पूरे मॉड्यूल को नष्ट कर दिया है। तलाशी में जैश-ए-मोहम्मद का झंडा, IED बनाने का सामान, मसूद अजहर से जुड़े पत्राचार और 1.30 लाख रुपये नकद बरामद हुए हैं। प्रारंभिक चरण में 8 आतंकियों को पकड़ा गया था और पूछताछ के आधार पर 5 और की गिरफ्तारी हुई है। हाल ही में कोर्ट में भारी सुरक्षा के साथ सभी को पेश किया गया। कोर्ट ने पकड़े गए आतंकियों को रिमांड पर भेज दिया है।

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