Ram Mandir Donation Theft: सुप्रीम कोर्ट का यूपी सरकार को बड़ा निर्देश: SIT में फोरेंसिक ऑडिटर शामिल करें

The CSR Journal Magazine
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार को अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) में एक फोरेंसिक ऑडिटर को शामिल करने का निर्देश दिया। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को यह भी कहा कि वह एसआईटी जांच की स्थिति रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत करे।

दान में हेराफेरी की होगी विस्तृत जांच

इस मामले में सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की टीम ने कहा कि दान में हेराफेरी के आरोपों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग की गई है। लखनऊ के आईजी आईपीएस एस. किरण के नेतृत्व में गठित की गई SIT में डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल और सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस भी शामिल हैं।

राज्य ने सुप्रीम कोर्ट के सुझाव को माना

उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के सुझाव पर उन्होंने फोरेंसिक ऑडिटर को शामिल करने पर सहमति जताई है। यस आईटी की कार्यप्रणाली में सुधार लाने के लिए यह एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

दान के ऑडिट की मांग भी उठी

वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत ने याचिका में कहा कि SIT को राम मंदिर निर्माण के लिए मिले दान की रसीदों का ऑडिट करना चाहिए। उनका कहना था, ‘लोगों ने 500 या 1000 रुपये दान किए, लेकिन कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि यह पैसा ट्रस्ट तक नहीं पहुंचा है।’ उन्होंने सभी दान की जानकारी सार्वजनिक करने की अपील की।

पारदर्शिता सुनिश्चित करना जरूरी

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने निर्देश दिया कि SIT सभी रिकॉर्ड्स की जांच करे और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सुधारात्मक कदम उठाने चाहिए। इसके लिए एक वरिष्ठ अधिकारी और फोरेंसिक ऑडिटर को शामिल करना जरूरी है।

जांच की निगरानी के लिए पूर्व जज की नियुक्ति

कामत ने उस दौरान सुझाव दिया कि जांच की निगरानी के लिए सुप्रीम कोर्ट के किसी पूर्व जज को नियुक्त किया जाना चाहिए, परंतु सॉलिसिटर जनरल ने इस पर अपनी राय दी कि मौजूदा बेंच इसे देख रही है।

त्वरित और गुणवत्तापूर्ण जांच पर जोर

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस समय फोकस त्वरित और गुणवत्तापूर्ण जांच पर है। उन्होंने कहा कि ‘हम चाहते हैं कि SIT जल्दी से रिपोर्ट प्रस्तुत करे। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे पूरी पारदर्शिता के साथ निपटाना जरूरी है।’

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