Rajasthan में 180 दरगाह-मस्जिद टूटने का कारण: गृह मंत्रालय का कानून

The CSR Journal Magazine
राजस्थान हाई कोर्ट के हालिया आदेश के बाद भारत-पाक सीमा पर बने धार्मिक स्थलों को लेकर बहस गर्म हो गई है। हालात ये हैं कि गृह मंत्रालय का एक नियम प्रशासन को कार्रवाई का अधिकार दे रहा है। राजस्थान हाई कोर्ट ने भारत-पाकिस्तान सीमा से 50 किलोमीटर के दायरे में स्थित मस्जिदों, मदरसों और दरगाहों के बारे में जारी नोटिस के खिलाफ दायर याचिकाएं खारिज कर दी हैं। ऐसे में एक बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर वह कौन सा कानून है, जिसकी वजह से प्रशासन ऐसी कार्रवाई कर रहा है?

गृह मंत्रालय का 11 अक्टूबर 2021 का नियम

गृह मंत्रालय की 11 अक्टूबर 2021 की अधिसूचना के तहत सीमा सुरक्षा बल (BSF) के अधिकार क्षेत्र में विस्तार किया गया है। कोर्ट ने बताया कि यह फैसला सुरक्षा के हालात को देखते हुए लिया गया था। अदालत ने इस अधिसूचना के संदर्भ में कहा कि बीएसएफ के अधिकार 50 किलोमीटर तक बढ़ाए गए हैं ताकि सीमा पर घुसपैठ, तस्करी और देश विरोधी गतिविधियों को रोकना संभव हो सके। इस कानूनी ढांचे के अनुसार संवेदनशील सीमा क्षेत्र में बने अनधिकृत निर्माणों की जांच की जाएगी।

50 किलोमीटर का क्षेत्र और उसकी अहमियत

हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि भारत-पाकिस्तान सीमा से 50 किलोमीटर का इलाका सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। अदालत ने कहा कि इस क्षेत्र में किसी भी तरह का अनधिकृत निर्माण सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय हो सकता है। इसकी वजह से प्रशासन को अतिरिक्त अधिकार दिए गए हैं ताकि वह तस्करी, घुसपैठ और अन्य अपराधों को रोक सके। यह निर्णय केवल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए है, न कि सामान्य राजस्व विवाद के रूप में देखा जाए।

नोटिस कौन-कौन से धार्मिक स्थलों को जारी हुए?

राजस्थान सरकार ने उन मस्जिदों, मदरसों और दरगाहों को नोटिस जारी किए हैं जो भारत-पाकिस्तान सीमा के 50 किलोमीटर के दायरे में स्थित हैं। मामला उन धार्मिक स्थलों से जुड़ा है जो बिना वैध अनुमति के बने हैं। सरकार का कहना है कि ये निर्माण संवेदनशील क्षेत्र में हैं और इन्हें समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। यही वजह है कि कई धार्मिक संगठनों ने हाई कोर्ट में याचिकाएं दायर की हैं।

राज्य सरकार का पक्ष

राज्य सरकार ने अदालत में बताया कि इन धार्मिक ढांचे के निर्माण के लिए किसी प्रकार की कानूनी मंजूरी नहीं ली गई थी। इसके अलावा, सरकार ने अदालत से कहा कि यह कार्रवाई किसी धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि सुरक्षा के पालन में की जा रही है। अदालत ने इस दलील को स्वीकार किया है और स्पष्ट किया कि कार्रवाई का उद्देश्य केवल कानून व्यवस्था बनाए रखना है।

भेदभाव की दलील पर कोर्ट का फैसला

याचिकाकर्ताओं ने अदालत में तर्क दिया कि कार्रवाई केवल धार्मिक स्थलों को निशाना बनाकर की गई है। लेकिन हाई कोर्ट ने कहा कि ऐसा कोई तथ्य नहीं है जो यह साबित कर सके। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह मामला केवल राष्ट्रीय सुरक्षा और कानूनी नियमों के पालन का है, न कि किसी धार्मिक समुदाय के खिलाफ।

याचिकाएं खारिज करने के बाद क्या होगा?

हाई कोर्ट ने याचिकाएं खारिज करने के बावजूद यह सुनिश्चित किया कि प्रत्येक मामले की अलग-अलग जांच होगी। अदालत ने निर्देश दिया है कि एक संयुक्त समिति बनाई जाए, जिसमें जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और बीएसएफ के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह समिति हर संपत्ति का परीक्षण करेगी और उसके बाद कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई तय करेगी। इस तरह, राष्ट्रीय

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