आर माधवन-पद्म श्री सम्मान और 40 लाख की मेड इन इंडिया घड़ी की कहानी, दुनिया में सिर्फ 10 पीस

The CSR Journal Magazine

आर माधवन की ₹40 लाख की दुर्लभ भारतीय घड़ी ने पद्म श्री समारोह में बटोरीं सुर्खियां: देशप्रेम और बेजोड़ शिल्प कौशल की अनूठी मिसाल

नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन के ऐतिहासिक दरबार हॉल में आयोजित गरिमामयी पद्म पुरस्कार समारोह में उस समय एक अद्भुत दृश्य देखने को मिला, जब भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और निर्देशक आर माधवन (R Madhavan) को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म श्री’ से नवाजा। सिनेमा जगत में अपने अद्वितीय योगदान के लिए सम्मानित हुए माधवन ने इस ऐतिहासिक क्षण को न केवल अपनी उपस्थिति से, बल्कि अपनी खास पसंद से भी यादगार बना दिया। इस खास मौके पर माधवन की कलाई पर बंधी ₹40 लाख मूल्य की एक बेहद दुर्लभ भारतीय लग्जरी घड़ी ने सोशल मीडिया से लेकर फैशन और वॉच कलेक्टर्स की दुनिया तक में खासा ध्यान आकर्षित किया।

मेड इन इंडिया की पहचान

आमतौर पर भारतीय हस्तियां ऐसे बड़े अंतरराष्ट्रीय या राष्ट्रीय मंचों पर स्विस ब्रांड्स जैसे रोलेक्स, पाटेक फिलिप या ऑडेमार्क पिगे पहनना पसंद करती हैं। लेकिन माधवन ने एक बार फिर अपनी ‘मेड इन इंडिया’ सोच और भारतीय विरासत के प्रति अपने गहरे सम्मान को दर्शाते हुए एक ऐसी घड़ी चुनी, जो देश की कला, वास्तुकला और तकनीकी उन्नति का साक्षात प्रमाण है।

भारतीय कला और आधुनिकता का बेजोड़ संगम: नेबुला जलसा फ्लाइंग टूरबिलन

आर माधवन ने इस समारोह के लिए भारतीय घड़ी निर्माता कंपनी टाइटन के प्रीमियम डिवीजन द्वारा निर्मित ‘टाइटन नेबुला जलसा फ्लाइंग टूरबिलन’ (Titan Nebula Jalsa Flying Tourbillon) को चुना। यह कोई आम टाइमपीस नहीं है, बल्कि भारतीय इतिहास में घड़ी निर्माण (Horology) की कला का एक शिखर है। इस घड़ी की सबसे बड़ी खासियत इसकी दुर्लभता है। कंपनी ने दुनिया भर में इस एक्सक्लूसिव डिजाइन की सिर्फ 10 प्रतियां (Units) ही बनाई हैं। माधवन के पास मौजूद यह घड़ी इन्हीं चुनिंदा दस मास्टरपीस में से एक है, जो इसे वैश्विक स्तर पर एक अत्यंत मूल्यवान ‘कलेक्टर्स आइटम’ बनाती है।

डिजाइन में समाहित भारत का गौरव और इतिहास

इस ₹40 लाख की घड़ी का हर एक कोना भारतीय कारीगरी की कहानी बयां करता है। इसके मुख्य आकर्षण और डिजाइन की विशेषताएं निम्नलिखित हैं-
हवा महल की लघु पेंटिंग: इस घड़ी का डायल राजस्थान की राजधानी जयपुर के ऐतिहासिक ‘हवा महल’ से प्रेरित है। इसके शुद्ध मार्बल डायल पर हवा महल की जटिल वास्तुकला को एक बारीक मिनिएचर (लघु) पेंटिंग के रूप में उकेरा गया है।
पद्म श्री कलाकार के हाथों का जादू: इस घड़ी की एक और खास कड़ी यह है कि इसके डायल पर की गई पेंटिंग को स्वयं पद्म श्री पुरस्कार विजेता उस्ताद कलाकार शाकिर अली ने अपने हाथों से तैयार किया है। संयोग देखिए कि एक पद्म श्री विजेता कलाकार की बनाई कलाकृति को पहनकर दूसरे नव-मनोनित पद्म श्री विजेता (माधवन) ने राष्ट्रपति भवन में प्रवेश किया।
18-कैरेट रोज गोल्ड केस: घड़ी की बाहरी बनावट और इसकी सुरक्षा के लिए तैयार किया गया केस 18-कैरेट शुद्ध रोज गोल्ड (18k Rose Gold) से बना है, जो इसे एक शाही और क्लासिक लुक देता है।

मैकेनिकल फ्लाइंग टूरबिलन

घड़ी उद्योग में ‘टूरबिलन’ मैकेनिज्म को सबसे जटिल और प्रीमियम माना जाता है। टाइटन नेबुला जलसा फ्लाइंग टूरबिलन (Titan Nebula Jalsa Flying Tourbillon) एक तकनीकी और कलात्मक मास्टरपीस है, जो पूरी तरह से मैकेनिकल इन-हाउस फ्लाइंग टूरबिलन मूवमेंट पर काम करती है। समय की अत्यधिक सटीकता सुनिश्चित करने के लिए इसमें 28,800 वाइब्रेशन प्रति घंटे (vph) की फ्रीक्वेंसी दी गई है, जिसमें 144 अत्यंत बारीक पुर्जे और घर्षण कम करने वाले 14 सिंथेटिक रत्न (Jewels) शामिल हैं। बाहरी बनावट की बात करें तो इस घड़ी का मुख्य केस 18-कैरेट ठोस रोज गोल्ड से तैयार किया गया है, जिसके दोनों तरफ स्क्रैच-प्रतिरोधी नीलमणि क्रिस्टल (Sapphire Crystal) ग्लास लगा है। इसका पारदर्शी केस-बैक (See-through Caseback) अंदर चल रहे जटिल मैकेनिज्म को साफ तौर पर दिखाता है।

दुनिया भर में केवल 10 पीस

इस लग्जरी घड़ी की सबसे बड़ी यूएसपी इसका डायल है, जो शुद्ध मार्बल से बना है और इस पर जयपुर के ऐतिहासिक हवा महल की लघु पेंटिंग हाथ से उकेरी गई है। कलाई पर मजबूती और शाही लुक देने के लिए इसमें 18k रोज गोल्ड डिप्लॉयमेंट क्लैस्प के साथ एक प्रीमियम लेदर स्ट्रैप जोड़ा गया है। दुनिया भर में मात्र 10 प्रतियों (Units) के सीमित उत्पादन और लगभग ₹40,00,000 (40 लाख रुपये) की कीमत के साथ यह टाइमपीस भारतीय घड़ी निर्माण के इतिहास में दुर्लभता और विशिष्टता का सर्वोच्च प्रतीक है।

माधवन का रॉयल एथनिक लुक

पारंपरिक परिधान के साथ स्वदेशी का संदेश देते हुए राष्ट्रपति भवन के कड़े ड्रेस कोड और इस अवसर की गरिमा को ध्यान में रखते हुए आर माधवन ने अपने लुक को पूरी तरह से भारतीय रखा। उन्होंने एक गहरे नेवी ब्लू रंग का बंदगला सूट पहना था, जिसे उन्होंने क्लासिक सफेद धोती-स्टाइल पैंट के साथ पेयर किया था। उनके इस रॉयल एथनिक लुक को उनकी कलाई पर बंधी इस शानदार टूरबिलन घड़ी ने एक परफेक्ट और आधुनिक टच दिया।

सोशल मीडिया पर माधवन के स्वदेशी प्यार की धूम

माधवन ने इस स्वदेशी लक्ज़री घड़ी को चुनकर दुनिया को यह संदेश दिया कि भारतीय ब्रांड्स और भारत के कारीगर दुनिया के किसी भी अंतरराष्ट्रीय लक्ज़री ब्रांड को टक्कर देने का माद्दा रखते हैं। सोशल मीडिया पर उनके इस कदम की सराहना करते हुए फैंस उन्हें “सच्चा मेक इन इंडिया एंबेसडर” बता रहे हैं।

परिवार की मौजूदगी ने बढ़ाया उत्साह

इस गौरवशाली क्षण के साक्षी बनने के लिए आर माधवन की पत्नी सरिता माधवन और उनके अंतरराष्ट्रीय स्तर के तैराक बेटे वेदांत माधवन भी दर्शक दीर्घा में मौजूद थे। जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने माधवन के नाम की घोषणा की, तो पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। पुरस्कार प्राप्त करने के बाद माधवन ने बेहद शालीनता से राष्ट्रपति का आभार व्यक्त किया। सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा करते हुए माधवन ने लिखा कि यह सम्मान उनके जीवन के सबसे भावुक और प्रेरणादायी क्षणों में से एक है। उन्होंने इस सम्मान को भारतीय सिनेमा, अपने प्रशंसकों और अपने माता-पिता को समर्पित किया।

सिनेमा में बेमिसाल सफर का सम्मान

आर माधवन को यह पद्म श्री सम्मान उनके तीन दशकों से अधिक लंबे और विविधता से भरे अभिनय करियर के लिए दिया गया है। ‘रहना है तेरे दिल में’ के लवर बॉय ‘मैडी’ से लेकर ‘थ्री इडियट्स’ के ‘फरहान’, ‘रंग दे बसंती’ के जांबाज पायलट और ‘विक्रम वेधा’ के सख्त पुलिस अफसर तक, माधवन ने हर किरदार को जीवंत किया है।हाल के वर्षों में, उन्होंने इसरो (ISRO) वैज्ञानिक नंबी नारायणन के जीवन पर आधारित फिल्म ‘रॉकेट्री: द नंबी इफेक्ट’ का लेखन, निर्देशन और अभिनय कर वैश्विक स्तर पर भारत का नाम रोशन किया। इस फिल्म को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का पुरस्कार भी मिल चुका है। सिनेमा के प्रति उनकी इसी निष्ठा और कलात्मक योगदान को भारत सरकार ने इस नागरिक सम्मान से नवाजा है।

घड़ी सिर्फ समय देखने के लिए नहीं, पहचान के लिए

आर माधवन की इस ₹40 लाख की घड़ी ने यह साबित कर दिया कि लक्ज़री का मतलब सिर्फ विदेशी ब्रांड्स का दिखावा करना नहीं होता, बल्कि अपनी जड़ों, अपनी संस्कृति और देश के हुनर पर गर्व करना होता है। पद्म श्री समारोह में उनकी यह घड़ी महज समय बताने का जरिया नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की कलात्मक क्षमता और आधुनिक तकनीकी कौशल का एक चमकता हुआ प्रतीक बनकर उभरी।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540 

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos