बिहार की राजनीति में प्रशांत किशोर (पीके) और जनता दल (यूनाइटेड) के वरिष्ठ नेता अशोक चौधरी के बीच का विवाद अब और भी गहरा होता जा रहा है। ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी ने प्रशांत किशोर को ₹100 करोड़ का मानहानि नोटिस भेजकर इस लड़ाई को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है। मंत्री ने प्रशांत किशोर पर उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने और गलत बयानी करने का आरोप लगाया है। यह नोटिस उन आरोपों के बाद आया है जिनमें पीके ने चौधरी पर पिछले दो सालों में ₹200 करोड़ की अवैध संपत्ति अर्जित करने का दावा किया था।
संपत्ति विवाद: क्या है मानव वैभव विकास ट्रस्ट का सच?
प्रशांत किशोर ने पिछले सप्ताह पटना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सनसनीखेज आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि अशोक चौधरी ने अपनी पत्नी, बेटी, समधन और एक ट्रस्ट ‘मानव वैभव विकास ट्रस्ट’ के जरिए ₹200 करोड़ की जमीनें खरीदी हैं। पीके के अनुसार, इस ट्रस्ट का वित्तीय प्रबंधन (ट्रेजरी) अशोक चौधरी की सांसद बेटी शांभवी चौधरी की सास अनिता कुणाल के पास है। इन गंभीर आरोपों के जवाब में अशोक चौधरी ने प्रशांत किशोर से सबूत मांगे हैं और धमकी दी है कि अगर वह अपने दावों को साबित नहीं कर पाए तो उन्हें अदालत का सामना करना पड़ेगा।
पुरानी लड़ाई: पहले भी हो चुकी है मानहानि की जंग
यह पहली बार नहीं है जब इन दोनों के बीच कानूनी लड़ाई छिड़ी है। बीते जून में भी अशोक चौधरी ने प्रशांत किशोर पर मानहानि का केस दायर किया था। उस समय प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया था कि अशोक चौधरी ने अपनी बेटी शांभवी चौधरी को लोकसभा चुनाव में टिकट दिलाने के लिए पैसों का लेन-देन किया था।
समस्तीपुर की जीत: क्या है टिकट खरीदने के आरोपों का सच?
शांभवी चौधरी ने लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के टिकट पर समस्तीपुर से चुनाव लड़ा था और वह जीत कर सांसद बनी थीं। इन आरोपों को अशोक चौधरी ने सिरे से खारिज करते हुए इसे उनकी छवि खराब करने की कोशिश बताया है। ₹100 करोड़ के इस नए मानहानि नोटिस ने एक बार फिर दोनों के बीच की कटुता को उजागर कर दिया है, और यह देखना दिलचस्प होगा कि यह कानूनी लड़ाई आगे क्या मोड़ लेती है।
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