क्या है जन्म-मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक 2026, अब Birth Certificate के New Rule हुए सख्त

The CSR Journal Magazine
लोकसभा ने शुक्रवार को विपक्ष के भारी हंगामे और नारेबाजी के बीच जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 को ध्वनि मत से पारित कर दिया। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय द्वारा पेश इस विधेयक का उद्देश्य जन्म और मृत्यु पंजीकरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और समयबद्ध बनाना है। नए कानून के तहत एक से दो वर्ष की देरी से जन्म या मृत्यु का पंजीकरण अब केवल जिला मजिस्ट्रेट (DM), उप मंडल मजिस्ट्रेट (SDM) या अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अनुमति से ही कराया जा सकेगा।

देर से पंजीकरण के नियम हुए कड़े

सरकार का कहना है कि संशोधन का उद्देश्य फर्जी पंजीकरण पर रोक लगाना और जन्म-मृत्यु रिकॉर्ड को अधिक विश्वसनीय बनाना है। नए प्रावधानों के तहत तय समय सीमा के बाद पंजीकरण के लिए सक्षम मजिस्ट्रेट की मंजूरी अनिवार्य होगी, जिससे रिकॉर्ड की पारदर्शिता और प्रमाणिकता सुनिश्चित की जा सके।

हंगामे के बीच ध्वनि मत से पारित हुआ विधेयक

विधेयक पर चर्चा शुरू होने से पहले ही विपक्षी सांसदों ने सदन में जोरदार हंगामा किया। लगातार नारेबाजी के बीच सरकार ने विधेयक को ध्वनि मत से पारित करा लिया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि विपक्ष के हंगामे के कारण महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा नहीं हो सकी और उन्होंने विपक्ष के रवैये पर सवाल उठाए। विधेयक पारित होने के बाद लोकसभा की कार्यवाही सोमवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

इस बिल में क्या बदलाव किए गए हैं?

1. एक साल तक की देरी

यदि जन्म या मृत्यु का पंजीकरण निर्धारित समय सीमा के बाद लेकिन एक वर्ष के भीतर कराया जाता है, तो मौजूदा नियमों के अनुसार निर्धारित प्रक्रिया और सक्षम अधिकारी की अनुमति से पंजीकरण कराया जा सकेगा।

2. एक से दो साल की देरी पर नया नियम

सबसे बड़ा बदलाव यही है। अब यदि घटना के एक से दो वर्ष बाद जन्म या मृत्यु दर्ज करानी है, तो केवल जिला मजिस्ट्रेट (DM), उप मंडल मजिस्ट्रेट (SDM) या सरकार द्वारा अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद ही पंजीकरण होगा। पहले इस स्तर पर प्रक्रिया अपेक्षाकृत सरल थी।

3. दो साल से अधिक देरी

यदि जन्म या मृत्यु दो वर्ष से अधिक समय बाद दर्ज करानी है, तो अब भी प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate First Class – JMFC) के आदेश के बाद ही पंजीकरण संभव होगा। इस प्रावधान में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है।

सरकार ने यह बदलाव क्यों किया?

सरकार के अनुसार फर्जी जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्रों पर रोक लगेगी। समय पर पंजीकरण को बढ़ावा मिलेगा। सरकारी रिकॉर्ड अधिक विश्वसनीय होंगे। जन्म प्रमाणपत्र एक महत्वपूर्ण कानूनी पहचान दस्तावेज है, इसलिए उसका सही और समय पर पंजीकरण जरूरी है।

आम लोगों पर इसका क्या असर होगा?

बच्चे का जन्म या किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर समय पर पंजीकरण कराना पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगा। यदि किसी कारण से एक वर्ष से अधिक देरी होती है, तो अतिरिक्त प्रशासनिक मंजूरी लेनी पड़ेगी।इससे प्रक्रिया लंबी हो सकती है, इसलिए समय पर पंजीकरण कराना सबसे आसान विकल्प होगा।

विपक्ष की आपत्ति क्या रही?

लोकसभा में यह विधेयक विपक्ष के हंगामे के बीच बिना चर्चा के ध्वनि मत से पारित हुआ। विपक्ष ने विधेयक की धाराओं पर विस्तृत चर्चा नहीं होने पर सवाल उठाए, जबकि सरकार का कहना है कि यह संशोधन केवल पंजीकरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए है।
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