नोएडा में श्रमिकों के लिए श्रम कानून बने नाकाम, क्या है असली वजह?

The CSR Journal Magazine
भारत में श्रम कानूनों की स्थिति पिछले तीन दशकों से खासी कमजोर हुई है। पहले श्रम कानूनों का पालन सख्ती से होता था, लेकिन आज MSME क्षेत्र में दी गई छूटों ने श्रमिकों के अधिकारों को प्रभावित किया है। नए श्रम कानूनों के लागू होने के बावजूद, ठेका श्रमिकों को न्यूनतम वेतन, PF और ESI जैसी बुनियादी सुविधाएं ठीक से नहीं मिल रही हैं।

श्रमिक विरोधी राज्य नीतियां

छोटे उद्योगों के लिए बने विशेष कानूनों से राज्यों को व्यापक अधिकार मिले हैं। MSME को कई श्रम कानूनों से छूट मिली है, जिसमें छंटनी और कारखाने बंद करने का अधिकार शामिल है। इसके चलते श्रमिकों के बीच असंतोष बढ़ रहा है, क्योंकि उन्हें उचित सुविधाएं नहीं मिल रहीं।

बिना PF और ESI

मजदूरी की बात करें तो MSME के मालिक कम दरों पर सरकार से कर्ज लेते हैं, लेकिन श्रमिकों से कटौती करना जारी रखते हैं। इस स्थिति में, मजदूरों को न तो PF मिलता है और न ही ESI की सुविधा। अक्सर उनके पुराने नियोक्ता पे स्लिप भी नहीं देते, जिससे मजदूरों का पैसा फंस जाता है।

श्रम विभाग की भूमिका

राज्य सरकार के श्रम विभाग को श्रमिकों के हक की रक्षा करनी चाहिए, लेकिन जब सरकार उद्योगों की आकांक्षाओं में सहयोग करती है, तब श्रम विभाग के लिए स्थिति जटिल हो जाती है। नोएडा में श्रम विभाग को केवल सरकार के निर्देशों का पालन करने की बाध्यता है।

फैक्ट्री मालिकों की दिक्कतें

फैक्ट्री मालिकों का कहना है कि श्रमिकों का PF और ESI देना उनकी जिम्मेदारी है। लेकिन जब मजदूर कुशल हो जाते हैं, वे तेजी से बेहतर वेतन की तलाश में निकल जाते हैं, जिससे मालिक ठेकेदारों पर निर्भर रहने लगते हैं। ठेकेदार अक्सर अपने मजदूरों को वेतन नहीं देते।

संगठित श्रमिकों का महत्व

संगठित श्रमिक सशक्त होते थे और उनके सामने आने वाली परेशानियों का हल तत्काल किया जाता था। लेकिन अब श्रम कानूनों की धज्जियाँ उड़ा दी गई हैं। सरकारें अलग-अलग नीतियाँ बनाकर श्रमिकों की बुनियादी आवश्यकताओं को नकार रही हैं।

मजदूरों की वर्तमान स्थिति

नोएडा में हाल के श्रमिक आंदोलनों ने सरकार का ध्यान खींचा है और इसके परिणामस्वरूप न्यूनतम मजदूरी में वृद्धि की गई है। हालांकि, पड़ोसी राज्य दिल्ली में मजदूरी दरें अभी भी उच्च हैं, जो श्रमिकों के लिए एक और चुनौती बनती हैं।

मनरेगा बनता बेहतर विकल्प

हरियाणा और दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में मजदूरी अधिक होने के कारण उत्तर प्रदेश के मजदूर वहां जाने की राह देख रहे हैं। मनरेगा (अब G-RAMG) के जरिए उन्हें अच्छी मजदूरी और मुफ्त राशन मिल सकते हैं। इसी कारण नोएडा के श्रमिक गांव जाने की सोच रहे हैं।

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