उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले स्थित पौराणिक लोधेश्वर महादेव धाम (महादेवा) अब नए स्वरूप में नजर आएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 20 जुलाई 2026 को मंदिर पहुंचकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना और रुद्राभिषेक किया। इसके बाद उन्होंने 48.79 करोड़ रुपये की लागत वाली लोधेश्वर महादेव कॉरिडोर परियोजना का शिलान्यास किया। राज्य सरकार का उद्देश्य लोधेश्वर महादेव धाम को काशी विश्वनाथ धाम और अयोध्या धाम की तर्ज पर विकसित करना है, जिससे यहां आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिले।
15 एकड़ में विकसित होगा भव्य कॉरिडोर
लोधेश्वर महादेव कॉरिडोर परियोजना करीब 15 एकड़ क्षेत्र में विकसित की जाएगी। योजना के तहत मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। परियोजना में श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक प्रवेश द्वार, कवर्ड कॉरिडोर, क्लॉक रूम, मेडिकल स्टोर, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, प्रतीक्षालय, शौचालय, स्नानघर, पार्किंग और अन्य जरूरी सुविधाओं का निर्माण कराया जाएगा।
श्रद्धालुओं को मिलेंगी बेहतर सुविधाएं
सावन, महाशिवरात्रि और अन्य धार्मिक अवसरों पर लोधेश्वर महादेव धाम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। कॉरिडोर बनने के बाद श्रद्धालुओं को दर्शन, आवागमन और ठहरने से जुड़ी सुविधाओं में काफी सुधार मिलेगा। सरकार का मानना है कि यह परियोजना बाराबंकी को धार्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाएगी।
लोधेश्वर महादेव धाम का धार्मिक महत्व
लोधेश्वर महादेव धाम उत्तर प्रदेश के प्रमुख शिव तीर्थ स्थलों में शामिल है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां स्थापित स्वयंभू शिवलिंग 52 दुर्लभ शिवलिंगों में से एक माना जाता है। पौराणिक कथाओं में भगवान वराह, लव-कुश और पांडवों द्वारा यहां भगवान शिव की आराधना किए जाने का उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि मंदिर का नाम पंडित लोधेराम अवस्थी के नाम पर पड़ा, जिन्हें भगवान शिव के दर्शन स्वप्न में हुए थे।
अक्टूबर 2027 तक पूरा होगा निर्माण
राज्य सरकार ने कॉरिडोर परियोजना को अक्टूबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। निर्माण पूरा होने के बाद यहां आने वाले श्रद्धालुओं को आधुनिक और व्यवस्थित सुविधाएं मिलेंगी। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने और क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है।
परियोजना की खास बातें
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परियोजना की कुल लागत 48.79 करोड़ रुपये है।
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करीब 15 एकड़ क्षेत्र में विकसित होगा कॉरिडोर।
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श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
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अक्टूबर 2027 तक निर्माण पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

