NCPI को मिला नया अध्यक्ष, क्या लोकसभा स्पीकर ओम बिरला मानेंगे TMC के बागी सांसदों की अपील?
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी सांसदों के मामले में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला विद्रोही और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले मूल गुट, दोनों पक्षों को सुनने के बाद ही कोई अंतिम फैसला लेंगे। इस बीच, टीएमसी के अलग हुए गुट ने जिस पार्टी में विलय का दावा किया है, उस नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) ने ज्योतिप्रकाश चटर्जी को अपना नया अध्यक्ष घोषित कर दिया है।
TMC में बगावत के बीच बड़ा बदलाव
राष्ट्रीय स्वयंसेवक पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) ने अपने नए अध्यक्ष ज्योतिप्रकाश चटर्जी को नियुक्त किया है। इस नियुक्ति के बाद यह सवाल उठता है कि क्या लोकसभा स्पीकर ओम बिरला बागी सांसदों की अपील पर ध्यान देंगे। सूत्रों के अनुसार, बिरला दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद ही कोई निर्णय लेंगे। टीएमसी से बगावत की इस घड़ी में, पार्टी के भविष्य के लिए यह फैसला अहम होगा।
बागी सांसदों की स्थिति क्या है?
काकोली घोष दस्तीदार की अगुवाई में टीएमसी के बागी सांसदों ने ओम बिरला से मुलाकात की है। काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में टीएमसी के 20 लोकसभा सदस्यों ने ‘नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI) में विलय की घोषणा की है। उन्होंने दावा किया कि असंतुष्ट सांसदों की संख्या बढ़कर 22 तक पहुंच सकती है। स्पीकर ओम बिरला ने स्पष्ट किया है कि वे दलबदल विरोधी कानून और विलय की वैधता पर फैसला सुनाने से पहले दोनों गुटों (ममता बनर्जी गुट और बागी गुट) की दलीलें सुनेंगे।
जवाबदेही की जरूरत
सदन के मानसून सत्र की शुरुआत जुलाई के तीसरे हफ्ते में होगी। ऐसे में स्पीकर की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वह इस मामले को सही से देखे। स्पीकर को केंद्र सरकार की कानूनी राय लेने की आवश्यकता पड़ी, ताकि किसी भी संभावित कानूनी बाधा से बचा जा सके। यदि बागी सांसदों को मान्यता दी जाती है, तो यह एनडीए गठबंधन में भी महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है।
टीम में बदलाव और ममता बनर्जी का रुख
काकोली घोष ने कहा है कि NCPI ने सभी बागी सांसदों को अपने में समाहित करने के लिए सहमति दे दी है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि उनका बागी सांसद गुट पश्चिम बंगाल विधानसभा के बागी विधायकों से कोई लेना-देना नहीं रखता। विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस ने उस गुट को पहले ही मान्यता दे दी थी, जिससे का स्पीकर का निर्णय और भी महत्वपूर्ण हो गया है।
अभिषेक बनर्जी का विरोध
टीएमसी के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर मांग की है कि इस अलग हुए गुट को किसी भी प्रकार की आधिकारिक मान्यता, दर्जा या सुविधाएं न दी जाएं। उन्होंने इसे दलबदल कानून का उल्लंघन बताया है।
मतभेद और संगठन के भीतर की स्थिति
हालांकि, ज्योतिप्रकाश चटर्जी की अध्यक्षता पर एनसीपीआई के संगठन महासचिव शांतनु डे ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें चटर्जी की नियुक्ति के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। डे ने इसे लेकर अपनी निराशा व्यक्त की है कि उन्हें अंधेरे में रखा गया है। एनसीपीआई की स्वतंत्रता और समर्पण पर उठते सवाल अब पार्टी के भीतर नयी चर्चाओं को जन्म दे रहे हैं।
संसदीय समीकरणों पर असर
यदि लोकसभा स्पीकर बागी सांसदों के समूह को NCPI के सदस्य के रूप में मान्यता दे देते हैं, तो यह पार्टी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का हिस्सा बन जाएगी। इससे लोकसभा में एनडीए की ताकत 294 से बढ़कर 314 सीटों तक पहुंच सकती है। बागी सांसदों ने यह भी स्पष्ट किया है कि उनका पश्चिम बंगाल विधानसभा के बागी विधायकों के समूह से कोई सीधा संबंध नहीं है, जिन्हें वहां के विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस पहले ही अलग गुट के रूप में मान्यता दे चुके हैं। ऐसे में, यह देखना दिलचस्प होगा कि ममता बनर्जी का नेतृत्व कैसा रहेगा और भविष्य में यह राजनीतिक समीकरण किस दिशा में बढ़ता है।
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