National Anti Terror Policy Prahaar Launched: देश में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को नई दिशा देते हुए गृह मंत्रालय ने सोमवार को भारत की पहली राष्ट्रीय आतंकवाद-विरोधी नीति जारी की। ‘प्रहार’ (PRAHAAR) नाम से जारी इस 8 पेज की नीति में आतंकी हमलों को रोकने, खुफिया तंत्र को मजबूत करने और खतरे के मुताबिक तेज व संतुलित जवाब देने की रणनीति तय की गई है। नीति के प्रस्तावना भाग में कहा गया है कि कुछ पड़ोसी देशों ने आतंकवाद को सरकारी नीति के औजार की तरह इस्तेमाल किया है। हालांकि भारत आतंकवाद को किसी धर्म, जाति, देश या सभ्यता से जोड़कर नहीं देखता।
National Anti Terror Policy Prahaar Launched: इंटरनेट और कट्टरपंथ पर कड़ा फोकस
‘प्रहार’ में स्पष्ट किया गया है कि आतंकी संगठन इंटरनेट का इस्तेमाल संपर्क, भर्ती और जिहाद के महिमामंडन के लिए कर रहे हैं। एन्क्रिप्शन, डार्क वेब और क्रिप्टो वॉलेट जैसी नई तकनीकों को बड़ी चुनौती बताया गया है। नीति में कहा गया है कि आतंकवाद को किसी भी धार्मिक, वैचारिक या जातीय आधार पर सही नहीं ठहराया जा सकता। सरकार ने अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति दोहराते हुए कहा है कि आतंकवाद के हर स्वरूप की कड़ी निंदा की जाएगी और उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
National Anti Terror Policy Prahaar Launched: खुफिया आधारित संरचना और एजेंसियों में तालमेल
नीति में आतंकवाद से निपटने के लिए एक व्यवस्थित और इंटेलिजेंस-आधारित ढांचे का उल्लेख है। इसमें Intelligence Bureau के तहत काम करने वाले मल्टी एजेंसी सेंटर (MAC) और जॉइंट टास्क फोर्स ऑन इंटेलिजेंस (JTFI) की अहम भूमिका बताई गई है। JTFI देशभर में रियल-टाइम खुफिया जानकारी साझा करने और संयुक्त कार्रवाई सुनिश्चित करने का काम करते हैं। ‘प्रहार’ में विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और साझा ऑपरेशन पर जोर दिया गया है।
थल, जल और नभ—तीनों मोर्चों पर तैयारी
नीति में कहा गया है कि भारत को जमीन, पानी और हवा—तीनों क्षेत्रों में आतंकी खतरे का सामना है। सीमा सुरक्षा बलों को आधुनिक तकनीक और उपकरणों से लैस किया गया है। बिजली, रेलवे, विमानन, बंदरगाह, रक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की सुरक्षा क्षमता बढ़ाने पर भी बल दिया गया है। CBRNED (रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल, परमाणु, विस्फोटक और डिजिटल) सामग्री तक पहुंच रोकना अभी भी बड़ी चुनौती बताया गया है।
समाज की भागीदारी और मानवाधिकार पर जोर
‘प्रहार’ में आतंकवाद के खिलाफ पूरे समाज की भागीदारी वाला दृष्टिकोण अपनाने की बात कही गई है। नीति मानवाधिकार और कानून के शासन पर आधारित प्रक्रियाओं का पालन करने पर जोर देती है। साथ ही कट्टरपंथ जैसे हालात को खत्म करने और आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले कारणों को कम करने की रणनीति भी शामिल है। नीति में Al-Qaeda और Islamic State जैसे वैश्विक आतंकी संगठनों के खतरे का उल्लेख किया गया है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और समन्वय बढ़ाने की जरूरत पर बल दिया गया है।
क्या है ‘प्रहार’ का मुख्य उद्देश्य?
राष्ट्रीय आतंकवाद-विरोधी नीति का मूल उद्देश्य भारतीय नागरिकों और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसके तहत—
आतंकी हमलों की रोकथाम
खतरे के अनुरूप तेज और संतुलित जवाब
एजेंसियों की ताकत को समेकित करना
तकनीकी और डिजिटल चुनौतियों से निपटना
सरकार का मानना है कि ‘प्रहार’ भारत की सुरक्षा रणनीति को एकीकृत, सक्रिय और भविष्य उन्मुख ढांचा प्रदान करेगा। लंबे समय से सीमा पार प्रायोजित आतंकवाद से जूझ रहे देश के लिए यह नीति एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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