महाराष्ट्र के नासिक में स्थित त्र्यंबकेश्वर महादेव का मंदिर एक ज्योतिर्लिंग तो है लेकिन यह बाकी सभी ज्योतिर्लिंगों से कई कारणों से काफी अलग है। यहां भगवान शिव का सिर्फ एक लिंग स्वरूप नहीं बल्कि त्रिदेव की पूजा की जाती है। त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के नासिक शहर से 28 किमी की दूरी पर स्थित है। यह मंदिर गोदावरी और गौतमी नदी के तट पर बना हुआ है, जहां हर 12 सालों में कुंभ का मेला लगता है। मंदिर के ठीक पीछे एक अमृत कुंड भी है। इस मंदिर की महिमा का बखान नासिक के हर एक निवासी के मुख से सुना जा सकता है। मंदिर पूरी तरह से काले पत्थरों से निर्मित है। इस मंदिर का निर्माण करने में करीब 30 सालों का समय लग गया था। मंदिर साल के सभी दिन खुला रहता है लेकिन सावन और शिवरात्रि के समय इस मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।
क्यों अलग है त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग Special About Trimbakeshwar Jyotirling
भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग काफी अलग है। इसकी कई खासियतें हैं। सबसे बड़ी खासियत है कि यहां सिर्फ भगवान शिव का ज्योतिर्लिंग ही नहीं बल्कि त्रिदेव की पूजा होती है। हर ज्योतिर्लिंग में महादेव के शिवलिंग की ही पूजा होती होती है लेकिन विश्व का एकमात्र ज्योतिर्लिंग त्र्यंबकेश्वर है, जहां तीनों देव ब्रह्मा, विष्णु और रुद्र तीनों की पूजा है। इसके अलावा त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग की एक खासियत यह भी है कि यहां कोई शिवलिंग नहीं बल्कि एक गड्ढा है, जिसमें तीन छोटे-छोटे अंगूठे के आकार के लिंग स्वरूप स्थापित हैं। भक्त इन्हीं लिंग स्वरूपों की पूजा ब्रह्मा, विष्णु और महेश के रूप में करते हैं। भोर के समय पूजा करने के बाद इन पर चांदी का पंचमुखी मुकुट चढ़ा दिया जाता है। मंदिर में खास तौर पर कालसर्प दोष की पूजा करवाने वाले भक्त काफी संख्या में पहुंचते हैं।
औरंगजेब ने 1690 में त्र्यंबकेश्वर मंदिर के अंदर मौजूद शिवलिंग को तुड़वा दिया था
त्र्यंबकेश्वर मंदिर की वास्तुकला त्र्यंबकेश्वर मंदिर की वास्तुकला मराठा शिल्पकला का शानदार उदाहरण है। मंदिर में भक्त विभिन्न प्रकार के अनुष्ठान व पूजा करवाकर त्रिदेवों को खुश करने का प्रयास करते हैं। संपूर्ण मंदिर का निर्माण का काले पत्थरों से की गयी है। बताया जाता है कि मुगल शासक औरंगजेब (Trimbakeshwar Jyotirling Aurangzeb) ने 1690 में नाशिक के त्र्यंबकेश्वर मंदिर के अंदर मौजूद शिवलिंग को तुड़वा दिया था। मंदिर को नुकसान पंहुचाने के अलावा मंदिर के ऊपर मस्जिद का गुंबद भी बना दिया था। इतना ही नहीं उसने नासिक का नाम भी बदल दिया था लेकिन 1751 में मराठों का फिर से नासिक पर कब्जा होने के बाद इस मंदिर का पुनर्निर्माण कराया गया।
कैसे पहुंचे त्र्यंबकेश्वर मंदिर
इस मंदिर से सबसे नजदीकी एयरपोर्ट मुंबई एयरपोर्ट है। वहीं सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन इगतपुरी रेलवे स्टेशन है। दोनों जगहों से आप बस या टैक्सी लेकर Trimbakeshwar Jyotirling पहुंच सकते हैं। मंदिर सुबह 5 बजे से रात को 8 बजे तक खुली रहती है। गर्भगृह में काफी नीचे त्रिदेव के लिंग स्वरूप स्थापित हैं, इसलिए भक्तों की सुविधा के लिए सामने ही आईना भी लगाया गया है। इसके साथ ही हर सोमवार की शाम को 4 से 5 बजे तक त्रिदेव के चारों ओर एक रत्न जड़ित मुकुट रखा जाता है, जिसमें हीरा, पन्ना व अन्य बेशकीमती रत्न लगे होते हैं।
Actor Seeks Blessings at Sacred Shiva Shrine in Maharashtra
Actor Ananya Panday recently visited the renowned Trimbakeshwar temple in Maharashtra, where she offered prayers and...