‘अपनी धरती का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों के लिए नहीं होने देंगे’-म्यांमार का भारत को बड़ा आश्वासन

The CSR Journal Magazine

भारत-म्यांमार रिश्ते: राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग का पीएम मोदी को भरोसा

म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग ने भारत को आधिकारिक रूप से आश्वासन दिया है कि म्यांमार की धरती का इस्तेमाल भारत के सुरक्षा हितों के खिलाफ किसी भी गतिविधि के लिए नहीं होने दिया जाएगा। 1 जून 2026 को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई एक उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठक में यह प्रतिबद्धता जताई गई। इस साल अप्रैल में कार्यभार संभालने के बाद राष्ट्रपति ह्लाइंग की यह पहली विदेश यात्रा है।

म्यांमार ने दिए सुरक्षा के पुख्ता वादे

म्यांमार के राष्ट्रपति जनरल मिन आंग ह्लाइंग, जो हाल ही में चार दिवसीय दौरे पर भारत आए थे, ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भरोसा दिया है कि उनकी भूमि का इस्तेमाल भारत के खिलाफ नहीं होने दिया जाएगा। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने इस महत्वपूर्ण जानकारी को साझा किया। यह आश्वासन दोनों देशों के बीच बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के बीच आया है।

सुरक्षा मुद्दों पर गहन चर्चा

भारत और म्यांमार के बीच सुरक्षा संबंधों को सुदृढ़ करने के लिए दोनों देशों के राजनयिकों ने गहन चर्चा की। म्यांमार की सेना प्रमुख द्वारा दिया गया यह आश्वासन भारत के लिए महत्वपूर्ण है, जहाँ सीमा पर सुरक्षा स्थिति हमेशा एक चिंतन का विषय रही है। द्विपक्षीय वार्ता में विभिन्न सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा हुई, जिसमें सीमा पार आतंकवाद पर काबू पाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

भारत-म्यांमार की भौगोलिक स्थिति

भारत और म्यांमार की जमीनी सीमा पर एक लंबी सामरिक स्थिति है, जिससे दोनों देशों के लिए आपसी संबंधों का बने रहना बहुत आवश्यक है। म्यांमार की भूमि का इस्तेमाल यदि भारत के खिलाफ होता है, तो इससे क्षेत्रीय सुरक्षा में समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। यह असुरक्षा का माहौल दोनों देशों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

सुरक्षा और सीमा प्रबंधन

भारत ने उत्तर-पूर्वी राज्यों (जैसे मणिपुर और नागालैंड) से जुड़े विद्रोही समूहों द्वारा म्यांमार की धरती को सुरक्षित ठिकाने के रूप में इस्तेमाल करने की चिंता उठाई थी, जिस पर राष्ट्रपति ह्लाइंग ने कड़ा आश्वासन दिया। दोनों देशों के बीच रक्षा, सुरक्षा और सीमा प्रबंधन तंत्र को और मजबूत करने पर सहमति बनी है। दोनों देश लगभग 1,640 किलोमीटर लंबी संवेदनशील सीमा साझा करते हैं, जहां शांति बनाए रखना दोनों देशों की आंतरिक सुरक्षा के लिए बेहद अहम है।

राजनयिक संबंध और व्यापार

भारत और म्यांमार के बीच राजनयिक संबंध मजबूत करने के लिए कई व्यापारिक अवसरों पर भी चर्चा की गई। म्यांमार से भारत तक कई व्यापारिक गलियारे स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है। द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने की जरूरत है। इस दिशा में कई कदम उठाए जा रहे हैं।

कूटनीतिक और क्षेत्रीय मुद्दे, शांति प्रक्रिया का समर्थन

पीएम मोदी ने म्यांमार की संप्रभुता का समर्थन किया और वहां सभी हितधारकों को शामिल करते हुए बातचीत के जरिए शांति और राष्ट्रीय सुलह स्थापित करने पर जोर दिया। विदेश सचिव विक्रम मिस्री के अनुसार, बैठक में म्यांमार की पूर्व नेता आंग सान सू की की निरंतर हिरासत का मुद्दा भी उठाया गया। भारत ने म्यांमार के अवैध साइबर केंद्रों में फंसे करीब 150 से अधिक भारतीय नागरिकों को सुरक्षित वापस लाने का मुद्दा उठाया।

व्यापार, ऊर्जा और संस्कृति-आर्थिक भागीदारी

दोनों पक्षों ने कृषि-प्रसंस्करण, पेट्रोलियम, ऊर्जा और खनन क्षेत्रों में व्यापार और निवेश बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा की। भारत ने म्यांमार के छात्रों के लिए मेकांग-गंगा आईसीसीआर (ICCR) वार्षिक छात्रवृत्तियों की संख्या 36 से बढ़ाकर 100 करने की घोषणा की। राष्ट्रपति ह्लाइंग ने अपने दौरे की शुरुआत बोधगया में महाबोधि मंदिर के दर्शन से की, जो दोनों देशों के बीच गहरे बौद्ध और सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाता है।

सामाजिक और ऐतिहासिक संबंधों की बात

भारत और म्यांमार के बीच केवल राजनीतिक और कारोबार संबंध ही नहीं, बल्कि गहरे सामाजिक और ऐतिहासिक संबंध भी हैं। दोनों देशों की सांस्कृतिक धरोहरों में भी एकता देखने को मिलती है। इस यात्रा के दौरान राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग ने भारतीय संस्कृति और परंपराओं की सराहना की और इसे आगे बढ़ाने की इच्छा जताई।

भविष्य की दिशा

भारत-म्यांमार के संबंधों की दिशा भविष्य में बहुत महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। सुरक्षा, व्यापार और संस्कृति के साथ-साथ इन दोनों देशों की साझेदारी को नए आयाम देने की संभावनाएँ हैं। ऐसे में म्यांमार का भारत के प्रति यह सकारात्मक रुख दोनों देशों के लिए लाभकारी हो सकता है।

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