शिवसेना का 60वां स्थापना दिवस: शिंदे और उद्धव गुट की अलग-अलग रैली, बागी सांसद पहुंच सकते हैं

The CSR Journal Magazine

मुंबई में दो धड़े की भव्य रैली

आज शिवसेना का 60वां स्थापना दिवस मनाया जा रहा है। इस अवसर पर एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे गुट मुंबई में अलग-अलग रैलियों का आयोजन करेंगे। उद्धव गुट का कार्यक्रम सायन के षणमुखानंद हॉल में होगा, जबकि शिंदे गुट गोरेगांव के नेस्को सेंटर में रैली करेगा। इस बार का स्थापना दिवस खास है क्यूंकि शिवसेना (UBT) के 9 में से 6 सांसदों ने पार्टी के खिलाफ बगावत कर दी है। गुरुवार को इन सांसदों ने संसदीय दल की बैठक में हिस्सा नहीं लिया और लोकसभा स्पीकर को पत्र सौंपकर बागी होने का कारण बताया।

बागी सांसदों की उपस्थिति का असर

शिंदे गुट के कार्यक्रम की सबसे बड़ी चर्चा इन 6 बागी सांसदों की उपस्थिति को लेकर हो रही है। माना जा रहा है कि वे नेस्को सेंटर में आयोजित रैली में शामिल हो सकते हैं, हालाँकि इस पर अभी तक कोई पुष्टि नहीं हुई है। स्थापना दिवस से पहले, शिंदे गुट ने मुंबई में बड़े पैमाने पर पोस्टर और बैनर लगाए हैं, जिन पर बालासाहेब ठाकरे और एकनाथ शिंदे की तस्वीरें शामिल हैं। वहीं, उद्धव ठाकरे गुट ने भी राज्यभर से कार्यकर्ताओं को मुंबई बुलाया है।

मुख्य कारणों का खुलासा

बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को सौंपे पत्र में दावा किया है कि कुछ वरिष्ठ नेता पार्टी का कांग्रेस में विलय करना चाहते थे। उनका कहना है कि उद्धव ठाकरे पार्टी की मूल विचारधारा से भटक गए हैं, इसलिए अलग होना जरूरी है। शिवसेना नेता चंद्रकांत खैरे ने कहा है कि ये सांसद शिंदे गुट में शामिल हो चुके हैं और इसे महाराष्ट्र में चल रहे “ऑपरेशन टाइगर” का एक हिस्सा बताया।

दूसरी बार पार्टी में हुई टूट

यह बगावत पिछले चार साल में शिवसेना के लिए दूसरी बड़ी टूट है। जून 2022 में एकनाथ शिंदे ने 39 विधायकों के साथ बगावत की थी, जिससे शिवसेना दो हिस्सों में बंट गई थी। इसके बाद चुनाव आयोग ने शिंदे गुट को शिवसेना नाम और धनुष-बाण चुनाव चिन्ह दिया था। अब 6 सांसदों की बगावत को भी एक महत्वपूर्ण घटना माना जा रहा है।

दल-बदल कानून की अहमियत

लोकसभा में शिवसेना (UBT) के 9 सांसद हैं। दल-बदल कानून के तहत किसी दल में टूट के बाद अयोग्यता से बचने के लिए कम से कम दो-तिहाई सांसदों का समर्थन होना आवश्यक है। इसका मतलब है कि यदि 9 में से 6 सांसद अलग होने का फैसला करते हैं, तो वे खुद को वैध गुट के रूप में स्थापित कर सकते हैं। यह राजनीतिक और कानूनी तरीके से बेहद महत्वपूर्ण है।

पिछले चार दिन में मुख्य घटनाक्रम

पिछले चार दिनों में कई राजनीतिक घटनाक्रम हुए हैं। 18 जून को उद्धव ठाकरे ने संसदीय दल की बैठक बुलाई, जिसमें 6 सांसद गैरहाजिर रहे। सांसदों ने स्पीकर को पत्र सौंपकर अपनी बगावत की वजह बताई। 17 जून को शिंदे गुट के नेताओं ने दावा किया कि 6 सांसद अलग गुट बनाने के लिए सहमत हो चुके हैं। विभिन्न शहरों से सांसदों को दिल्ली लाया गया। यह सब राजनीतिक हलचलें वर्तमान सियासी परिदृश्य में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती हैं।

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