आठ महीने बाद पटरी पर लौटेगी मोनोरेल, मुंबई के ट्रैफिक संकट का नया समाधान

The CSR Journal Magazine

 मुंबई मोनोरेल की वापसी: 8 महीने बाद फिर दौड़ेगी ‘सफेद ट्रेन’, मेट्रो 2B और एक्वा लाइन से जुड़ेगा सफर

मुंबई की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में लंबे समय से ठहरी हुई मुंबई मोनोरेल अब एक बार फिर पटरी पर लौटने जा रही है। लगभग आठ महीने तक बंद रहने के बाद मुंबई मोनोरेल सेवा मई 2026 के अंत तक दोबारा शुरू होने की तैयारी में है। इसके साथ ही शहर की दो बड़ी मेट्रो परियोजनाओं- मेट्रो लाइन 2B और एक्वा लाइन 3 के साथ इसका एकीकरण भी तेजी से पूरा किया जा रहा है। इससे मुंबई के पूर्वी उपनगरों से दक्षिण मुंबई तक यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण यानी MMRDA ने मोनोरेल कॉरिडोर की तकनीकी और सुरक्षा जांच लगभग पूरी कर ली है। 19.54 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर पर अंतिम वैधानिक सुरक्षा निरीक्षण किया जा रहा है। यह निरीक्षण सरकार द्वारा नियुक्त सेवानिवृत्त कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) अधिकारी करेंगे। उनकी मंजूरी मिलने के बाद आम यात्रियों के लिए सेवाएं फिर शुरू कर दी जाएंगी।

आखिर क्यों बंद हुई थी मोनोरेल?

मुंबई मोनोरेल को 20 सितंबर 2025 को बंद कर दिया गया था। लगातार तकनीकी खराबियां, बार-बार ट्रेन रुकने की घटनाएं और रखरखाव से जुड़ी समस्याओं के कारण यात्रियों का भरोसा कमजोर पड़ गया था। कई मौकों पर यात्रियों को घंटों ट्रैक पर फंसे रहना पड़ा था। इसके बाद MMRDA ने पूरे सिस्टम को अपग्रेड करने का फैसला लिया।  बंद अवधि के दौरान मोनोरेल नेटवर्क में बड़े स्तर पर सुधार कार्य किए गए। पुराने रैक की मरम्मत और आधुनिकीकरण किया गया, जबकि 10 नए “मेड इन इंडिया” मोनोरेल रैक भी शामिल किए गए। इसके अलावा कम्युनिकेशन बेस्ड ट्रेन कंट्रोल यानी CBTC सिग्नलिंग सिस्टम लगाया गया है, जिससे ट्रेनों की सुरक्षा और संचालन क्षमता पहले से बेहतर होगी।

अब केवल मोनोरेल नहीं, मल्टी-मोडल नेटवर्क बनेगा

मुंबई मोनोरेल की सबसे बड़ी कमजोरी यह मानी जाती रही कि यह शहर के बाकी परिवहन नेटवर्क से ठीक तरह नहीं जुड़ी थी। यही कारण था कि 3000 करोड़ रुपये की इस परियोजना का दैनिक यात्री आंकड़ा बेहद कम रहा। विशेषज्ञों के अनुसार अपने चरम समय में भी इसकी दैनिक सवारी संख्या केवल 17 से 19 हजार के बीच थी। अब MMRDA इसी कमी को दूर करने की कोशिश कर रही है। मोनोरेल को सीधे मुंबई मेट्रो नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है ताकि यात्रियों को एक ही सफर में ट्रेन बदलने की सुविधा आसानी से मिल सके।

चेंबूर में मेट्रो 2B से होगा सीधा कनेक्शन

पूर्वी मुंबई के चेंबूर इलाके में मोनोरेल स्टेशन को मुंबई मेट्रो लाइन 2B से जोड़ा जा रहा है। मेट्रो 2B का पहला चरण डायमंड गार्डन से मंडाले तक चालू हो चुका है। यह लाइन आगे अंधेरी पश्चिम तक जाएगी और पश्चिमी तथा पूर्वी उपनगरों के बीच महत्वपूर्ण संपर्क प्रदान करेगी। MTNL जंक्शन के पास मोनोरेल और मेट्रो 2B का इंटरचेंज स्टेशन बनाया जा रहा है। इससे चेंबूर, मानखुर्द, घाटकोपर और अंधेरी जैसे इलाकों के यात्रियों को बिना लंबी दूरी पैदल चले एक परिवहन माध्यम से दूसरे में जाने की सुविधा मिलेगी।

महालक्ष्मी में एक्वा लाइन 3 से जुड़ेगी मोनोरेल

दक्षिण मुंबई की ओर महालक्ष्मी और जैकब सर्कल क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव दिखाई देगा। यहां मोनोरेल स्टेशन को मुंबई मेट्रो की भूमिगत एक्वा लाइन 3 से जोड़ने के लिए स्काईवॉक और पैदल मार्ग बनाए जा रहे हैं। एक्वा लाइन 3 मुंबई की पहली पूरी तरह भूमिगत मेट्रो लाइन है, जो कोलाबा से SEEPZ तक जाती है। महालक्ष्मी स्टेशन इस लाइन का महत्वपूर्ण इंटरचेंज पॉइंट बन रहा है। यहां से मोनोरेल, वेस्टर्न रेलवे और मेट्रो, तीनों का कनेक्शन मिलेगा। इससे दक्षिण मुंबई तक सफर का समय काफी कम हो सकता है।

मुंबई के ट्रांसपोर्ट सिस्टम में क्या बदलेगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मोनोरेल को सही तरीके से मेट्रो और लोकल ट्रेन नेटवर्क से जोड़ दिया गया, तो यह पूर्वी उपनगरों और दक्षिण मुंबई के बीच एक मजबूत फीडर सिस्टम बन सकती है। अभी तक यात्रियों को मोनोरेल स्टेशन तक पहुंचने और वहां से आगे जाने में कठिनाई होती थी। लेकिन अब स्काईवॉक, इंटरचेंज स्टेशन और बेहतर फीडर सेवाओं के जरिए यह समस्या कम हो सकती है।  इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांसपोर्टेशन एंड डेवलपमेंट पॉलिसी (ITDP) के विशेषज्ञ आदित्य राणे के अनुसार, किसी भी शहरी रेल प्रणाली की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसका बाकी सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क से जुड़ाव कितना सहज है। उनका कहना है कि मुंबई मोनोरेल लंबे समय तक “अलग-थलग” परिवहन प्रणाली बनी रही, लेकिन अब मेट्रो और रेलवे से इसका जुड़ाव इसे नई पहचान दे सकता है।

क्या फिर सफल हो पाएगी मोनोरेल?

मुंबई मोनोरेल को अक्सर शहर की सबसे विवादित परिवहन परियोजनाओं में गिना जाता है। इसकी लागत लगातार बढ़ी, यात्रियों की संख्या उम्मीद से बेहद कम रही और तकनीकी समस्याओं ने इसकी छवि खराब की। लेकिन अब MMRDA इसे “इंटीग्रेटेड अर्बन ट्रांजिट सिस्टम” का हिस्सा बनाने पर जोर दे रही है। यदि मेट्रो 2B, एक्वा लाइन 3 और उपनगरीय रेलवे के साथ इसका एकीकरण सफल रहता है, तो यह मोनोरेल केवल “प्रदर्शनी परियोजना” न रहकर मुंबई के दैनिक परिवहन का उपयोगी हिस्सा बन सकती है। आने वाले महीनों में इसकी असली परीक्षा यात्रियों की संख्या, सेवा की विश्वसनीयता और नेटवर्क कनेक्टिविटी से तय होगी।

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