डीग में LPG सिलेंडर ब्लास्ट से मातम अवैध गैस रिफिलिंग के दौरान धमाका, भाई-बहन की मौत, 8 लोग झुलसे

The CSR Journal Magazine
राजस्थान के Deeg जिले के कामां कस्बे में अवैध एलपीजी गैस रिफिलिंग के दौरान बड़ा हादसा हो गया। नवीन बस स्टैंड के पास कोल्ड ड्रिंक सप्लायर की दुकान पर सिलेंडर ब्लास्ट होने से दो सगे भाई-बहन की मौत हो गई, जबकि महिला और बच्चों समेत 8 लोग गंभीर रूप से झुलस गए। धमाके की आवाज करीब दो किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। हादसे के बाद प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंची, जबकि लोगों ने दमकल के देरी से पहुंचने पर नाराजगी जताई।

अवैध गैस रिफिलिंग के दौरान हुआ भीषण धमाका

हादसा कामां कस्बे के अक्खड़वाड़ी मैदान के पास नवीन बस स्टैंड के सामने स्थित एक कोल्ड ड्रिंक सप्लाई दुकान पर हुआ। यहां दो ईको वैन में एलपीजी सिलेंडरों से गैस रिफिलिंग की जा रही थी। पुलिस के अनुसार दोनों वाहनों में एलपीजी गैस किट लगी हुई थी और इन्हीं वाहनों से गांवों में कोल्ड ड्रिंक सप्लाई की जाती थी। रिफिलिंग के दौरान अचानक सिलेंडरों में आग लग गई। परिवार के लोग आग बुझाने की कोशिश कर ही रहे थे कि आग ने तेजी से विकराल रूप ले लिया और जोरदार धमाका हो गया। विस्फोट इतना तेज था कि उसकी गूंज करीब दो किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। धमाके के बाद आग दुकान के ऊपर बने मकान तक पहुंच गई।

हादसे में भाई-बहन की मौत, कई की हालत गंभीर

हादसे में मनमोहन, नीरज, लक्ष्य, भगवान सिंह, साक्षी, सरिता, अफसरा और दाताराम झुलस गए। सभी घायलों को पहले कामां के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां से गंभीर हालत में कई लोगों को भरतपुर के आरबीएम अस्पताल रेफर किया गया। इलाज के दौरान 11 वर्षीय अफसरा की मौत हो गई, जबकि 8 वर्षीय लक्ष्य ने जयपुर ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया। दोनों सगे भाई-बहन थे। अन्य घायलों की हालत भी गंभीर बताई जा रही है और उन्हें जयपुर रेफर किया गया है। घटना की जानकारी मिलते ही जिला कलक्टर मयंक मनीष, एडिशनल एसपी दिनेश यादव, सीओ राजेश शर्मा और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।

ऐसा लगा जैसे जमीन फट गई

हादसे में झुलसे मनमोहन सिंह ने बताया कि धमाका इतना तेज था कि उन्हें लगा जैसे जमीन फट गई हो। उन्होंने कहा कि वह दुकान पर काम कर रहे थे जबकि परिवार के अन्य सदस्य ऊपर बने मकान में मौजूद थे। विस्फोट के बाद वह करीब 20 मीटर दूर जाकर गिरे और उठ भी नहीं पाए। उन्होंने बताया कि परिवार वाले उन्हें ऊपर बुला रहे थे, लेकिन काम ज्यादा होने के कारण वह नहीं गए। मनमोहन ने दुख जताते हुए कहा कि अगर वह ऊपर चले जाते तो शायद काम रुक जाता और हादसा टल सकता था। घटना के प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार धमाके के तुरंत पहले रोडवेज की दो बसें वहां से निकली थीं। लोगों का कहना है कि अगर सिलेंडर उछलकर सड़क की तरफ गिरते तो बड़ा हादसा हो सकता था।

दमकल देरी से पहुंची, लोगों में गुस्सा

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि आग लगने के तुरंत बाद पुलिस और दमकल विभाग को सूचना दे दी गई थी, लेकिन दमकल करीब आधे घंटे बाद पहुंची। लोगों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब दमकल देर से पहुंची हो। आसपास पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से राहत कार्य में भी परेशानी आई। हादसे के बाद क्षेत्र में दहशत फैल गई और आसपास के लोग घरों से बाहर निकल आए। लोगों ने मृतक परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग की है।

लगातार बढ़ रहे गैस सिलेंडर हादसे

जांच में दोनों ईको वैन में एलपीजी गैस किट मिलने की पुष्टि हुई है। एडिशनल एसपी दिनेश यादव ने बताया कि वाहनों में गैस रिफिलिंग व्यक्तिगत उपयोग के लिए की जा रही थी, लेकिन यह पूरी तरह अवैध है। गौरतलब है कि डीग और भरतपुर जिलों में पिछले कुछ वर्षों में अवैध गैस रिफिलिंग और सिलेंडर ब्लास्ट की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इसके बावजूद प्रशासनिक कार्रवाई सीमित रही। वहीं डीग और कामां के सरकारी अस्पतालों में बर्न वार्ड तक नहीं होने से गंभीर मरीजों को भरतपुर रेफर करना पड़ता है, जिससे उनकी जान का खतरा और बढ़ जाता है।

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