डूंगरपुर में बड़ा एक्शन, फर्जी डिग्री से बने 8 पीटीआई बर्खास्त, 2018 भर्ती में हुआ था फर्जीवाड़ा

The CSR Journal Magazine
डूंगरपुर राजस्थान के शिक्षा विभाग ने बड़ा कदम उठाते हुए पीटीआई भर्ती-2018 में फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी पाने वाले 8 अभ्यर्थियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद बीकानेर स्थित माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने यह कार्रवाई की। इस मामले ने भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

शिकायत से शुरू हुई जांच, खुला बड़ा फर्जीवाड़ा

पूरा मामला जुलाई 2024 में सामने आया, जब बेरोजगार संघ राजस्थान ने पुलिस महानिरीक्षक को शिकायत दी कि पीटीआई भर्ती-2018 में कई अभ्यर्थियों ने फर्जी डिग्रियों के आधार पर नौकरी हासिल की है। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए आईजी रेंज के निर्देश पर डूंगरपुर पुलिस ने जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने शिक्षा विभाग से दस्तावेज जुटाकर डिग्रियों का सत्यापन कराया। जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि डूंगरपुर, बांसवाड़ा और प्रतापगढ़ जिलों में कुल 14 अभ्यर्थियों ने फर्जी डिग्रियों के जरिए सरकारी नौकरी हासिल की थी।

चार विश्वविद्यालयों के नाम पर बनाई गईं नकली डिग्रियां

जांच में सामने आया कि आरोपियों ने देश के चार प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के नाम का दुरुपयोग कर फर्जी डिग्रियां तैयार करवाई थीं। इनमें डॉ. भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (आगरा), चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (मेरठ), बुंदेलखंड विश्वविद्यालय (झांसी) और ओपीजीएस विश्वविद्यालय (चूरू) शामिल हैं।
पुलिस ने इन विश्वविद्यालयों से अभ्यर्थियों के नाम, एनरोलमेंट नंबर, आवेदन पत्र, प्रवेश पत्र और उपस्थिति रिकॉर्ड मंगवाए। विश्वविद्यालयों ने साफ तौर पर पुष्टि की कि संबंधित अभ्यर्थियों की डिग्रियां फर्जी हैं। इससे पूरे मामले में फर्जीवाड़े की पुष्टि हो गई।

कोर्ट से नहीं मिली राहत, विभाग ने की कार्रवाई

फर्जी डिग्री के आरोप सामने आने के बाद कई अभ्यर्थियों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और स्टे लेने की कोशिश की। हालांकि सुनवाई के दौरान कोर्ट ने डिग्रियों को फर्जी मानते हुए शिक्षा विभाग की कार्रवाई को सही ठहराया।
कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद माध्यमिक शिक्षा निदेशालय, बीकानेर ने तत्काल प्रभाव से 8 अभ्यर्थियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया। विभाग ने साफ कर दिया कि सरकारी नौकरी में किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

पुलिस केस दर्ज, कई आरोपी नामजद

इस मामले में डूंगरपुर कोतवाली थाने में वर्ष 2024 में एफआईआर दर्ज की गई थी। जांच के आधार पर भूपेश कुमार, जयेश, सुधीर, नीरज, दिलीप और शिल्पा सहित कई अभ्यर्थियों को नामजद किया गया। तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक की जांच में पाया गया कि आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों को असली बताकर सरकारी सेवा प्राप्त की, जो भारतीय दंड संहिता के तहत अपराध है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की भी जांच कर रही है, जिसमें निजी विश्वविद्यालय से जुड़े कार्मिकों की भूमिका भी सामने आई है।
यह मामला न सिर्फ शिक्षा विभाग की भर्ती प्रक्रिया में खामियों को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि जांच और सख्त कार्रवाई से फर्जीवाड़े पर लगाम लगाई जा सकती है। आने वाले समय में इस तरह के मामलों पर और कड़ी निगरानी की जरूरत महसूस की जा रही है।

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