Maharashtra: खर्च में कटौती और EV का जोर, अधिकारी अब पब्लिक ट्रांसपोर्ट का करेंगे इस्तेमाल, सख्त गाइडलाइन जारी

The CSR Journal Magazine
प्रधानमंत्री मोदी की ईंधन बचत की अपील के बाद महाराष्ट्र सरकार ने एक सख्त गाइडलाइन जारी की है। इसमें अधिकारियों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट के माध्यम से सफर करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को भी बढ़ावा दिया गया है। इसके तहत सरकार ने गैर-जरूरी विदेश यात्राओं और चार्टर्ड विमानों के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है। ये कदम मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में उठाए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने बुलेट से किया सफर

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्वयं बुलेट से विधानभवन पहुंचकर इस गाइडलाइन का अनुपालन किया। उन्होंने सभी विभागों को इस दिशा में सख्ती से काम करने के निर्देश दिए हैं। अब मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के काफिलों में 50 फीसदी की कटौती की जाएगी। पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग अनिवार्य किया गया है।

इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर नई पहल

गाइडलाइन के तहत मंत्रियों और अधिकारियों को पेट्रोल-डीजल वाहनों के बजाय इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग करने के लिए कहा गया है। डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे व उद्योग मंत्री उदय सामंत ने इलेक्ट्रिक गाड़ियों से सफर करने की शुरुआत कर दी है। इससे न केवल खर्च में कमी आएगी, बल्कि पर्यावरण को भी लाभ होगा।

ऑनलाइन कार्यशैली का नया आदेश

सरकार ने ऑनलाइन कार्य करने का भी आदेश दिया है। सरकारी दफ्तरों में बिजली की बचत पर जोर दिया जा रहा है। इसके अलावा, PNG गैस और सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने का निर्देश दिया गया है। कैबिनेट मंत्री नितेश राणे ने मत्स्य विकास और बंदरगाह विभाग की सभी बैठकों को ऑनलाइन आयोजित करने के भी निर्देश दिए हैं।

मोदी जी की अपील का महत्व

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते दिनों देशवासियों से ईंधन बचत करने की अपील की थी, जो वर्तमान में महाराष्ट्र सरकार के इस फैसले का मुख्य कारण बन गई है। सरकार का उद्देश्य ईंधन की बचत के साथ-साथ सरकारी खर्चों में कटौती और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है।

संकट के समय की संवेदनशीलता

पश्चिम एशिया में चल रहे संकट को देखते हुए मुख्यमंत्री फडणवीस का यह निर्णय महत्वपूर्ण है। सरकार वित्तीय संसाधनों के दुरुपयोग को रोकने के लिए कड़े कदम उठा रही है। यह कदम न केवल सरकार के बजट को नियंत्रित करेगा, बल्कि सरकारी कर्मचारियों के लिए भी एक मिसाल बनेगा।

योजनाओं का कार्यान्वयन

इस गाइडलाइन के कार्यान्वयन से सरकारी अधिकारियों में जिम्मेदारी का भाव जगाना और उनसे जुड़े खर्चों को सीमित करना भी शामिल है। महाराष्ट्र सरकार के इस कदम से अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बनने की संभावना है। यह साबित करेगा कि जब जरूरत पड़ती है, तो सरकार कितनी गंभीरता से कार्य करती है।

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