Zen-G से पहले बात होनी चाहिए थी, देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत – मोहान भागवत

The CSR Journal Magazine
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने बुधवार को मुंबई में Gen Z और Gen Alpha छात्रों से बात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में कई सुधारों की जरूरत है। भागवत ने यह भी बताया कि छात्रों का आंदोलन एक महत्वपूर्ण संवाद का हिस्सा है, जिससे वे अपनी बातें सरकार तक पहुंचा सकते हैं।

आंदोलन और लोकतंत्र

भागवत ने छात्रों को समझाया कि उनके आंदोलनों को देश के खिलाफ नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि Gen Z आंदोलन लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है और यह समाज की चिंताओं को उजागर करने का एक तरीका है। अच्छे संवाद से ही सकारात्मक परिणाम सामने आते हैं।

सकारात्मक परिवर्तन की आवश्यकता

संघ प्रमुख ने यह भी कहा कि भारतीय शिक्षा प्रणाली में सुधार की बहुत आवश्यकता है। जब समाज की आवाज़ों को अनसुना किया जाता है, तब आंदोलन एक वैकल्पिक रास्ता बन जाता है। भागवत का मानना है कि बातचीत के जरिए ही बेहतर समाधान निकाला जा सकता है।

छात्रों के मुद्दों पर ध्यान

Gen Z की शिकायतें सही हैं, और भागवत ने इसे स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि हमें इन मुद्दों को गंभीरता से लेना चाहिए और समाधान के लिए गहरी बातचीत करनी चाहिए। अगर हम छात्रों की आवाज़ों को सुनेंगे, तो संभवतः शिक्षा व्यवस्था में सही बदलाव ला पाएंगे।

संघ का दृष्टिकोण

RSS प्रमुख ने कहा कि केवल शिक्षण संस्थान ही नहीं, बल्कि समाज के सभी हिस्सों में संवाद होना चाहिए। इसके द्वारा ही हम एक मजबूत और समृद्ध भविष्य की ओर बढ़ सकते हैं। उन्होंने छात्रों को प्रेरित किया कि वे अपने विचार खुलकर व्यक्त करें और इसे संवाद का हिस्सा बनाएं।

नई पीढ़ी की जिम्मेदारी

भागवत ने नई पीढ़ी को यह समझाने की कोशिश की कि उनके विचार और आवाज़ का महत्व है। वह चाहते हैं कि छात्र अपनी समस्याएं और चिंताओं को दूर करने के लिए आगे आएं। संवाद के माध्यम से ही वे अपने अधिकारों की रक्षा कर सकते हैं।

शिक्षा में नवाचार

भागवत ने यह भी कहा कि शिक्षा में नवाचार की आवश्यकता है। आधुनिक युग में जब तकनीक तेजी से बदल रही है, तो हमें भी अपनी शिक्षा प्रणाली को बदलने की जरूरत है। शिक्षा को अधिक व्यावहारिक और उपयोगी बनाना जरूरी है।

संवर्धित संवाद की दिशा में कदम

मोहन भागवत के अनुसार, संवाद केवल बहस नहीं बल्कि एक साझा समझ भी है। जब सभी पक्ष एकत्र होकर बात करते हैं, तब ही समाज के लिए सकारात्मक बदलाव संभव होते हैं। इसलिए, उन्होंने छात्रों से अपेक्षा की कि वे सक्रिय रूप से संवाद का हिस्सा बनें।

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