कैलाश मानसरोवर में डुबकी पर रोक, श्रद्धालु बाल्टी से कर रहे स्नान

The CSR Journal Magazine
कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को अब पवित्र मानसरोवर झील में डुबकी लगाने की अनुमति नहीं है। चीनी प्रशासन ने 2018 से इस पर रोक लगा रखी है ताकि झील को प्रदूषण मुक्त रखा जा सके। अब श्रद्धालु झील से बाल्टी में पानी निकालकर स्नान करते हैं और इसी तरह अपनी धार्मिक परंपरा का निर्वाह करते हैं।

परिक्रमा के दौरान शौचालयों की कमी

कैलाश परिक्रमा के दौरान यात्रियों को डेरापुक और झुंझुपुई में शौचालयों की कमी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे खासकर महिलाओं को परेशानी हो रही है। यात्रियों का कहना है कि हर श्रद्धालु को एक बाल्टी पानी दी जाती है, लेकिन शौचालयों की कमी से यात्रा कठिन हो जाती है।

यात्रियों ने KMVN की व्यवस्थाओं की सराहना की

कर्नाटक के बेंगलुरु से आए श्रद्धालुओं शैलेश और रीना सुमन ने यात्रा को अविस्मरणीय बताया। उन्होंने कहा कि भारत की ओर से KMVN और अन्य एजेंसियों की व्यवस्थाएं अच्छी थीं, लेकिन कैलाश परिक्रमा के दौरान शौचालयों की संख्या कम थी।

बदले मौसम के चलते यात्रा में बाधाएं

यात्रा के दौरान खराब मौसम के कारण भूस्खलन से सड़कें बाधित हो गईं, जिससे श्रद्धालुओं को दो दिन अतिरिक्त रुकना पड़ा। स्थायी व्यवस्थाओं को बहाल करने में BRO और भारतीय सेना ने सक्रियता दिखाई। यात्रियों ने उनकी प्रशंसा की।

कैलाश यात्रा की दूरी हुई कम

इस बार कैलाश मानसरोवर यात्रा की कुल दूरी 1738 किलोमीटर हो गई है, जिसमें से 1690 किलोमीटर यात्रा वाहन से और केवल 38 किलोमीटर पैदल ट्रेक है। 2019 से पहले यात्रियों को धारचूला से लिपुलेख दर्रे तक 60 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था, जो अब काफी आसान हो गया है।

2022 में यात्रा हुई फिर से शुरू

कोविड-19 महामारी और भारत-चीन सीमा तनाव के चलते 5 साल बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा पुनः शुरू हुई है। पहले दल ने 4 जुलाई को दिल्ली से टनकपुर पहुंचकर यात्रा की शुरूआत की। अब तक चार दल यात्रा पूरी कर लौट चुके हैं।

भविष्य के लिए दरख्वास्त: सुविधाएं बढ़ाने की जरूरत

यात्रियों ने भारत सरकार से अपील की है कि वह चीनी प्रशासन से बात कर कैलाश परिक्रमा मार्ग पर शौचालयों की व्यवस्था को बेहतर बनाए। वे चाहते हैं कि सभी श्रद्धालुओं को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हों ताकि यात्रा अधिक सुगम हो सके।

अगले महीनों का इंतजार

कैलाश पर्वत के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को अभी दो महीने और इंतजार करना होगा। इनर लाइन परमिट (ILP) सितंबर के आसपास जारी होने की उम्मीद है। इसके बाद श्रद्धालु 17 हजार फीट की ऊंचाई पर जाकर कैलाश पर्वत के दर्शन कर सकेंगे।

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