10 साल में जन-धन का क्रांतिकारी सफर, महिलाओं के 56% खाते
प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY – Pradhanmantri Jandhan Yojana) ने भारतीय बैंकिंग इतिहास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर ली है। इस योजना के तहत अब तक 55 करोड़ से ज्यादा गरीबों के बैंक खाते खोले जा चुके हैं। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को इस ऐतिहासिक आंकड़े की घोषणा करते हुए इसे भारत के वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) के क्षेत्र में एक बड़ी छलांग बताया।
10 वर्षों में बदली देश की तस्वीर Financial Inclusion in India
2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई जन धन योजना का मुख्य उद्देश्य था – समाज के वंचित वर्गों और गरीबों तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाना। अब, जब योजना को 10 साल पूरे होने वाले हैं, सरकार ने इसके तहत KYC अपडेट का बड़ा अभियान शुरू किया है। वित्त मंत्री सीतारमण ने बताया कि 1 जुलाई, 2025 से इस अभियान की शुरुआत हो चुकी है, जिसमें अब तक 1 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों को कवर किया जा चुका है।
Pradhanmantri Jandhan Yojana खाताधारकों से KYC अपडेट कराने की अपील
Social Media पर पोस्ट साझा करते हुए वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने सभी जन धन खाताधारकों से इन कैंपों में भाग लेने और अपनी KYC अपडेट कराने की अपील की। उन्होंने बैंकों से इस प्रक्रिया को आसान बनाने और ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचने को कहा है।
महिलाएं बनीं योजना की धुरी, जमा राशि ₹2.5 लाख करोड़ के पार
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के मुताबिक, जन धन खातों में 56% खाते महिलाओं के नाम पर हैं। वहीं 66.6% खाते ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में खोले गए हैं। 21 मई 2025 तक इन खातों में जमा कुल राशि ₹2.5 लाख करोड़ से ज्यादा हो गई है।
जन धन योजना बनी विश्व की सबसे बड़ी वित्तीय समावेशन पहल
RBI के डिप्टी गवर्नर एम. राजेश्वर राव ने हाल ही में एक सेमिनार में कहा कि प्रधानमंत्री जन धन योजना ने भारत को दुनिया का सबसे बड़ा वित्तीय समावेशन कार्यक्रम बना दिया है। उन्होंने कहा कि इस योजना ने हर वयस्क को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ने में भारत की स्थिति को मजबूत किया है। वित्त मंत्री सीतारमण ने भी इसे दुनिया की सबसे बड़ी वित्तीय समावेशन पहलों में से एक बताया और बताया कि वर्ष 2025-26 में तीन करोड़ नए खाते खोलने का लक्ष्य तय किया गया है।
आम लोगों तक पहुंचा सरकारी योजनाओं का लाभ
वित्त मंत्रालय के अनुसार, जन धन योजना के जरिए आम नागरिकों तक मनरेगा वेतन, उज्ज्वला योजना की गैस सब्सिडी, कोविड सहायता, पेंशन और बीमा जैसी योजनाओं के तहत सीधे बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर किए गए। इससे न केवल लीकेज कम हुआ, बल्कि पारदर्शिता और समय पर सहायता सुनिश्चित हो सकी।
बैंकिंग अब हर गांव के करीब
वित्त मंत्रालय के बयान के अनुसार, आज भारत के 99.95% बसे हुए गांवों को 5 किलोमीटर के दायरे में बैंकिंग टचपॉइंट्स (बैंक शाखा, ATM, बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट, या इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक) के माध्यम से बैंकिंग सेवाएं मिल रही हैं।
जन धन योजना के प्रमुख उद्देश्य
हर व्यक्ति को बेसिक सेविंग बैंक अकाउंट उपलब्ध कराना, जरूरत के अनुसार क्रेडिट (Loan) सुविधा, बीमा और पेंशन जैसी वित्तीय सुरक्षा योजनाएं, डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देना, सरकारी योजनाओं के लाभ को सीधे DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से पहुंचाना। जन धन योजना केवल एक बैंकिंग पहल नहीं, बल्कि गरीबों के जीवन में बदलाव लाने वाली सामाजिक क्रांति बन चुकी है।
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