केंद्र ने बांग्लादेश को भेजी 2,680 घुसपैठियों की सूची, नागरिकता जांच के बाद होगा निर्वासन

The CSR Journal Magazine

घुसपैठियों पर केंद्र का बड़ा एक्शन, 2680 लोगों की नागरिकता जांच के लिए बांग्लादेश को भेजी सूची

भारत सरकार ने 2,680 से अधिक कथित अवैध बांग्लादेशी नागरिकों के नाम नागरिकता सत्यापन (Nationality Verification) के लिए बांग्लादेश सरकार के साथ साझा किए हैं। भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान इसकी आधिकारिक पुष्टि की। यह कदम भारत सरकार द्वारा अपनी सीमाओं को सुरक्षित करने और देश में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को उनके गृह देश वापस भेजने के निरंतर प्रयासों का हिस्सा है।

केंद्र सरकार की सख्त कार्रवाई

केंद्र सरकार ने अवैध घुसपैठियों के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए बांग्लादेश को 2,680 ऐसे लोगों के मामलों की सूची भेजी है, जिनकी नागरिकता की जांच की जानी है। यह कदम तब उठाया गया है जब भारत में आतंकवाद और अवैध प्रवास की समस्या बढ़ती जा रही है। विदेश मंत्रालय ने इस बात की पुष्टि की है कि यह कार्रवाई उन लोगों के खिलाफ है जो अवैध रूप से भारत में प्रवेश कर चुके हैं।

मुख्य कार्रवाई और प्रक्रिया

विदेश मंत्रालय के अनुसार, जैसे ही बांग्लादेश सरकार इन 2,680 से अधिक लोगों की नागरिकता की पुष्टि (सत्यापन) कर देगी, भारत इन्हें वापस भेजने या निर्वासन (Deportation) की स्थिति में होगा। भारत में अवैध रूप से रह रहे सभी विदेशी नागरिकों के खिलाफ स्थापित कानूनों, प्रक्रियाओं और द्विपक्षीय तंत्र के तहत कार्रवाई की जाएगी। इससे पहले मई 2026 की शुरुआत में विदेश मंत्रालय ने बताया था कि नागरिकता सत्यापन के 2,860 से अधिक मामले बांग्लादेश के पास लंबित हैं, जिनमें से कई मामले पिछले 5 वर्षों से अनसुलझे हैं।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता

भारत ने सीमा पर आतंकवाद को एक वैश्विक खतरा बताते हुए कहा है कि इसे रोकने के लिए अन्य देशों के साथ मिलकर काम करने की आवश्यकता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देशों को दंडित किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी अवैध नागरिकों के मामले को कानून के दायरे में लाया जाएगा।

बांग्लादेश से जवाब की प्रतीक्षा

रणधीर जायसवाल ने बतायाः “हम बांग्लादेश से जल्द ही जवाब की उम्मीद कर रहे हैं। इन लोगों की नागरिकता की पुष्टि होने पर हम उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।” वर्तमान में कई मामलों की सत्यापन प्रक्रिया पिछले 5 सालों से रुकी हुई है।

भाजपा की सरकार की पहल

पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनने के बाद घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई तेज हो गई है। शुभेंदु अधिकारी ने बीएसएफ को घुसपैठियों को सौंपने की बात कही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस पहल की सराहना की है और कहा है कि यदि ये लोग स्वेच्छा से लौटते हैं, तो उनके खिलाफ केस नहीं किए जाएंगे।

पृष्ठभूमि और ‘डिटेक्ट, डिलीट, डिपोर्ट’ नीति

भारत के गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के बाद देश के विभिन्न राज्यों (विशेषकर सीमावर्ती राज्य पश्चिम बंगाल) में अवैध प्रवासियों की पहचान करने, मतदाता सूची या दस्तावेजों से नाम हटाने और उन्हें निर्वासित करने की नीति (Detect, Delete, Deport) पर तेजी से काम चल रहा है। पश्चिम बंगाल सरकार ने अवैध प्रवासियों को अस्थायी रूप से रखने के लिए जिला स्तर पर होल्डिंग सेंटर्स (हिरासत केंद्र) बनाने के निर्देश जारी किए हैं, ताकि कानूनी प्रक्रिया और सत्यापन पूरा होने तक उन्हें वहाँ रखा जा सके। सरकार की इस कड़े रुख के बाद पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के हाकिमपुर बॉर्डर चौकी जैसी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर सैकड़ों संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिक खुद ही कानूनी तरीके से या डरे होने के कारण अपने देश वापस जाने के लिए जुटने लगे हैं।

आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख

भारत ने आतंकवाद के खिलाफ एक मजबूत रुख अपनाने का लक्ष्य रखा है। रणधीर जायसवाल ने बताया कि बॉर्डर पार आतंकवाद एक वैश्विक समस्या है और इसके विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एकजुट होकर लड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें उन देशों को पहचानना होगा जो आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे हैं।

मॉस्को में हुई चर्चा

यह टिप्पणी उस समय में आई है जब राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने हाल ही में मॉस्को में एक सुरक्षा फोरम में आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात की थी। डोभाल ने जिम्मेदार देशों से अपील की है कि वे आतंकवादी समूहों और उनके स्पॉन्सरिंग देशों के खिलाफ ठोस कदम उठाएं।

फारसी खाड़ी से भारतीय जहाजों की स्थिति

इस बीच, विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी है कि 11 भारतीय जहाज अभी भी फारसी खाड़ी क्षेत्र में हैं, जबकि 14 जहाज सफलतापूर्वक भारत लौट चुके हैं। इस स्थिति पर निगरानी रखी जा रही है ताकि सभी भारतीय जहाज सुरक्षित लौट सकें।

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