क्या घुसपैठिए नागरिकता के लिए ‘आधार’ का कर रहे इस्तेमाल? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों को जारी किया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका के आधार पर केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है। इस याचिका में कहा गया है कि UIDAI द्वारा जारी आधार कार्ड का गलत इस्तेमाल नागरिकता और पते के सबूत के रूप में किया जा रहा है। याचिका में मांगी गई है कि आधार का इस्तेमाल केवल पहचान की पुष्टि के लिए किया जाए। यह स्थिति तब आई है जब कई प्रवासी लोग अपनी नागरिकता को साबित करने के लिए आधार कार्ड का दुरुपयोग कर रहे हैं।
कानून का उल्लंघन है नए वोटर रजिस्ट्रेशन में आधार का उपयोग
याचिका में कहा गया है कि नए वोटर रजिस्ट्रेशन फॉर्म-6 में आधार को जन्मतिथि और निवास का सबूत बताया जा रहा है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह कानून के खिलाफ है। यह आधार अधिनियम 2016 की धारा 9, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 23(4) और संविधान के अनुच्छेद 14 का सीधा उल्लंघन मानता है। इन नियमों के तहत आधार केवल पहचान का प्रमाण माना गया है, न कि नागरिकता का।
घुसपैठियों का आधार का गलत इस्तेमाल
याचिका में घुसपैठियों के द्वारा आधार कार्ड के दुरुपयोग पर चिंता व्यक्त की गई है। याचिका में स्प्ष्ट उल्लेख किया गया है कि “आधार नागरिकता या निवास का सबूत नहीं है।” इसके बावजूद, कई लोग आधार कार्ड का दुरुपयोग कर रहे हैं। याचिका में बताया गया है कि आधार का वास्तविक उपयोग पहचान के लिए होना चाहिए, न कि नागरिकता या निवास साबित करने के लिए।
आधार एक्ट और UIDAI के नियम क्या कहते हैं?
आधार अधिनियम, 2016 की धारा 9 साफ कहती है कि आधार नागरिकता या डोमिसाइल (मूल निवास) का प्रमाण नहीं है। भारत में एक वर्ष में 182 दिन रहने वाला कोई भी व्यक्ति (विदेशी नागरिक भी) आधार के लिए पात्र हो जाता है। इसलिए यह केवल भारत में निवास और पहचान का माध्यम है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने भी 22 अगस्त 2023 की अपनी अधिसूचना में स्पष्ट किया था कि आधार सिर्फ पहचान का दस्तावेज है, नागरिकता या जन्मतिथि का नहीं।
आधार का किस प्रकार किया जा रहा है इस्तेमाल?
याचिका में कहा गया है कि आधार कार्ड का दुरुपयोग विभिन्न सरकारी प्रक्रियाओं जैसे स्कूल में दाखिले, प्रॉपर्टी खरीदने और जन्म प्रमाण पत्र जैसी दस्तावेजों में हो रहा है। इसके अलावा, नए वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए भी आधार को जन्मतिथि और निवास का प्रमाण बताया जा रहा है। यह प्रक्रिया कई लोगों के लिए समस्याएं पैदा कर रही है।
वेरिफिकेशन सिस्टम में बदलाव की जरूरत
सुप्रीम कोर्ट में वेरिफिकेशन सिस्टम में सुधार के लिए सुझाव दिए गए हैं। याचिका में चुनावी प्रक्रियाओं में वेरिफिकेशन सिस्टम में बड़े बदलाव की मांग की गई है। इसके अंतर्गत सुधारों की निगरानी के लिए एक उच्च स्तरीय समिति बनाने का प्रस्ताव भी दिया गया है। इस समिति में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज और साइबर सुरक्षा और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स को शामिल करने का सुझाव दिया गया है।
केंद्र और राज्यों को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस
चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने इस मामले में सुनवाई करते हुए केंद्र, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी किया है। यह पूरी स्थिति देश में आधार के इस्तेमाल के तरीकों पर नए प्रश्न खड़े कर रही है, और इससे नागरिकता के मुद्दे पर बहस बढ़ने की संभावना है।
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