40 के बाद मां बनना कितना सुरक्षित? जानिए प्रेग्नेंसी के बड़े रिस्क और जरूरी सावधानियां

The CSR Journal Magazine
अभिनेत्री Karishma Tanna 42 साल की उम्र में मां बनने जा रही हैं। हाल ही में उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी गोदभराई की तस्वीरें साझा कीं, जिसके बाद देर से मां बनने को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक 40 साल के बाद प्रेग्नेंसी संभव तो है, लेकिन इसे हाई-रिस्क माना जाता है। इस दौरान मां और बच्चे दोनों की सेहत को लेकर कई तरह की चुनौतियां सामने आ सकती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि सही देखभाल, नियमित जांच और संतुलित जीवनशैली से जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

40 के बाद प्रेग्नेंसी क्यों मानी जाती है हाई-रिस्क?

जीएमसी एवं जनाना अस्पताल, अलवर की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. चारुल मित्तल के अनुसार 40 साल के बाद गर्भधारण करना पहले की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इस उम्र में शरीर में हार्मोनल बदलाव तेजी से होते हैं और अंडों की गुणवत्ता भी प्रभावित होने लगती है। इसी कारण इस उम्र की प्रेग्नेंसी को ‘हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी’ की श्रेणी में रखा जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि इस दौरान नियमित मेडिकल मॉनिटरिंग बेहद जरूरी होती है। छोटी-सी लापरवाही भी मां और बच्चे दोनों की सेहत पर असर डाल सकती है। हालांकि, आधुनिक मेडिकल तकनीकों और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की मदद से अब अधिक उम्र में भी सुरक्षित मातृत्व संभव हो रहा है। लेकिन इसके लिए शुरुआत से ही विशेषज्ञ डॉक्टर की निगरानी में रहना जरूरी माना जाता है।

42 की उम्र में नेचुरल प्रेग्नेंसी संभव, लेकिन बढ़ जाते हैं खतरे

विशेषज्ञों के अनुसार बढ़ती उम्र के साथ नेचुरल प्रेग्नेंसी की संभावना कम हो जाती है, लेकिन यह पूरी तरह असंभव नहीं होती। कई महिलाएं 40 के बाद भी प्राकृतिक रूप से गर्भधारण कर सकती हैं। इस दौरान गर्भपात यानी मिसकैरेज का खतरा अधिक रहता है। इसके अलावा बच्चे में क्रोमोसोम संबंधी समस्याएं, जैसे डाउन सिंड्रोम, होने की संभावना भी बढ़ जाती है। डॉक्टरों का कहना है कि 40 की उम्र के बाद गर्भवती महिलाओं में हाई ब्लड प्रेशर, प्रीक्लेम्पसिया और जेस्टेशनल डायबिटीज जैसी समस्याएं ज्यादा देखने को मिलती हैं। इसके साथ ही समय से पहले डिलीवरी और बच्चे का वजन कम होने का जोखिम भी बढ़ जाता है। ऐसी परिस्थितियों में सामान्य डिलीवरी की बजाय सिजेरियन डिलीवरी की संभावना अधिक हो सकती है। इसलिए डॉक्टर लगातार जांच और सावधानी बरतने की सलाह देते हैं।

प्रेग्नेंसी के दौरान कौन-कौन से टेस्ट जरूरी?

40 के बाद गर्भधारण करने वाली महिलाओं को सामान्य प्रेग्नेंसी की तुलना में ज्यादा मेडिकल जांच की जरूरत पड़ सकती है। डॉक्टर समय-समय पर अल्ट्रासाउंड, ब्लड टेस्ट और अन्य जरूरी स्क्रीनिंग कराने की सलाह देते हैं। इसके अलावा ‘नॉन-इनवेसिव प्रीनेटल टेस्टिंग’ (NIPT) और जेनेटिक स्क्रीनिंग भी करवाई जा सकती है, जिससे बच्चे में किसी तरह की जेनेटिक समस्या का पता लगाया जा सके। विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती महीनों में नियमित जांच बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इसी दौरान कई जटिलताओं का समय रहते पता लगाया जा सकता है। सही समय पर इलाज मिलने से जोखिम कम हो सकता है।

हेल्दी लाइफस्टाइल और पॉजिटिव सोच बेहद जरूरी

डॉक्टरों के अनुसार 40 के बाद प्रेग्नेंसी में खानपान और लाइफस्टाइल का खास ध्यान रखना चाहिए। भोजन में हरी सब्जियां, ताजे फल, साबुत अनाज, प्रोटीन और कैल्शियम से भरपूर चीजें शामिल करनी चाहिए। इसके अलावा डॉक्टर की सलाह से फोलिक एसिड और प्रीनेटल विटामिन लेना जरूरी माना जाता है, जो बच्चे के बेहतर विकास में मदद करते हैं। भरपूर पानी पीना, पर्याप्त नींद लेना और तनाव से दूर रहना भी उतना ही जरूरी है। डॉक्टरों का कहना है कि उम्र को लेकर ज्यादा चिंता करने की बजाय सकारात्मक सोच बनाए रखना चाहिए। सही देखभाल और मेडिकल सलाह के साथ अधिक उम्र में भी सुरक्षित और स्वस्थ मातृत्व संभव है।

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