MP वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति के खिलाफ भोपाल में बवाल

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मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति पर बवाल

मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में पहली बार गैर-मुस्लिम (हिंदू) सदस्यों की नियुक्ति के बाद मुस्लिम संगठनों ने भोपाल में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया है। मध्य प्रदेश नए वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के तहत अपने वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।

प्रदर्शन में उतरे मुस्लिम संगठन

भोपाल के बुधवारा चौराहे पर सोमवार को ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी के सदस्यों ने सड़क पर उतरकर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि वक्फ बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति को वापस लिया जाए, जिससे मुस्लिम समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। समिति के संरक्षक शमशुल हसन ने कहा कि वक्फ बोर्ड मुस्लिम समुदाय की धार्मिक संस्था है, जहां लोग अपनी संपत्ति अल्लाह की रजा के लिए समर्पित करते हैं।

आक्रोश का मुख्य कारण

शमशुल हसन ने आरोप लगाया कि वक्फ बोर्ड के प्रबंधन में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति उचित नहीं है। उनका तर्क था कि मुस्लिम समुदाय ने कभी भी अयोध्या या मथुरा के प्रबंधन में प्रतिनिधित्व मांगने का प्रयास नहीं किया, फिर वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की जरूरत क्यों थी? उन्होंने कहा कि यह नियम कानून के लागू होने के तुरंत बाद अचानक से किया गया निर्णय है।

नए बोर्ड का गठन और नियुक्तियां

दो हिंदू सदस्य शामिल: मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, बोर्ड में इंदौर के मनोज मालपानी और गुना के अनिमेश भार्गव को गैर-मुस्लिम सदस्यों के रूप में नियुक्त किया गया है।
अध्यक्ष की नियुक्ति: वक्फ बोर्ड के लंबे समय से अध्यक्ष रहे सनवर पटेल को दोबारा इस 10-सदस्यीय बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
पारदर्शिता का तर्क: सरकारी अधिकारियों और समर्थकों का तर्क है कि नए नियमों के तहत गैर-मुस्लिम सदस्यों और महिलाओं को शामिल करने से बोर्ड के कामकाज में पारदर्शिता आएगी, जवाबदेही तय होगी और संपत्ति से जुड़े विवादों का बेहतर निपटारा हो सकेगा।

विरोध प्रदर्शन और मुस्लिम संगठनों के तर्क

प्रबंधन पर आपत्ति: मुस्लिम संगठनों का कहना है कि धार्मिक और सामुदायिक विश्वास से जुड़ी वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करना उचित नहीं है।
अन्य धार्मिक बोर्डों का हवाला: प्रदर्शनकारियों ने तर्क दिया कि जब मुस्लिम समाज ने कभी अयोध्या, सोमनाथ या मथुरा जैसे हिंदू धार्मिक ट्रस्टों की कमेटियों में प्रतिनिधित्व नहीं मांगा, तो वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिमों की एंट्री क्यों की जा रही है।
योग्य मुस्लिम विशेषज्ञों की मांग: संगठनों का कहना है कि यदि नए सदस्यों की नियुक्ति करनी ही थी, तो मुस्लिम समुदाय के ही सेवानिवृत्त आईएएस, आईपीएस अधिकारियों, डॉक्टरों या इंजीनियरों को शामिल किया जाना चाहिए था।
आदेश वापस लेने की चेतावनी: भोपाल में प्रदर्शन कर रहे लोगों ने सरकार से इस फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की है और मांग पूरी न होने पर पूरे राज्य में आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है।

राज्यव्यापी जन-आंदोलन का विस्तार

भोपाल के बुधवारा चौराहे से शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन अब मध्य प्रदेश के सभी बड़े जिलों और कस्बों में विस्तारित किया जाएगा। मांग पूरी न होने की स्थिति में प्रदर्शनकारियों ने पूरे राज्य में बड़ी विरोध रैलियां निकालने और मुख्य मार्गों को ब्लॉक करने की चेतावनी दी है। मस्जिदों और धार्मिक आयोजनों के माध्यम से मुस्लिम समाज के लोगों को वक्फ कानून में हुए बदलावों के प्रति जागरूक कर इस आंदोलन से जोड़ा जा रहा है।

कानूनी और संवैधानिक मोर्चा

संगठनों की कानूनी टीम इस सरकारी आदेश के खिलाफ मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय या सीधे सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) का रुख करने की तैयारी में है। याचिका में इस बात को आधार बनाया जाएगा कि धार्मिक संपत्तियों के प्रबंधन में गैर-मुस्लिमों को शामिल करना अनुच्छेद 25 और 26 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता के मूल अधिकारों का उल्लंघन है।

सरकार पर दबाव और ज्ञापन रणनीति

विभिन्न जिलों के कलेक्टरों के माध्यम से राज्यपाल और मुख्यमंत्री मोहन यादव के नाम आधिकारिक ज्ञापन सौंपे जाएंगे, जिसमें नियुक्ति आदेश को तुरंत रद्द करने की मांग होगी। मुस्लिम समाज के सेवानिवृत्त आईएएस, आईपीएस, डॉक्टरों और इंजीनियरों की एक सूची सरकार को सौंपी जाएगी, ताकि यह साबित किया जा सके कि बोर्ड के प्रबंधन के लिए समुदाय के पास योग्य विशेषज्ञों की कमी नहीं है।

राष्ट्रीय संगठनों के साथ समन्वय

स्थानीय नेता इस मुद्दे को अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ उठा रहे हैं ताकि मध्य प्रदेश के इस मॉडल को अन्य राज्यों में लागू होने से रोकने के लिए देशव्यापी दबाव बनाया जा सके। प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक इंदौर के मनोज मालपानी और गुना के अनिमेश भार्गव की नियुक्तियों को वापस नहीं लिया जाता, तब तक यह विरोध थमेगा नहीं।

मुख्यमंत्री का विरोध

प्रदर्शन में शामिल कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री मोहन यादव के पोस्टर लिए हुए थे। उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड में इस तरह की नियुक्ति, सरकार का हस्तक्षेप है। “तानाशाही नहीं चलेगी” जैसे नारे लगाते हुए, प्रदर्शनकारियों ने सरकार से कानून पर पुनर्विचार करने की मांग की।

धार्मिक आस्था पर प्रभाव

प्रदर्शनकारियों ने यह भी बताया कि वक्फ संपत्तियां मुस्लिम समाज की अमानत हैं और उनके प्रबंधन में ऐसे लोगों को शामिल किया जाए, जिन पर समुदाय का विश्वास हो। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अपना निर्णय नहीं बदला, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

सरकार की ओर से प्रतिक्रिया

मध्य प्रदेश के मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने वक्फ कानून-2026 के लागू होने की खुशी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह निर्णय वक्फ बोर्ड के लिए सकारात्मक प्रभाव लाएगा। सारंग ने यह भी स्पष्ट किया कि वक्फ बोर्ड का कार्य केवल मस्जिदों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कहीं अधिक व्यापक है।

पारदर्शिता का वादा

श्री हिंदू उत्सव समिति एवं संस्कृति बचाओ मंच ने भी इस निर्णय का स्वागत किया और कहा कि इससे वक्फ बोर्ड की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आएगी। समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी का मानना है कि इस प्रकार की मिश्रण से सभी वर्गों की निगरानी बढ़ेगी।  विभिन्न हिंदू संगठनों ने सरकार के इस कदम की सराहना की है। उनका मानना है कि वक्फ संपत्तियों और भूमि से जुड़े रिकॉर्ड्स में सुधार के लिए यह एक प्रगतिशील कदम है।

नए सदस्यों की पहचान

वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन करते हुए, इंदौर के मनोज मालपानी और गुना के अनिमेष भार्गव को नया सदस्य बनाया गया है। जनहित में ये बदलाव वक्फ (संशोधन) अधिनियम-2025 के माध्यम से किए गए हैं, जो कि देश में पहली बार हो रहा है। पहले वक्फ अधिनियम-1995 के तहत केवल मुस्लिम समुदाय के सदस्य ही बोर्ड में होते थे।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट ने भी टिप्पणी की है और पूछा कि यदि वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्य हो सकते हैं, तो क्या भविष्य में मुस्लिमों को हिंदू धार्मिक ट्रस्टों में शामिल होने की अनुमति दी जाएगी? इस विवाद ने कानूनी और धार्मिक दृष्टिकोण से कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

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