‘निकाह हलाला’ पर कोर्ट का सख्त फैसला, 2017 से अब तक की पूरी कहानी

The CSR Journal Magazine
इलाहाबाद हाई कोर्ट के हालिया निर्णय ने निकाह हलाला को फिर से चर्चा में डाल दिया है। अदालत ने कहा है कि यदि किसी महिला के साथ निकाह हलाला के नाम पर अपराध किया गया, तो इसे धार्मिक प्रथा बताकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पॉक्सो (POCSO) और भारतीय आपराधिक कानून जैसे कानून किसी भी पर्सनल लॉ से ऊपर हैं। इसके बाद से यह जानने की जरूरत महसूस हो रही है कि 2017 से अब तक निकाह हलाला को लेकर कोर्ट क्या कह चुका है।

क्या है निकाह हलाला?

निकाह हलाला एक धार्मिक प्रथा है, जो कुछ मुस्लिम समुदायों में प्रचलित है। इसके मुताबिक, अगर कोई पति अपनी पत्नी को तीन तलाक देकर दोबारा उसी से शादी करना चाहता है, तो उसे पहले किसी दूसरे पुरुष से शादी करनी होगी। दूसरी शादी के दौरान संबंध बनने के बाद ही वह अपनी पहली शादी में लौट सकती है। हालांकि, इस प्रक्रिया का कई महिलाओं के लिए दुरुपयोग होने की बातें सामने आती रही हैं।

प्रथा पर बहस का लगभग एक दशक

निकाह हलाला को लेकर भारत में लंबा विवाद चला आ रहा है। इसके समर्थक इसे इस्लामी कानून का हिस्सा मानते हैं, जबकि इसके विरोधी इसे महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन मानते हैं। अदालतों में कई मामलों की सुनवाई भी हुई है। इस प्रथा को चुनौती देने के लिए कई महिलाओं ने भारत की विभिन्न अदालतों का दरवाजा खटखटाया है।

सुप्रीम कोर्ट का मौन, लेकिन ताजा सुनवाई शुरू

2017 में सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक पर तो फैसला सुनाया, लेकिन निकाह हलाला के मुद्दे पर कोई निर्णय नहीं लिया। 2022 में कई मुस्लिम महिलाओं ने सुप्रीम कोर्ट में निकाह हलाला और बहुविवाह के विरुद्ध याचिका डाली। उनका कहना था कि यह प्रथा महिलाओं के समानता, गरिमा और सम्मान के अधिकार का उल्लंघन करती है। सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने मामले की सुनवाई शुरू की, लेकिन अभी तक इसका कोई अंतिम फैसला नहीं आया है।

उत्तराखंड में आया पहला मामला

हाल ही में, उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होते ही निकाह हलाला से संबंधित पहला मामला दर्ज हुआ। हरिद्वार की एक महिला ने अपने पति सहित ससुराल वालों के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज कराया था। उनका आरोप था कि पति ने हलाला के नाम पर उन्हें अन्य पुरुष से शादी के लिए मजबूर किया। इस मामले में पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ उचित धाराओं में केस दर्ज किया।

अखिर क्या है इलाहाबाद हाई कोर्ट का ताजा मामला?

इलाहाबाद हाई कोर्ट के सामने एक महिला ने आरोप लगाया कि उसकी कम उम्र में शादी हुई और बाद में उसे तीन तलाक दिया गया। फिर निकाह हलाला के तहत उसकी दूसरी शादी कराई गई, जहां उसके साथ रेप हुआ। कोर्ट ने आरोपियों की याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि यदि हलाला के नाम पर यौन अपराध हो रहे हैं तो उन पर भी कानून लागू होगा।

क्या निकाह हलाला की संवैधानिक वैधता पर होगा फैसला?

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने साफ कहा है कि निकाह हलाला धर्म की आड़ में छिपाए जाने वाले अपराध नहीं बर्दाश्त किए जाएंगे। लेकिन अदालत ने निकाह हलाला की संवैधानिक वैधता पर कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की है। इससे साफ है कि इस प्रथा और इसके दुष्प्रयोग को लेकर कानूनी लड़ाई अब भी जारी है।

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