हजारों संपत्तियां, नाममात्र की कमाई: मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड पर CAG की रिपोर्ट और सख्त कार्रवाई

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मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड की प्रॉपर्टी और कमाई का चौंकाने वाला खुलासा

साल 2025 के नए वक्फ अधिनियम के तहत मध्य प्रदेश ने वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन करने में प्रमुखता दिखाई है। यह राज्य पहला बन गया है जिसने इस अधिनियम के तहत अपने बोर्ड के सदस्यों की नियुक्ति की है। इस बोर्ड में अब दो हिंदू सदस्यों को भी शामिल किया गया है, जो एक नई पहल मानी जा रही है।

नए वक्फ अधिनियम के तले पुनर्गठन

मध्य प्रदेश सरकार द्वारा नए वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के तहत राज्य वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन कर दिया गया है। इस नए अधिनियम को लागू करने वाला मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है।

पुनर्गठन और नए खुलासे

नवगठित 10-सदस्यीय बोर्ड में सांवर पटेल को अध्यक्ष के रूप में पुनः नियुक्त किया गया है। इतिहास में पहली बार, बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम (हिंदू) सदस्यों, इंदौर के मनोज मालपानी और गुना के अनिमेष भार्गव को शामिल किया गया है।

प्रॉपर्टी और कमाई का खुलासा

बोर्ड के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, मध्य प्रदेश में 15,008 वक्फ संपत्तियां दर्ज हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इतनी विशाल संपत्तियों से बोर्ड की वार्षिक आय 2 करोड़ रुपये से भी कम है। बोर्ड का अनुमान है कि नए कानून और नियमों के तहत सही प्रबंधन होने से यह आय कम से कम 100 करोड़ रुपये सालाना हो जाएगी।

पारदर्शिता और डिजिटल रिकॉर्ड

वक्फ संपत्तियों में हेराफेरी और अवैध कब्जों को रोकने के लिए, प्रदेश की 100% वक्फ संपत्तियों को ‘उम्मीद’ पोर्टल (UMEED Portal) पर दर्ज कर लिया गया है। सीएजी रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि 2018 से 2023 के बीच लगभग 77 करोड़ रुपये की सरकारी संपत्तियों (राजस्व और वन विभाग की जमीन) पर वक्फ बोर्ड द्वारा धार्मिक स्थल (मस्जिदें/मजारें) बना लिए गए। इस पर राज्य के राजस्व मंत्री ने जांच के आदेश दिए हैं।

वक्फ बोर्ड की संपत्तियों की संख्या

वक्फ प्रबंधन सूचना प्रणाली (WAMSI) और मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राज्य में कुल 33,221 से अधिक वक्फ संपत्तियां दर्ज हैं। नए वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के लागू होने के बाद, इन संपत्तियों के वर्गीकरण, डिजिटल पंजीकरण और वर्तमान स्थिति में बड़े बदलाव आए हैं।

संपत्तियों का श्रेणीवार वर्गीकरण

राज्य की कुल पंजीकृत संपत्तियों में धार्मिक, सामाजिक और व्यावसायिक स्थल शामिल हैं-
कब्रिस्तान (Graveyards): 5,535 संपत्तियां
मस्जिदें (Mosques): 4,302 संपत्तियां
दरगाह और मजारें (Dargahs & Mazars): 3,414 संपत्तियां
मकान (Houses): 2,145 संपत्तियांदुकानें (Shops): 1,738 संपत्तियां
ईदगाह (Eidgahs): 576 संपत्तियां
इमामबाड़े (Imambaras): 343 संपत्तियां
मदरसे (Madrasas): 217 संपत्तियां

भौगोलिक वितरण (प्रमुख जिले)

मध्य प्रदेश में वक्फ संपत्तियों का सबसे बड़ा नेटवर्क इन जिलों में फैला हुआ है-
उज्जैन: 1,473 संपत्तियां
इंदौर: 1,307 संपत्तियां
भोपाल: 860 संपत्तियां
इसके अलावा विदिशा, सीहोर, रायसेन और शाजापुर-आगर जिलों में भी बड़ी संख्या में संपत्तियां दर्ज हैं।

वक्फ संपत्तियों की वर्तमान स्थिति और 100% डिजिटलीकरण (UMEED Portal)

मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है जिसने अपनी 99% से 100% वक्फ संपत्तियों का रिकॉर्ड ऑनलाइन कर दिया है। उम्मीद पोर्टल के जरिए कोई भी नागरिक किसी भी शहर की वक्फ संपत्ति का क्षेत्रफल और उसकी लोकेशन देख सकता है।

अवैध कब्जों पर सख्त कार्रवाई

नए कानून के बाद वक्फ माफियाओं और अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ अभियान चलाया गया है। हाल ही में बोर्ड ने संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ 41 करोड़ रुपये से अधिक के वसूली नोटिस जारी किए हैं। इसमें भोपाल के वक्फ यतीमखाना शाहजहानी के प्रबंधक को रिकॉर्ड 28.96 करोड़ रुपये और उज्जैन के मदर गेट मामले में 7.21 करोड़ रुपये का नोटिस दिया गया है।

सरकारी संपत्तियों पर विवाद

नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट के अनुसार, 2018 से 2023 के बीच लगभग 77 करोड़ रुपये की 33 सरकारी संपत्तियों (राजस्व और वन विभाग की जमीन) पर वक्फ बोर्ड द्वारा दावे या धार्मिक स्थल बनाने की बात सामने आई है, जिसकी जांच राज्य सरकार करा रही है। राजधानी भोपाल में भी पुलिस मुख्यालय (PHQ), पुलिस कंट्रोल रूम और नवबहार सब्जी मंडी सहित 47 सरकारी संपत्तियों पर वक्फ के दावों को लेकर कानूनी विवाद चल रहा है।

आय का सामाजिक उपयोग

संपत्तियों के सही प्रबंधन से होने वाली आय का उपयोग अब गरीब और मेधावी छात्र-छात्राओं को स्कॉलरशिप (छात्रवृत्ति), लैपटॉप वितरण और शैक्षणिक सुधारों के लिए किया जा रहा है। आप अपने जिले की विशिष्ट संपत्ति सूची और उनके खसरा नंबर की जांच मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड पब्लिक पोर्टल पर जाकर सीधे देख सकते हैं।

वक्फ बोर्ड का कार्य

मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड, एक्ट 1995 के तहत स्थापित एक कानूनी संस्था है, जिसका मुख्यालय भोपाल में स्थित है। इसका काम वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन और सुरक्षा करना है। इसके अलावा, बोर्ड यह सुनिश्चित करता है कि इन संपत्तियों से होने वाली आय धार्मिक, शैक्षणिक और सामाजिक कल्याण के कामों में सही तरीके से लगाई जाए।

वैश्विक दृष्टिकोण पर ध्यान

मध्य प्रदेश का यह कदम एक उदाहरण है, जो न सिर्फ भारत में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी धार्मिक सहिष्णुता की दिशा में एक सकारात्मक संदेश भेजता है। वक्फ बोर्ड की संरचना में विविधता को शामिल करना यह दर्शाता है कि प्रदेश कैसे सामाजिक एकता की ओर बढ़ रहा है।

कानूनी जिम्मेदारियां

मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड की जिम्मेदारियों में राज्य में सभी रजिस्टर्ड संपत्तियों का रिकॉर्ड रखना, वक्फ संपत्तियों को कब्जे से बचाना, विवादों में कानूनी कार्रवाई करना शामिल है। यह सुनिश्चित करना कि इन संपत्तियों से होने वाली आय का सही उपयोग हो, बोर्ड की प्राथमिकता है।

समाज के लिए महत्वपूर्ण भूमिका

वक्फ बोर्ड न केवल संपत्तियों का प्रबंधन करता है बल्कि समाज के कल्याण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इससे धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों को समर्थन मिलता है, जो समुदाय की जरूरतों को पूरा करने में मदद करती है।
मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड का यह नया रूप और कमाई का तरीका, प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को संजोने में महत्वपूर्ण है। इसके माध्यम से सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि वक्फ संपत्तियों का सही दिशा में इस्तेमाल हो।

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