अमरावती हॉस्टल में भूत की अफवाह से दहशत: 600 से अधिक छात्र-छात्राओं ने रातों-रात छोड़ा हॉस्टल

The CSR Journal Magazine

महाराष्ट्र के हॉस्टल में भूत का खौफ! 600 छात्राओं ने छोड़ा स्कूल, अजीबोगरीब घटना से फैली दहशत

महाराष्ट्र के अमरावती जिले में ‘भूत-प्रेत’ की अफवाह के चलते एक सरकारी आदिवासी आवासीय स्कूल (आश्रमशाला) से 608 छात्र-छात्राओं द्वारा हॉस्टल छोड़ने की घटना सामने आई है। अमरावती के आदिवासी बहुल मेलघाट क्षेत्र के चिखलदरा तालुका स्थित डोमा शासकीय आश्रमशाला में रात के समय अजीब आवाजें सुनाई देने के बाद यह दहशत फैली। हालांकि, डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों ने किसी भी तरह की अलौकिक शक्ति या भूत के दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे ‘मास हिस्टीरिया’ (Mass Hysteria) यानी सामूहिक मानसिक तनाव की स्थिति करार दिया है। प्रशासन और अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति द्वारा बच्चों और परिजनों की काउंसलिंग की जा रही है।

अमरावती की आश्रमशाला में ‘भूत’ की अफवाह से दहशत: 600 से अधिक छात्र-छात्राओं ने रातों-रात छोड़ा हॉस्टल

महाराष्ट्र के अमरावती जिले के आदिवासी बहुल मेलघाट इलाके से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ चिखलदरा तहसील के अंतर्गत आने वाले डोमा गांव की ‘शासकीय आश्रमशाला’ (सरकारी आदिवासी आवासीय विद्यालय) में भूत-प्रेत की अफवाह के बाद भारी हड़कंप मच गया है। हॉस्टल में रहने वाले कुल 810 छात्र-छात्राओं में से 608 विद्यार्थियों ने डर के मारे हॉस्टल खाली कर दिया और अपने-अपने घरों को लौट गए हैं। घर लौटने वाले बच्चों में 345 छात्राएं और 263 छात्र शामिल हैं। प्रशासन अब इस मामले की गहराई से जांच कर रहा है।

कैसे शुरू हुआ विवाद और डर का माहौल?

अधिकारियों और हॉस्टल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस खौफ की शुरुआत बीते 22 जुलाई को हुई थी। हॉस्टल में रहने वाली चार छात्राओं ने अचानक अजीब और असामान्य व्यवहार करना शुरू कर दिया, जिसमें वे बिना किसी कारण के जोर-जोर से हंसने और रोने लगती थीं। धीरे-धीरे हॉस्टल की अन्य लड़कियों में भी यह डर बैठ गया। छात्राओं ने शिकायत की कि उन्हें रात के सन्नाटे में घुंघरुओं के बजने, किसी के अचानक हंसने और सिसकियां लेकर रोने की रहस्यमयी आवाजें सुनाई देती हैं। आदिवासी अंचल होने के कारण यह बात तेजी से हवा की तरह फैली और बच्चों के बीच यह अफवाह पुख्ता हो गई कि स्कूल परिसर में किसी ‘आत्मा का साया’ है। देखते ही देखते कुछ ही दिनों के भीतर 600 से ज्यादा बच्चे पढ़ाई बीच में छोड़कर माता-पिता के साथ घर चले गए।

स्थानीय मान्यताएं और अंधविश्वास

ग्रामीणों और छात्रों के बीच इस डर को लेकर कई तरह की मनगढ़ंत कहानियां भी तैर रही हैं। कुछ स्थानीय लोगों का दावा है कि स्कूल प्रशासन ने हाल ही में परिसर से एक महुआ का पेड़ कटवाया था, जिससे उस पर रहने वाली ‘आत्माएं’ नाराज हो गईं। एक अन्य चर्चा यह है कि आश्रमशाला के पीछे स्थित स्थानीय आदिवासियों के देवस्थान के पास से स्कूल के ड्रेनेज (नाली) की पाइपलाइन निकाली गई है, जिससे देवता कुपित हैं। कुछ लोग इसे पास के खेत में पूर्व में हुई एक आदिवासी युवक की मौत से भी जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि, स्कूल के प्रधानाध्यापक (Headmaster) संजय चौधरी ने पेड़ काटने और भूतिया दावों से जुड़ी इन सभी बातों का खंडन किया है।

मेडिकल टीम की रिपोर्ट: भूत नहीं, ‘मास हिस्टीरिया’ है वजह

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की डॉक्टरों की टीम तुरंत डोमा आश्रमशाला पहुंची। मनोचिकित्सकों और डॉक्टरों की टीम (जिसमें डॉ. अभिषेक नायडू व अन्य विशेषज्ञ शामिल थे) ने प्रभावित छात्राओं की गहन चिकित्सा और मनोवैज्ञानिक जांच की। जांच के बाद डॉक्टरों ने साफ किया कि यहाँ किसी भी तरह की ‘पैरानॉर्मल एक्टिविटी’ (अलौकिक घटना) का कोई सबूत नहीं है। डॉक्टरों के मुताबिक, यह मास हिस्टीरिया (Mass Hysteria) या मास साइकोजेनिक इलनेस (Mass Psychogenic Illness) का क्लासिक मामला है। अत्यधिक पढ़ाई का तनाव, हॉस्टल में क्षमता से अधिक भीड़, खराब खान-पान, साफ-सफाई की कमी और घर की याद (Homesickness) के कारण कुछ बच्चियों में गंभीर मानसिक तनाव देखा गया। जब एक समूह में घबराहट और डर पैदा हुआ, तो वह स्थानीय अंधविश्वास के चलते महामारी की तरह बाकी बच्चों में भी फैल गया।

प्रशासन और सामाजिक संस्थाएं मुस्तैद, काउंसलिंग जारी

घटना के बाद अंधविश्वास के खिलाफ काम करने वाली संस्था महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति (MANS) के वरिष्ठ पदाधिकारी भी स्कूल पहुंचे। उन्होंने छात्रों और उनके अभिभावकों से मुलाकात कर उन्हें वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।अमरावती के सांसद बलवंत वानखेड़े ने भी इस घटना पर संज्ञान लेते हुए बच्चों और अभिभावकों से बातचीत की है। उन्होंने बच्चों से कहा कि वे किसी भी काल्पनिक डर से मुक्त होकर वापस स्कूल लौटें और अपनी पढ़ाई शुरू करें। स्कूल के हेडमास्टर संजय चौधरी के अनुसार, प्रशासन लगातार बच्चों के घरों पर संपर्क साध रहा है और विशेष काउंसलिंग सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। अच्छी बात यह है कि काउंसलिंग के बाद कुछ बच्चों ने हॉस्टल लौटना शुरू कर दिया है और स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है।इस घटना से जुड़े जमीनी हालात और प्रशासन की तैयारियों को समझने

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