100 रुपये में 450KM चलेगी कार, हवा में उड़ेंगी बसें? इथेनॉल के बाद ग्रीन हाइड्रोजन पर भारत का सबसे बड़ा दांव

The CSR Journal Magazine
इथेनॉल के बाद अब भारत ग्रीन हाइड्रोजन पर जोर दे रहा है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बताया है कि एक किलो ग्रीन हाइड्रोजन से कार 450 किलोमीटर तक चल सकती है और इसके लिए लागत को 100 रुपये प्रति किलो तक लाने का लक्ष्य है। इसके साथ ही गडकरी ने फ्लाइंग बसों की योजना का भी जिक्र किया। ऐसे में सवाल उठता है, क्या ग्रीन हाइड्रोजन भारत के परिवहन का भविष्य बन सकता है?

सरकार का बड़ा फोकस ग्रीन हाइड्रोजन पर

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के दौरान नितिन गडकरी ने ग्रीन हाइड्रोजन के विकास पर तेजी से काम करने की बात कही। उन्होंने बताया कि कोयले से बनी हाइड्रोजन को ब्लैक हाइड्रोजन, जबकि जल से बनी को ग्रीन हाइड्रोजन कहा जाता है। वर्तमान में इसकी लागत करीब 300 रुपये है, जिसे घटाकर 100 रुपये प्रति किलो करने का लक्ष्य है। यह पारंपरिक ईंधनों के मुकाबले एक बड़ा कदम है, जो परिवहन क्षेत्र को अधिक स्वच्छ बनाएगा।

क्या सच में उड़ेंगी फ्लाइंग बसें?

गडकरी ने कहा कि उनके मंत्रालय की योजना है कि भविष्य में उड़ने वाली बसें भी होंगी। भारत में सी-प्लेन सेवा की शुरुआत हो चुकी है, और उन्होंने उड़ने वाली बसों की तकनीक पर अध्ययन का जिक्र किया। हालांकि, इसकी लॉन्चिंग की तारीख अभी तय नहीं की गई है। उड़ने वाली बसें शहरी परिवहन का एक नया मॉडल बन सकती हैं।

फ्लाइंगबस की तकनीक और सुविधा

गडकरी के अनुसार, फ्लाइंग बसों को पारंपरिक विमानों की तरह नहीं देखा जाएगा। ये असल में एलिवेटेड केबल बस सिस्टम होंगी, जो जमीन से ऊंचे ट्रैक पर चलेंगी। हर बस में 135 यात्री यात्रा कर सकेंगे और ये पूरी तरह से ऑटोमैटिक होंगी। ये बसें 30 सेकंड चार्जिंग पर 40 किलोमीटर तक यात्रा कर सकेंगी।

ग्रीन हाइड्रोजन क्या है?

ग्रीन हाइड्रोजन पानी को इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया द्वारा हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में अलग करके बनाया जाता है। इसे रिन्यूएबल एनर्जी से तैयार किया जाता है, जिससे कार्बन उत्सर्जन लगभग शून्य रहता है। इसका उपयोग भारी परिवहन साधनों के साथ-साथ उत्पादन उद्योगों में किया जा सकता है।

मिशन की वित्तीय योजना

केंद्र सरकार ने 4 जनवरी 2023 को राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को मंजूरी दी, जिसके तहत 19,744 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। 2030 तक देश में कम से कम 5 मिलियन मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य है। इससे 6 लाख से ज्यादा रोजगार सृजित होंगे और कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।

भारत की तैयारी और आगे का रास्ता

भारत ने फरवरी 2026 तक 8,000 टन प्रति वर्ष की ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। प्रमुख बंदरगाहों को ग्रीन हाइड्रोजन हब में परिवर्तित किया जा रहा है। इसके अलावा, हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना और घरेलू तकनीक विकास पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

इथेनॉल से ग्रीन हाइड्रोजन की ओर बढ़ता भारत

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