नेशनल हाइवे में खराबी… बिहार, यूपी और महाराष्ट्र से ज्यादा इस छोटे राज्य में हुए एक्शन

The CSR Journal Magazine
नेशनल हाइवे की स्थिति को लेकर बिहार, यूपी और महाराष्ट्र की तुलना में एक छोटे राज्य में अधिक कार्रवाई की गई है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि सरकार ने कई समस्याओं का संज्ञान लिया है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि सभी मरम्मत का खर्च ठेकेदारों पर ही डाला जा रहा है। सरकार नए तरीकों को अपनाने पर भी भारी ध्यान दे रही है ताकि सड़क निर्माण में गुणवत्ता में सुधार किया जा सके।

सख्ती और गुणवत्ता में सुधार की दिशा में कदम

सड़क निर्माण में गुणवत्ता सुधारने के लिए सख्ती के साथ बेहतर डिजाइन और निगरानी पर जोर रखा जा रहा है। नितिन गडकरी ने स्पष्ट किया कि पिछले कुछ वर्षों में कुछ सड़कें जल्दी खराब होने की समस्याएं सामने आई हैं, जिनमें खराब डिजाइन, घटिया सामग्री और अधिक सब-कॉन्ट्रैक्टिंग मुख्य कारण रहे हैं। ऐसे मामलों की जांच भी की जाती है और दोषी ठेकेदारों को मरम्मत अपने खर्च पर करने के लिए मजबूर किया जाता है।

इमरान प्रतापगढ़ी के सवालों के जवाब

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने नेशनल हाइवे प्रोजेक्ट के तहत हो रही देरी को लेकर सरकार से कई सवाल पूछे। उन्होंने यह भी पूछा कि इतने वर्षों में कितने ठेकेदारों पर कार्रवाई की गई और क्या निर्धारित मुआवज़ा वसूला गया। सरकार ने बताया कि ठेकेदारों पर जुर्माना और डैमेज की वसूली की गई है और कई ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट भी किया गया है।

तीसरे पक्ष की गुणवत्ता ऑडिट का मामला

थर्ड-पार्टी क्वालिटी ऑडिट के मामले में सरकार ने बताया कि यह सभी प्रोजेक्ट्स के लिए अनिवार्य नहीं है, लेकिन जरूरत के हिसाब से केस-टू-केस ऑडिटर नियुक्त किए जाते हैं। ये स्वतंत्र रूप से यह सुनिश्चित करते हैं कि सभी कार्य मानकों के अनुशार हो रहे हैं। साथ ही, रोजमर्रा की निगरानी के लिए अधिकारी भी समय-समय पर चेक करते हैं।

राज्यों में कार्रवाई के आंकड़े

सरकार के द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार, केरल में सबसे अधिक कार्रवाई हुई है। बिहार, यूपी और महाराष्ट्र में अपेक्षाकृत कम एक्शन हुआ है। महाराष्ट्र में कुल 6 प्रोजेक्ट्स पर कार्रवाई की गई है, जबकि उत्तर प्रदेश और बिहार में क्रमशः 3 और 5 प्रोजेक्ट्स पर एक्शन लिया गया है।

कमजोरियों पर कराई गई कार्रवाई

केरल में 2024 और 2025 के दौरान 8 प्रोजेक्ट्स में कार्रवाई की गई। यहां तक कि कुछ ठेकेदारों को अपने खर्चे पर मरम्मत करवानी पड़ी। इसके अलावा, कुछ ठेकेदारों और अधिकारियों को सस्पेंड भी किया गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है।

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