पाकिस्तान में सोने की लहर: सिंधु नदी में छिपा ‘खजाना’

The CSR Journal Magazine
इस्लामाबाद: सिंधु नदी, जो तिब्बत से निकलकर भारत और पाकिस्तान में बहती है, अब सोने के भंडार के लिए जानी जा रही है। पाकिस्तान के गिलगित-बाल्टिस्तान में सिंधु नदी की तलहटी में बड़े पैमाने पर सोना निकाला जा रहा है। इसके लिए भारी मशीनों का सहारा लिया जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों से विभिन्न शहरों में सोने की खोज तेज हो गई है, जिससे स्थानीय लोगों को भी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों की समस्याएं बढ़ीं

सोना निकालने के लिए शुरू की गई खनन गतिविधियों ने आसपास के खेतों को भी खतरे में डाल दिया है। पाकिस्तान के गिलगित-बाल्टिस्तान के खनिज विभाग ने बताया है कि सोने के खनन के लिए 77 लीज समझौते जारी किए गए हैं। इनमें से पांच समझौते विदेशी कंपनियों को दिए गए हैं, जबकि कई लोग अवैध तरीके से भी खनन कर रहे हैं। इस गतिविधि से जहां कुछ लोग अमीर हो रहे हैं, वहीं स्थानीय किसान और ग्रामीण इसके दुष्परिणामों से जूझ रहे हैं।

क्या है सिंधु का ऐतिहासिक महत्व?

सिंधु नदी, जो की दुनिया की पुरानी और सबसे लंबी नदियों में से एक मानी जाती है, भारतीय उपमहाद्वीप की पहचान है। इसकी घाटियों में 3300 से 1300 ईसा पूर्व के बीच सिंधु घाटी सभ्यता का विकास हुआ था। हालांकि, 1947 में भारत और पाकिस्तान के विभाजन के बाद यह नदी दोनों देशों से होकर बहने लगी, जिससे इसके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व में बढ़ोतरी हुई। हाल के वर्षों में इस नदी में मिलने वाले सोने ने दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है।

सोने के खजाने के बारे में नई जानकारियां

पाकिस्तान सरकार ने बताया है कि सिंधु नदी में सोने के भंडार की कीमत 600 अरब पाकिस्तानी रुपये हो सकती है। शोध के अनुसार, पाकिस्तान के उत्तरी पहाड़ी इलाकों, विशेषकर हिमालय से कई सालों पहले यह सोना उत्पन्न हुआ। यह प्रक्रिया तब起 हुई जब टेक्टोनिक प्लेटों से पहाड़ बने और सोने के कण नदी में मिले। ये कण धीरे-धीरे नदी के तेज बहाव के साथ बहते हैं और इसके तलहटी में जमा हो जाते हैं। ऐसे में नदी के किनारे और पानी के स्तर कम होने पर सोने के कणों को निकालना आसान होता है।

कितना सोना है नदी की तलहटी में?

हालिया रिसर्च के अनुसार, सिंधु नदी के अटक जिले में 32 किलोमीटर के इलाके में बेहद बड़ी मात्रा में सोना फैला है। यह सोना 32.6 मीट्रिक टन तक हो सकता है। इसके अलावा, गिलगित-बाल्टिस्तान और अन्य क्षेत्रों में वैध और अवैध तरीके से भी खनन का कार्य जारी है। पानी के स्तर में कमी आने पर सोने के कणों को ढूंढना आसान हो जाता है। हालांकि, जब पानी अधिक होता है, तो भारी मशीनों का उपयोग करना पड़ता है, जिससे स्थानीय लोगों की परिस्थितियों में और परेशानी बढ़ती है।

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