शूटर जसपाल राणा के निधन ने सभी को हैरान कर दिया है। हार्ट अटैक ने 15 बार राष्ट्रीय चैंपियन रह चुके गोल्डन बॉय को हमसे छीन लिया। डॉक्टरों के अनुसार, मरीज का समय पर अस्पताल न पहुंचना और लक्षणों की समझ में कमी जानलेवा साबित हुई। शुक्रवार सुबह अचानक आई यह खबर सभी के लिए दुखदायी रही। जसपाल राणा, जिन्हें गोल्डन बॉय के नाम से जाना जाता था, हृदय गति रुकने से निधन हो गए। अस्पताल प्रशासन ने इसकी पुष्टि की है कि हार्ट अटैक उनकी मृत्यु का कारण बना। अब सवाल उठ रहा है कि जो खिलाड़ी आमतौर पर फिजिकली फिट होता है, वह इस तरह की समस्या से कैसे ग्रसित हो गया।
दर्द को समझने में हुई देरी
मूलचंद मेदांता के कार्डियक यूनिट के डॉयरेक्टर, डॉ. तरूण कुमार ने बताया कि हार्ट अटैक के मामलों में ‘गोल्डन आवर’ का महत्व है। अगर पेशेंट एक से तीन घंटे के भीतर अस्पताल पहुंचता है, तो उसकी जिंदगी बचने की संभावना बढ़ जाती है। शायद जसपाल राणा के मामले में ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने दर्द शुरू होने पर इसे गंभीरता से नहीं लिया। डॉक्टर ने कहा कि कई बार चेस्ट पेन हार्ट अटैक का संकेत होता है, लेकिन लोग इसे गैस का दर्द समझकर गलती कर देते हैं। इसी कन्फ्यूजन के चलते कई बार मरीज सही समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाते, जिससे स्थिति गंभीर हो जाती है।
देरी कर देने से ऑपरेशन क्यों नहीं होता कारगर?
डॉ. तरूण ने बताया कि कई बार मरीज गोल्डन आवर को मिस कर देते हैं। इसके बाद जब वे अस्पताल पहुंचते हैं, तब स्थिति काफी बिगड़ चुकी होती है। ऐसे मामलों में, अगर मरीज को स्टेंट भी डाला जाए, तो भी हालत में सुधार होना मुश्किल हो जाता है। जसपाल राणा के केस में भी यही हुआ। समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण उन्हें गंभीर हार्ट अटैक का सामना करना पड़ा।
अस्पताल प्रशासन का बयान
डॉ. बलबीर सिंह, जो मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत में कार्यरत हैं, ने बताया कि जसपाल राणा को गंभीर हार्ट अटैक का सामना करना पड़ा था, जिसकी वजह यात्रा के दौरान हुए लगातार सीने के दर्द को माना गया। अस्पताल पहुंचने पर उनकी स्थिति बहुत गंभीर थी और दिल की संबंधित ऑर्टरी पूरी तरह से ब्लॉक हो गई थी। जब जांच की गई, तो पाया गया कि उनकी दिल की पंपिंग क्षमता काफी कम हो गई थी, जिससे उन्हें हार्ट फेलियर की समस्या हो गई थी।
जसपाल राणा का खेल जगत में योगदान
जसपाल राणा हाल ही में जर्मनी में आयोजित आईएसएसएफ विश्व कप से भारतीय दल के सदस्य के रूप में लौटे थे। दिल्ली में उतरने के बाद उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उन्हें स्टेंट डाले गए। राणा की पत्नी, बेटी, बेटा, पिता, और बहन सहित परिवार के लोग उनके साथ हैं। राणा एक हाई परफार्मेंस कोच के रूप में भारतीय पिस्टल निशानेबाजों के लिए कार्यरत थे। उन्हें 2020 में द्रोणाचार्य पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था, जो खेल के प्रति उनके योगदान का प्रतीक है।
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