ED ने तोड़ा बर्मी सुपारी तस्करी का सिंडिकेट; मिजोरम में 9 ठिकानों पर छापेमारी, फर्जी ई-वे बिल का खेल उजागर

The CSR Journal Magazine

फर्जी कागजात और करोड़ों का कारोबार: मिजोरम-म्यांमार सीमा पर ED का एक्शन

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 4 जून 2026 को मिजोरम-म्यांमार सीमा पर स्थित चम्फाई जिले में अवैध बर्मी सूखी सुपारी (Areca nut) की बड़े पैमाने पर तस्करी करने वाले एक अत्यधिक संगठित सीमा-पार नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत केंद्रीय एजेंसी ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से तस्करी नेटवर्क के प्रमुख स्थानीय मददगारों के आवासों और व्यावसायिक परिसरों सहित कुल 9 ठिकानों पर व्यापक छापेमारी की है।

चम्फाई में बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़

प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने मिजोरम-म्यांमार सीमा पर एक बड़े अवैध बर्मी सुपारी तस्करी के नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। यह कार्रवाई चम्फाई जिले में 9 ठिकानों पर हुई है, जहां ED की टीम ने एक साथ छापेमारी की। जांच एजेंसी का कहना है कि यह गिरोह फर्जी ई-बिल और जाली डॉक्यमेंट के जरिए करोड़ों की सुपारी को भारत में ला रहा था। कामकाज के इस तरीके से अवैध तरीके से तस्करी का यह जाल काफी व्यापक हो गया है।

तस्करी के रास्ते और जाल

जांच से पता चला है कि तस्करी की खेपें म्यांमार से तियू नदी के रास्ते भारत में लाई जाती थीं। सीमा पार कराने के बाद इस खेप को चम्फाई और आसपास के स्थानीय गोदामों में सुरक्षित रूप से छुपाकर स्टोर किया जाता था। फिर, फर्जी ई-वे बिल और जाली दस्तावेजों के माध्यम से इसे अन्य हिस्सों में भेजा जाता था। ED ने दावा किया है कि इस अवैध कारोबार के जरिए स्लिपिंग हंड्रेड्स ऑफ करोड़ रुपये की रकम पैदा की गई थी।

फर्जी कागजात का खेल

जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने स्थानीय जनजातीय पहचान का फायदा उठाते हुए खुद को सीमा पार व्यापार से जुड़े वैध कारोबारी बताने की कोशिश की। जब कस्टम विभाग ने सुपारी की खेप को जब्त किया, तो आरोपियों ने पुराने और असंबंधित आयात दस्तावेजों का इस्तेमाल कर जब्त माल को छुड़ाने का प्रयास भी किया। यह दर्शाता है कि तस्करी में शामिल लोग कितने सतर्क थे और उन्होंने अपने अभियान को छिपाने की कोशिश की।

करोड़ों रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग

ईडी की जांच के अनुसार, इस अवैध सप्लाई चेन के माध्यम से सैकड़ों करोड़ रुपये का काला धन पैदा किया गया और विभिन्न वित्तीय रास्तों से उसकी व्यवस्थित लेयरिंग (Systematic Layering) की गई। आरोपी कस्टम अधिकारियों को चकमा देने के लिए अपने स्थानीय आदिवासी दर्जे (Local Tribal Status) का फायदा उठाते थे। वे पुराने और असंबंधित आयात दस्तावेजों को पेश करके सीमा शुल्क विभाग द्वारा जब्त किए गए अवैध माल को छुड़ाने के लिए ‘फ्रंट क्लेमर्स’ (Front Claimants) के रूप में काम करते थे।

ED का निरंतर कार्रवाई

अभी ED की कार्रवाई जारी है और एजेंसी को कई महत्वपूर्ण दस्तावेज तथा डिजिटल प्रमाण मिल सकते हैं। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत की गई है और छापेमारी के दौरान जब्त किए गए दस्तावेजों व सामग्रियों के विश्लेषण के बाद इस रैकेट से जुड़े कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है। इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। विभिन्न माध्यमों से तस्करी के इस जाल को तोड़ना और आरोपियों को पकड़ना एजेंसी के लिए एक बड़ा चुनौती साबित हो रहा है।

बड़ी कार्रवाई के संकेत

जहां एक ओर ED की ये कार्रवाइयाँ चल रही हैं, वहीं दूसरी ओर, अवैध बर्मी सुपारी के खेल में शामिल अन्य लोगों पर भी नज़र रखी जा रही है। यह कार्रवाई ना केवल तस्करों के लिए, बल्कि आम लोगों के लिए भी एक चेतावनी है कि कानून के हाथ हमेशा लंबे होते हैं। चम्फाई में चल रही यह छापेमारी एक बड़े संघर्ष का संकेत देती है, जो देश में अवैध तस्करी और कारोबार के खिलाफ चल रहा है।

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